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Monday, 2 February, 2026
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नीतीश कुमार को दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे से सीखना चाहिए

अगर बिहार विधानसभा के पिछले चुनाव की बात करें तो 2015 में बिहार में आरजेडी-जेडीयू और कांग्रेस का गठबंधन था और इन्होंने मिलकर जबर्दस्त जीत हासिल की थी.

पृथ्वी साव को समझना होगा- यूं ही कोई सचिन तेंदुलकर नहीं बन जाता…

भारतीय क्रिकेट का इतिहास ऐसे कई ‘स्पेशल टैलेंटेड’ खिलाड़ियों को भटकते देख चुका है. पृथ्वी साव के साथ अगर ऐसा हुआ तो इसका अफ़सोस हर क्रिकेट फ़ैन को होगा.

दिल्ली के चुनाव में मोदी-शाह की भाजपा के अरविंद केजरीवाल की आप से मात खाने के पांच कारण

नरेंद्र मोदी और अमित शाह की पराजित भाजपा के लिए सबसे बड़ी समस्या ये रही कि कामयाबी के इसके चुनावी नुस्खों ने ही इसे सर्वाधिक नुकसान पहुंचाया.

भाजपा के चाल चरित्र चेहरे का इस्तेमाल कर केजरीवाल ने कैसे साधी दिल्ली

दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल एक सशक्त चेहरा बन के उभरे पर उनके खिलाफ न भाजपा और न ही कांग्रेस कोई चेहरा खड़ा कर सके.

गुजरात से लेकर दिल्ली तक भाजपा के साथ है चुनाव आयोग, इसके लिए कांग्रेस भी दोषी है

मोदी और केजरीवाल द्वारा आदर्श आचार संहिता को धता बताए जाने का मामला हो या अनुराग ठाकुर और आदित्यनाथ के विषाक्त बयानों का, चुनाव आयोग की पक्षपाती कार्रवाइयों से बचा जा सकता था.

कैसा रहेगा राष्ट्रीय राजनीति में उतरने का अरविंद केजरीवाल का तीसरा प्रयास

नियति अरविंद केजरीवाल को तीसरा मौका दे रही है और वह अपनी पूर्व की गतलियों से सीख लेकर इस बार अच्छी पारी खेल सकते हैं.

आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को राजनीतिक दल चुनाव में क्यों देते हैं टिकट

न्यायिक व्यवस्थाओं का ही नतीजा है कि अदालत से दो साल से अधिक की सजा होते ही अब ऐसे सांसदों और विधायकों की सदस्यताा समाप्त हो रही है. लेकिन यह पर्याप्त नहीं है.

मोदी सरकार का अर्थव्यवस्था पर प्रदर्शन इतना बुरा नहीं, लेकिन कई मोर्चों पर और ज्यादा करने की जरूरत है

फिलहाल जो सुस्ती है उसकी असामान्य बात यह है कि यह बिना किसी बाहरी कारण के आई है, अगर बाहरी स्थितियां शांत हैं और इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत खराब होती है तो जाहिर है कि व्यवस्था में ही कोई कमजोरी है.

मोदी ने सीएए प्रदर्शनकारियों को देश विरोधी बताया, इमरजेंसी लगाने से पहले इंदिरा गांधी ने भी वैसा ही किया था

सीएए के विरोध में जुटे लोगों ने तो अपने हाथ में तिरंगा उठा रखा है और वे संविधान की प्रस्तावना का पाठ कर रहे हैं लेकिन प्रधानमंत्री अपने सहकर्मियों की ही जबान में बोलते हुए आंदोलन को अराजक और राष्ट्रविरोधी करार दे रहे हैं.

गांधी परिवार और कांग्रेस को खत्म करने के लिए क्यों मोदी बार-बार नेहरू का इस्तेमाल कर रहे हैं

मोदी के लिए नेहरू वैसे ही हैं जैसे किसी बॉक्सर के लिए पंचिंग बैग होता है, वे एक भाषण में 23 बार उन पर हमला कर सकते हैं. इसके पीछे उनका मकसद न केवल नेहरू-गांधी परिवार और कांग्रेस को लांछित करके खत्म करना है बल्कि उनका मानना है कि नेहरू ने आज़ादी के बाद के भारत की जो कल्पना की थी वह ‘दोषपूर्ण’ थी.

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सुनेत्रा के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने का ‘सूत्रधार’ भाजपा नेतृत्व : शिवसेना (उबाठा) ने किया दावा

मुंबई, दो फरवरी (भाषा) विपक्षी शिवसेना (उबाठा) ने सोमवार को दावा किया कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) नेता सुनेत्रा पवार के महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.