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Saturday, 25 April, 2026
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बंगाल का चुनावी नतीजा दुनिया भर में लोकतंत्र को क्यों प्रभावित करेगा

हिंदू राष्ट्रवादियों के लिए मुस्लिम वोटरों की संख्या बंगाल को बेहद अहम बनाती है. यह बीजेपी के वैचारिक प्रोजेक्ट के लिए सबसे बड़े पुरस्कारों में से एक है.

भारत को बहुत देर होने से पहले उर्वरक आयात पर अपनी निर्भरता कम करनी चाहिए

भारत की उर्वरक आयात पर निर्भरता को जो बात और भी बदतर बनाती है, वह केवल आयात की मात्रा ही नहीं, बल्कि वह अक्षमता है जिसके साथ देश इनका उपयोग करता है.

राहुल गांधी की नजर हिमंता सरमा को जेल भेजने पर, मगर असम में कांग्रेस के सामने ‘बिहार आकार’ की चुनौती

कांग्रेस ने हर महिला को 50,000 रुपये की सहायता देने का वादा किया है, लेकिन जैसा कि हमने हाल के कई चुनावों में देखा है, मतदाता इस कहावत को समझते हैं: 'नौ नकद, न तेरह उधार'

क्या कोई बाहरी कभी सच में गोवा का हिस्सा बन सकता है? नई किताब इसी सवाल से जूझती है

क्या हर कोई 'गोवा' को गलत तरीके से जी रहा है? प्रवासियों की हर लहर के पास एक अलग जवाब है.

पानी से वीज़ा और सुरक्षा तक—हसीना के बाद आगे बढ़े भारत-बांग्लादेश संबंध

बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान की इस हफ्ते नई दिल्ली की दो दिन की यात्रा, एक बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ, को ‘बड़ा कूटनीतिक ब्रेकथ्रू’ माना जा रहा है.

इस ‘किसी की भी नहीं’ वाली ईरान की जंग की कीमत क्या है? नैतिकता

महाभारत में विदुर कहते हैं कि बड़े हित के लिए त्याग ज़रूरी है. इससे सवाल उठता है: ईरान की जंग में ‘बड़ा हित’ क्या है?

ममता बनर्जी बनाम शक्तिशाली सिस्टम: असल में बंगाल चुनाव इसी बारे में है

मुख्यधारा मीडिया में लगातार, लगभग एक जैसा नैरेटिव दिखाया जाता है: बंगाल ‘कानूनहीन’, बंगाल ‘हिंसक’, बंगाल ‘अस्थिर’. हर घटना को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जाता है.

अल्पसंख्यक फिर से UDF के साथ खड़े हैं: क्या इससे केरल में LDF की जीत का सिलसिला टूट जाएगा

कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा झटका 2005 में के. करुणाकरण और उनके गुट का पार्टी से अलग होना था. उनके कई पुराने कार्यकर्ता आगे चलकर BJP के सिपाही बन गए.

मनमोहन सिंह के समय नक्सलवाद गिरावट पर था, सुदृढ़ीकरण के दौर में आई मोदी सरकार

2005 में UPA सरकार के दौरान छत्तीसगढ़ में सलवा जुडूम शुरू हुआ, आदिवासी युवाओं को हथियार देकर अपने ही लोगों के खिलाफ लड़ाई में उतारा गया.

जातिवाद भारतीय शहरों से खत्म नहीं हुआ है, बस उसने अंग्रेज़ी सीख ली है

शहरी भारत आज जातिवाद खत्म होने के दौर में नहीं है, बल्कि ऐसा दौर है जहां लोग जातिवाद मानना नहीं चाहते. वे ऊंच-नीच के फायदे तो चाहते हैं, लेकिन इसे मानने में शर्म महसूस करते हैं.

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राइटिंग्स ऑन दि वॉल—नक्सलबाड़ी की क्रांति से ‘विनर्स’ तक: बंगाल की नई इबारत

पश्चिम बंगाल चुनाव में वामपंथी दल और कांग्रेस खुरचन में हिस्सेदारी के लिए होड़ लगा रहे हैं. पूर्वी-मध्य भारत में माओवाद को कब्र में दफन कर दिया गया है, तो केरल में वे सरकार विरोधी दोहरी भावना से जूझ रहे हैं.

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राजनीति

देश

बंगाल में सत्ता में आने पर भाजपा की शीर्ष प्राथमिकता महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की होगी: शाह

कोलकाता, 25 अप्रैल (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि यदि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पश्चिम बंगाल की सत्ता में...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.