भारतीय क्रिकेट का इतिहास ऐसे कई ‘स्पेशल टैलेंटेड’ खिलाड़ियों को भटकते देख चुका है. पृथ्वी साव के साथ अगर ऐसा हुआ तो इसका अफ़सोस हर क्रिकेट फ़ैन को होगा.
मोदी और केजरीवाल द्वारा आदर्श आचार संहिता को धता बताए जाने का मामला हो या अनुराग ठाकुर और आदित्यनाथ के विषाक्त बयानों का, चुनाव आयोग की पक्षपाती कार्रवाइयों से बचा जा सकता था.
न्यायिक व्यवस्थाओं का ही नतीजा है कि अदालत से दो साल से अधिक की सजा होते ही अब ऐसे सांसदों और विधायकों की सदस्यताा समाप्त हो रही है. लेकिन यह पर्याप्त नहीं है.
फिलहाल जो सुस्ती है उसकी असामान्य बात यह है कि यह बिना किसी बाहरी कारण के आई है, अगर बाहरी स्थितियां शांत हैं और इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत खराब होती है तो जाहिर है कि व्यवस्था में ही कोई कमजोरी है.
सीएए के विरोध में जुटे लोगों ने तो अपने हाथ में तिरंगा उठा रखा है और वे संविधान की प्रस्तावना का पाठ कर रहे हैं लेकिन प्रधानमंत्री अपने सहकर्मियों की ही जबान में बोलते हुए आंदोलन को अराजक और राष्ट्रविरोधी करार दे रहे हैं.
मोदी के लिए नेहरू वैसे ही हैं जैसे किसी बॉक्सर के लिए पंचिंग बैग होता है, वे एक भाषण में 23 बार उन पर हमला कर सकते हैं. इसके पीछे उनका मकसद न केवल नेहरू-गांधी परिवार और कांग्रेस को लांछित करके खत्म करना है बल्कि उनका मानना है कि नेहरू ने आज़ादी के बाद के भारत की जो कल्पना की थी वह ‘दोषपूर्ण’ थी.
मुंबई, दो फरवरी (भाषा) विपक्षी शिवसेना (उबाठा) ने सोमवार को दावा किया कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) नेता सुनेत्रा पवार के महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री...