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Friday, 6 March, 2026
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‘जो उचित समझो वह करो’—इन पांच शब्दों ने सेना और शासन के रिश्ते की खाई उजागर की

रेचिन ला एक टैक्टिकल सफलता और एक स्ट्रेटेजिक चेतावनी थी. इसने एक ऐसे सिस्टम को सामने ला दिया जहां पॉलिटिकल लीडर बिना सीमा तय किए कंट्रोल चाहते हैं, और कमांडरों को स्ट्रेटेजिक ज़िम्मेदारी संभालने के लिए छोड़ देते हैं.

क्या कोई देश पूरी तरह संप्रभु है? ट्रंप की डिप्लोमेसी और कोल्ड वॉर से भारत ने क्या सीखा?

भारत का तनावग्रस्त पड़ोस उसके लिए रणनीतिक विकल्पों को कई तरह से सीमित करता है. ऐसे में आपके पास गहरी सांस लेने, आराम से सोचने का मौका नहीं है.

यूनुस के दौर में बांग्लादेश हर मोर्चे पर हारा, नए पीएम के सामने बहुत बड़ी चुनौती

ढाका घेराबंदी के 18 महीने बाद, बांग्लादेश के पास फिर से खुद को रीसेट करने का मौका है और दुनिया देख रही है.

भारत में केंद्र-राज्य रिश्तों में बदलाव की जरूरत, लेकिन उतना बड़ा नहीं जितना स्टालिन का दावा

एक राज्य सरकार का नई दिल्ली से वित्तीय स्वायत्तता की मांग करना, जबकि अपने स्थानीय निकायों को धन और निर्णय लेने के अधिकार से वंचित रखना, विडंबना है, जिसे नज़रअंदाज़ करना कठिन है — और इसका बचाव करना और भी कठिन है.

भारत 1971 को ही याद न करता रहे, बांग्लादेश से लेन-देन वाला रिश्ता बनाने की सोचें

बांग्लादेश की राजनीतिक व्यवस्था कुछ समय के लिए औपचारिक धर्मनिरपेक्षता के दौर में रहने के बाद बंटवारे के पहले वाली हकीकत के दौर की ओर लौट रही है. भारत को इसे समझते हुए रिश्ते तय करने चाहिए.

PM बनते ही तारिक रहमान का संदेश: व्यापारियों, भ्रष्टाचार और अपनी पार्टी को दी 3 बड़ी चेतावनी

अपने चुनाव से पहले के वादे—‘मेरे पास एक योजना है’—को दोहराते हुए तारिक रहमान ने कहा कि उन्होंने सभी को शामिल करने वाली रणनीतियों पर काम शुरू कर दिया है और उन्हें उम्मीद है कि लोग इस सफर में उनका साथ देंगे.

AI समिट ने दिखाया आज के भारत का सच—अव्यवस्था और लापरवाही की तस्वीर

इसमें कोई हैरानी नहीं कि बिल गेट्स ने AI समिट में भाषण नहीं दिया. यह आखिरी झटका हो सकता है.

तारिक रहमान सरकार डी-यूनुसिफिकेशन के मिशन पर है, यह भारत-बांग्लादेश संबंधों को ठीक करेगी

आगे चलकर, भारत और बांग्लादेश को यूनुस प्रशासन द्वारा द्विपक्षीय संबंधों को हुए नुकसान को ठीक करने के लिए दोगुनी कोशिश करनी होगी.

सोचिए अगर एपस्टीन फाइल्स में राहुल गांधी या MK स्टालिन का नाम होता, तब BJP और टीवी मीडिया क्या करते?

ये सवाल खत्म नहीं होने वाले हैं, लेकिन आने वाली पीढ़ियां जानेंगी कि किसने कठिन सवाल पूछने से इनकार किया और किसने नहीं.

दालों में आत्मनिर्भरता या आयात पर निर्भरता? क्या मोदी भारत के किसानों को भूल गए

जब आधे उपभोक्ता कम-उत्पादक कृषि अर्थव्यवस्था में फंसे हों, तो उन्हें कृषि कीमतों के उतार-चढ़ाव के लिए और ज्यादा खुला छोड़ना अपराध जैसा होगा.

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पश्चिम के प्रभुत्व का दौर खत्म हो चुका है, ग्लोबल साउथ तय करेगा अगली वैश्विक व्यवस्था: स्टब

नयी दिल्ली, पांच मार्च (भाषा) फिनलैंड के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर स्टब ने बृहस्पतिवार को कहा कि पश्चिम के प्रभुत्व वाले विश्व का दौर खत्म हो...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.