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Monday, 5 January, 2026
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धुरंधर बेबाक सिनेमा के ‘सॉफ्ट पावर’ की मिसाल है, जो पाकिस्तान को सीधे निशाने पर लेती है

'पठान' अगर रूढ़िवादियों और उदारवादियों, दोनों को मुंह छिपाने की जगह मुहैया कराती है, तो ‘धुरंधर’ ऐसी कोई कृपा नहीं करती. आदित्य धर ने आडंबर के चंदोवे को फाड़ डाला है और चाकू को घुमा भी दिया है.

SIR प्रक्रिया दिव्यांग मतदाताओं के लिए क्यों बन रही है चुनौती

आरटीआई के एक आवेदन से सामने आया है कि जारी SIR 2.0 प्रक्रिया में, भारत के 90 लाख पंजीकृत दिव्यांग (पीडब्ल्यूडी) मतदाताओं में से लगभग आधे प्रभावित हुए हैं.

बोंडी हमला दिखाता है कि ISIS हाशिए से नहीं, सोच से चलता है, कट्टरपंथ को अंदर से रोकना ज़रूरी

नफरत के दुष्चक्र में पड़े बिना हम यह साफ कह सकते हैं कि हम किससे जूझ रहे हैं—ISIS की वह विचारधारा, जिसमें दुनिया को सिर्फ आस्थावान और गैर-आस्थावान में बांट दिया जाता है.

2025 की अहम राजनीतिक घटनाएं हमें नरेंद्र मोदी और भारत के भविष्य के बारे में क्या बताती हैं

ऑपरेशन सिंदूर से लेकर भारत-अमेरिका तनाव और ईसी से जुड़े विवादों तक, अब यह साफ समझ बनने लगी है कि राजनीति किस दिशा में जा रही है.

RLEGP से MGNREGA और अब VB–G RAM G: ग्रामीण रोजगार कैसे बदला

RLEGP से लेकर MGNREGA और फिर VB–G RAM G तक, भारत के ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम का उद्देश्य, ढांचा और संवैधानिक अर्थ समय के साथ बदलता रहा है.

लेफ्टिनेंट सैमुएल की बर्खास्तगी औपनिवेशिक मानसिकता की मिसाल है. सेना को इसे खत्म करना चाहिए

यह एक ऐसा दुर्लभ मामला था जिसमें एक अधिकारी की निजी धार्मिक आस्था और सेना की धार्मिक परंपराओं के बीच टकराव हो गया. धर्म के राजनीतिकरण के मौजूदा वातावरण, और सेना की अधिकारी जमात द्वारा इसे बढ़ावा देने के मद्देनजर अब समय आ गया है कि आत्म-निरीक्षण और सुधार किए जाएं.

PM मोदी तेलंगाना BJP नेताओं से इतने नाराज़ क्यों हैं?

मोदी की एक टिप्पणी से साफ पता चलता है कि उनके मन में क्या चल रहा था. '1984 में हमने दो सीटें जीती थीं. हम गुजरात में कहां हैं और तेलंगाना में कहां?'

खराब इन्फ्रास्ट्रक्चर और लापरवाह ड्राइवर भारत में सड़क दुर्घटनाओं की जड़ हैं. इन्हें कैसे सुधारा जाए

शायद अख़बार रोज़ाना होने वाले सड़क हादसों और मौतों की रिपोर्टिंग के लिए एक अलग कॉलम बना सकते हैं, जैसा कि कोविड-19 महामारी के दौरान मौतों के आंकड़ों की रिपोर्टिंग की जाती थी.

‘सत्य के प्रयोग’ के भीतर का गांधी: आत्मकथा, काम-भाव और व्यक्तित्व के अंतर्विरोध

1925 में प्रकाशित गांधी की आत्मकथा बचपन से सार्वजनिक जीवन तक की कथा कहती है, लेकिन स्त्री-संसर्ग, ब्रह्मचर्य और नैतिक संघर्षों पर उनके आत्मस्वीकार एक अलग, असहज गांधी को सामने लाते हैं.

कुछ भारतीय-अमेरिकी भारतीयों को ही निशाना बना रहे हैं — उन्हें लगता है इससे MAGA नाराज़ नहीं होगा

जो बात साफ दिखती है, वह वही है जो हम में से कई लोग पहले से जानते थे: डिग्रियां आपको नस्लवाद से नहीं बचा सकतीं और “मॉडल माइनॉरिटी” का टैग तो बिल्कुल भी नहीं.

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NEP के पांच साल बाद: ‘डिज़ाइन योर डिग्री’ के ज़रिये जम्मू-कश्मीर ने दिखाया आगे का रास्ता

ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में भारतीय विश्वविद्यालयों का योगदान अब भी कम है, खासकर जब इसकी तुलना एमआईटी और इम्पीरियल कॉलेज जैसे विदेशी संस्थानों से की जाती है.

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असम में 5.1 तीव्रता का भूकंप, किसी के हताहत होने की सूचना नहीं

गुवाहाटी, पांच जनवरी (भाषा) असम के मध्य भाग में सोमवार तड़के 5.1 तीव्रता का भूकंप आया। एक आधिकारिक बुलेटिन में यह जानकारी दी गई।...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.