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Friday, 27 February, 2026
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चीन एलएसी पर जमीन हथियाने के लिए नहीं बल्कि भारत को ये जताने के लिए है कि ‘बिग ब्रदर’ कौन है

भारत की कूटनीतिक और सैन्य प्रतिक्रियाओं के आधार पर ही पीएलए चीन के सैन्य उद्देश्यों को हासिल करने के तरीके तय करेगा.

कोरोना महामारी और चीन सीमा संकट के बीच बीजेपी का फोकस बिहार चुनाव पर

अगर एनडीए बिहार जीत लेता है तो वह ये कह पाएगा कि कोराना और चीन के मामले में उसकी नीतियों को जनता का समर्थन हासिल है. इसका फायदा उसे पश्चिम बंगाल समेत अन्य आने वाले विधानसभा चुनावों में भी होगा.

जब तक एलएसी पर गतिरोध जारी रहेगा, तब तक पाकिस्तानियों को चीनी हित में राष्ट्रीय हित नजर आएगा

फिलहाल पाकिस्तानी लोग खुश हैं कि भारत कूटनीतिक रूप से अलग थलग पड़ गया है. अब उनसे यह मत पूछिए कि यह कैसे हुआ.

आपातकाल के बाद की पीढ़ी उस दौर में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका और मीडिया सेंसरशिप को किस रूप में देखे

जब आपातकाल के 45 बरस बाद 2020 में हम पीछे मुड़कर उन परिस्थितियों को देखते हैं तो उस दौर में खींची गईं सारी लकीरें स्पष्ट नज़र आती हैं.

भाजपा ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर कैसे कब्ज़ा जमाया और क्यों चीन इस स्थिति को नहीं बदल सकता

इंदिरा गांधी के समय तक कांग्रेस ने सहजता से राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर नियंत्रण कर रखा था. लेकिन 1990 के दशक के मध्य से पांच उपायों के सहारे भाजपा राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर हावी होते गई.

यह कोई आपातकाल नहीं है, मोदी-शाह की जोड़ी लोकतंत्र का इस्तेमाल करके ही लोकतंत्र को खत्म कर रही है

आज के वक्त की तुलना इमरजेंसी के दौर से करने में लगे हैं तो एक बात हमारी नजरों से ओझल हुई जा रही है कि संविधान के लागू होने के साथ इस देश में गणतंत्रात्रिक मुल्क होने का जो पहला अध्याय खुला था, वो कब का बंद हो चुका है.

नेहरू से लेकर मोदी तक किसी ने सरदार पटेल की चीन नीति को नहीं समझा

चीन के विस्तारवाद के खिलाफ भारत का बेहद सख्त रुख चाहते थे सरदार पटेल. उन्होंने कहा था कि भारत को एक साथ दो मोर्चों- चीन और पाकिस्तान पर भिड़ना है. खासकर तिब्बत संबंधी चीन की नीति को लेकर वे सशंकित थे.

गलवान संघर्ष एक निर्णायक मोड़ है जब भारतीय सैनिकों ने चीनियों के छक्के छुड़ा दिए

भारतीय लोकतंत्र की अराजक प्रकृति ने 19 जून की सर्वदलीय बैठक में दिए गए भ्रामक संदेशों के बवंडर से प्रधानमंत्री मोदी को बचा लिया, लेकिन गलवान संघर्ष के दो संदेश दुनिया तक पहुंच चुके हैं.

भारत में लॉकडाउन के समय का अनुशासन ढीला पड़ रहा है, कोविड से लड़ाई में लापरवाही भी बढ़ रही है

जीत से पहले जश्न मनाना और ‘कामयाबी’ की कहानियों पर ज्यादा कान देना खतरनाक हो सकता है. कोरोनावायरस जब तक पूरी तरह खत्म नहीं होता उसे खत्म हुआ मत मानिए.

मिलेनियल्स ने इंडिया शाइनिंग देखा है, वो 70 साल के नहीं बल्कि 30 साल के भारत पर मोदी को जज करेंगे

अधिकांश भारतीय मिलेनियल्स की राजनीतिक स्मृति अटल बिहारी वाजपेयी से शुरू होती है, जवाहरलाल नेहरू से नहीं. इसलिए, प्रधान मंत्रीनरेंद्र मोदी को पिछले 30 वर्षों के संदर्भ में आंका जाएगा, और निश्चित रूप से 70 वर्षों से फर्क नहीं पड़ने वाला.

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IDFC FIRST Bank धोखाधड़ी क्रेडिट क्वालिटी की कहानी नहीं, यह गवर्नेंस के बारे में है

जोखिम खत्म नहीं हुआ है. इसका रूप बदल गया है—यह नॉन-परफॉर्मिंग लोन की वजह से बैलेंस शीट पर दबाव से हटकर तेजी से बढ़ते डिजिटल सिस्टम को संभालने की ऑपरेशनल चुनौतियों में बदल गया है.

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मालगाड़ी के खंडाला घाट से अत्यधिक तेज गति से उतरने के मामले में जांच के आदेश दिए गए

मुंबई, 26 फरवरी (भाषा) मुंबई-पुणे रेल मार्ग पर पलसधरी और कर्जत रेलवे स्टेशन के बीच घाट सेक्शन में बृहस्पतिवार दोपहर करीब 50 डिब्बों वाली...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.