BCCI के फैसले ने हिंदू राइट के कट्टरपंथी गुट को नई जान दे दी है. अब उनमें इतना आत्मविश्वास आ गया है कि वे अपने सांप्रदायिक अभियानों के हिसाब से पॉलिसी में बदलाव करवा सकें.
ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में भारतीय विश्वविद्यालयों का योगदान अब भी कम है, खासकर जब इसकी तुलना एमआईटी और इम्पीरियल कॉलेज जैसे विदेशी संस्थानों से की जाती है.
जब सभी लोग नए साल का स्वागत कर रहे थे, तब बांग्लादेश में 50-वर्षीय एक हिंदू व्यक्ति को ज़िंदा जला दिया गया, दो हफ्तों में यह चौथा ऐसा हमला था. देश में फॉर-राइट के अपने संस्करण की पकड़ मजबूत होती जा रही है.
आप कहेंगे कि 1985-95 का दशक तो कब का बीत चुका लेकिन ऐसा है नहीं, क्योंकि उस दशक में जो मसले उभरे वे आज भी हमारे लोकतंत्र और सार्वजनिक विमर्शों पर हावी हैं.
अगर महिलाओं की भागीदारी बढ़ती है, लेकिन राजनीतिक दलों का माहौल लागू होने वाले यौन उत्पीड़न विरोधी नियमों से बाहर रहता है, तो हम नई महिलाओं को असुरक्षित जगहों में भेज रहे होंगे.