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Sunday, 29 March, 2026
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उज्ज्वला से केरोसिन तक: भारत सरकार LPG की कमी से निपटने में जुटी, लेकिन संकट से इनकार

LPG की कमी से गरीब भारतीय परिवारों के कोयले के इस्तेमाल वाले दिनों में लौटने का खतरा पैदा हो गया है—ठीक उसी दौर में, जिसे मोदी सरकार ने चरणबद्ध तरीके से खत्म किया था.

स्टडी वीज़ा पर UK का ‘इमरजेंसी ब्रेक’ सच में नियमों के बारे में है, तो पाकिस्तान शामिल क्यों नहीं

अफगानिस्तान, कैमरून, म्यांमार और सूडान का सिलेक्शन सवाल खड़ा करता है. खासकर तब जब इस समय ब्रिटेन में शरण मांगने वालों में पाकिस्तानियों की संख्या सबसे ज्यादा में से एक है.

भारतीय मुसलमानों को ‘ग्लोबल उम्माह’ के बारे में भ्रम छोड़ना चाहिए

गाज़ा और ईरान की हाल की घटनाओं ने ‘ग्लोबल इस्लाम’ के विचार की खोखलापन को उजागर कर दिया है.

नेहरू और मोदी की दुविधा एक जैसी. 1953 के परमाणु संकट से जुड़े गुप्त दस्तावेजों से खुलासा

जहां आलोचक PM मोदी पर ईरान संकट को लेकर देश की आज़ादी और भारत के नैतिक मूल्यों को छोड़ने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं डीक्लासिफाइड डॉक्यूमेंट्स से पता चलता है कि उनके सामने जो मुश्किलें हैं, वे नई नहीं हैं.

सिंचाई में बड़ी कामयाबी के दावे पंजाब को रावी–ब्यास जल विवाद में भारी पड़ सकते हैं

कोई यह नहीं कहता कि पंजाब को नहर सुधार में हुई असली प्रगति छिपानी चाहिए, लेकिन धीरे-धीरे हो रहे सुधार की जानकारी देना और उसे बड़ी उपलब्धि बताकर पेश करना—दोनों में फर्क है.

BJP का वंदे मातरम पर रुख बड़ा राजनीतिक विरोधाभास है और नागालैंड ने इसे साफ दिखाया

केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी को नागालैंड में वंदे मातरम को लेकर वहां के विचारों पर चुप रहना पड़ेगा, अगर वह उस राज्य में सत्ता में बने रहना चाहती है, जहां 2028 की शुरुआत में चुनाव होने हैं.

बालेंद्र शाह की लहर नेपाल में लोकतंत्र की दूसरी वापसी का संकेत

जेन ज़ी आंदोलन एक मजबूत लहर था, जिसे आरएसपी और बालेन ने मिलकर पकड़ा—यह मुद्दों पर आधारित राजनीति की अहमियत दिखाने वाला पहला बड़ा पड़ाव है.

ईरान युद्ध का जल्दी खत्म होना भारत के हित में है, लेकिन मोदी का अमेरिका या इज़रायल पर कोई प्रभाव नहीं

ईरान में अमेरिका-इज़रायल युद्ध ने वैश्विक राजनीति में भारत की असली जगह दिखा दी है—एक मिडिल पावर, न कि ‘विश्वगुरु’.

चीन का वह आर्थिक मॉडल, जिसने उसकी तेज़ तरक्की को ताकत दी, अब धीमा पड़ता दिख रहा है

चीन के डेवलपमेंट मॉडल के केंद्र में प्रॉपर्टी सेक्टर था—घरों का निर्माण, ज़मीन की बिक्री और रियल एस्टेट में निवेश. अब इस निर्भरता के नतीजे साफ दिखने लगे हैं.

ममता बनर्जी विवाद: द्रौपदी मुर्मू को सार्वजनिक बयान देने से बचना चाहिए था

हमें अपने राष्ट्रपति के प्रति किसी भी अपमान की निंदा करनी चाहिए, लेकिन द्रौपदी मुर्मू और ममता बनर्जी से जुड़ी घटना कई सवाल खड़े करती है, जिनमें कुछ असहज करने वाले भी हैं.

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खाड़ी युद्ध ने भारत की कमजोरियां उजागर कीं, अब राष्ट्रीय हित में आत्ममंथन का वक्त है

सरकार कड़वा सच क्यों नहीं बोल सकती, इसे समझना बहुत आसान है. तमाम युद्धों की तरह यह युद्ध भी जब रुक जाएगा तब भी भारत के हित विजेता के साथ भी जुड़े होंगे और हारने वालों के साथ भी.

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राजनीति

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दिल्ली का अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान कर रहा:मंत्री कपिल मिश्रा

नयी दिल्ली, 28 मार्च (भाषा) दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने शनिवार को कहा कि दिल्ली अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफडी) प्रतिभाओं के लिए...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.