धर्मनिरपेक्षता के इस झीनी चादर को थोड़ी देर के लिए अलग कर दीजिये तो तमाम राजनीतिक दलों का चरित्र लगभग एक समान नजर आता है. इनकी ज्यादातर नीतियां एक समान हो गई हैं.
लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती जैसे नेताओं ने राम जन्मभूमि आंदोलन को भाजपा की सत्ता प्राप्ति के आधार के रूप में स्थापित किया था, पर आज भाजपा के शीर्ष नेतृत्व में उनके लिए कोई जगह नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट ने निजता के अधिकार को ऐसा नैसर्गिक मौलिक अधिकार माना है जो जीवन के मौलिक अधिकार से जुड़ा हुआ है. इस महत्वपूर्ण फैसले के बावजूद हम ‘स्नूपगेट’ का सामना कर रहे हैं
सऊदी युवराज मोहम्मद बिन सलमान भले ही इमरान ख़ान की अनदेखी करें और नरेंद्र मोदी से मेलजोल बढ़ाएं, पर वह पाकिस्तानी सेना के साथ अपने सैन्य संबंधों को दरकिनार नहीं कर सकते.
भारत आज इतना मजबूत हो चुका है कि कोई उसे दबा नहीं सकता. यह तथ्य हमें ज्यादा सुरक्षित महसूस करने और पुराने खतरों या डरों से मुक्त होने के लिए काफी होना चाहिए था.
मोदी सरकार खुश हो सकती है कि 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' की रैंकिंग में में भारत की रैंकिंग ऊपर हुई है मगर वह इन तथ्यों की अनदेखी नहीं कर सकती कि खुशहाली सूचकांक के लिहाज से भारत 140वें नंबर पर है और दक्षिण-पूर्व एशिया में सबसे ज्यादा आत्महत्याएं यहीं होती हैं.
दिल्ली के लोग साफ हवा में सांस ले सकें, इसके लिए किसानों को मजबूर किया जा रहा है कि पराली जलाना बंद करें. इस बीच दिल्ली वाले अपनी गाड़ियों से डीजल का धुआं निकालते रहेंगे, जेनरेटर सेट चलाते रहेंगे और पटाखे तो वे फोड़ेंगे ही.
पाकिस्तान हम पर 'ईरान जैसा' हमला करने के लिए बेताब होगा, और चीन हमें 'असममित विस्तार' का मौका दिए बिना ही एक हवाई अभियान को अंजाम देने की योजना बना रहा होगा. भारत के पास खुद को बदलने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है.