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Tuesday, 21 April, 2026
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जातिवाद भारतीय शहरों से खत्म नहीं हुआ है, बस उसने अंग्रेज़ी सीख ली है

शहरी भारत आज जातिवाद खत्म होने के दौर में नहीं है, बल्कि ऐसा दौर है जहां लोग जातिवाद मानना नहीं चाहते. वे ऊंच-नीच के फायदे तो चाहते हैं, लेकिन इसे मानने में शर्म महसूस करते हैं.

भारतीय इंडस्ट्री एनर्जी सेक्टर में ताकतवर बने और भारत के निर्माण का नेतृत्व करे

LNG को अपनाने से ही भारत को एनर्जी सुरक्षा नहीं हासिल हो जाएगी. इसके साथ रसोई, औद्योगिक क्रियाओं, और परिवहन में बिजली के उपयोग को बढ़ाना भी जरूरी होगा.

स्पेक्ट्रम जंग का बड़ा हथियार है, उसे वायरल वीडियो के लिए नीलाम न करें

हमारे सामने असली विकल्प सीधा-सा है: क्या हम यह चाहते हैं कि जब सबसे ज्यादा ज़रूरी हो तब हमारे सैनिक बैंडविड्थ के लिए वायरल वीडियो से मुकाबला करें?

चीन ने खुद को ऊर्जा संकट से सुरक्षित कर लिया है. भारत सिर्फ ‘बातें करता है, काम नहीं’

चीन ने कोयले से गैस बनाने में पूंजी, हुनर और टेक्नोलॉजी का धैर्य के साथ निवेश किया. हम कथनी को करनी में बदलने में हमेशा पीछे रहते हैं. कच्चे तेल की कीमत गिरते ही हमारा जोश ठंडा पड़ जाता है.

भारत की तेल और गैस से जुड़ी कमज़ोरी डीजल ट्रकों पर टिकी है

डीजल से धीरे-धीरे दूर जाने की प्रक्रिया भारत की रिफाइनरी की अर्थव्यवस्था को जटिल बना सकती है क्योंकि 2032 तक पेट्रोल की मांग अपने उच्च स्तर पर पहुंचकर उसके बाद घटने लगेगी.

आसिया अंद्राबी महिलाओं के अधिकारों की पैरोकार नहीं, वह भारतीय मुसलमानों की आवाज़ भी नहीं

अंतरराष्ट्रीय मीडिया द्वारा आसिया अंद्राबी को महिलाओं के अधिकारों की रक्षक बताना दिखाता है कि कैसे नैरेटिव बनाए जाते हैं और क्या चीज़ें छोड़ दी जाती हैं.

क्यों तमिलनाडु चुनाव 2026 में त्रिशंकु विधानसभा बन सकती है

तमिलनाडु में लगभग हर पार्टी अंदरूनी विवाद से जूझ रही है. 4 मई को आने वाले नतीजे एक नया राजनीतिक सरप्राइज और अप्रत्याशित मोड़ दे सकते हैं.

OIC कहां है? जो खुद को ‘मुस्लिम दुनिया की आवाज़’ कहता है, वह सिर्फ बयान देकर चुप नहीं रह सकता

इस संगठन की स्थापना केवल नुकसान हो जाने के बाद बयान जारी करने के लिए नहीं की गई थी. इसका चार्टर संप्रभु समानता, क्षेत्रीय अखंडता और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर आधारित है.

माओवादी आंदोलन खत्म होने की कगार पर, लेकिन असली चुनौती अब भी बरकरार है

माओवादी हिंसा कम हुई है, लेकिन यह नहीं मान लेना चाहिए कि असंतोष खत्म हो गया है. यह फिर से उभर सकता है—चाहे नई बगावत के रूप में, किसी स्थानीय आंदोलन के रूप में, या किसी और तरह के विरोध के तौर पर.

अमेरिका बाज की तरह बातें करता है, लेकिन गोली चलने पर मुर्गी की तरह डर जाता है—इतिहास यही दिखाता है

अमेरिकियों को सिर्फ ऐसे युद्ध पसंद हैं जो वीडियो गेम की तरह लड़े जाएं, जहां वे दुश्मन के हज़ारों सैनिकों और आम लोगों को मार दें, लेकिन जहां कोई अमेरिकी न मरे.

मत-विमत

अमेरिका अब तक ईरान को क्यों नहीं हरा पाया? क्योंकि ट्रंप कम खर्च में जीत हासिल करना चाहते हैं

ट्रंप का ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने का लक्ष्य, ईरान में इस्लामी शासन को गिराए बिना पूरा नहीं किया जा सकता, और यह काम ज़मीनी सैन्य आक्रमण (ग्राउंड इनवेज़न) के बिना संभव नहीं लगता.

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राजनीति

देश

पहलगाम हमले में पति और पुत्र को खोने वाली महिला सदमे से उबर नहीं पाई

भावनगर (गुजरात), 21 अप्रैल (भाषा) पहलगाम आतंकी हमले में अपने पति और किशोर बेटे को खोने के एक साल बाद भी काजलबेन परमार...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.