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Wednesday, 25 February, 2026
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मुनाफा कमाने वाले मेडिकल कॉलेज ज़रूरी कदम, शिक्षा की असली पहचान उसके नतीजों से

भारत में हम फीस पर तो सीमा लगाते हैं, लेकिन अयोग्यता पर नहीं; बैलेंस शीट को नियंत्रित करते हैं, लेकिन सीखने के नतीजों को नज़रअंदाज़ करते हैं; इरादों की जांच करते हैं, लेकिन औसत दर्जे को सहन करते हैं.

नए लेबर कोड को लेकर मजदूर और मालिक क्या सोचते हैं? स्टडी ने दिए जवाब

वी. वी. गिरी नेशनल लेबर इंस्टीट्यूट की हाल ही में की गई एक इंडिपेंडेंट परसेप्शन-आधारित स्टडी से यह शुरुआती पता चलता है कि वर्कर और एम्प्लॉयर इसे लागू करने की प्रक्रिया को कैसे देखते हैं.

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में बराबरी के फायदे की उम्मीद, ताकत की सच्चाई से दूर

व्यापार समझौतों को आमतौर पर आर्थिक फायदे के आधार पर परखा जाता है, लेकिन यह सिर्फ आर्थिक मामला नहीं होता, खासकर बदलते हुए वैश्विक हालात में.

हरियाणा, यूपी, तमिलनाडु और कर्नाटक के पुरुष गोवा को कैसे बदनाम कर रहे हैं

शायद भारतीय पुरुषों के व्यवहार पर सही तरह से नज़र रखने का एकमात्र तरीका यह है कि हर ट्रिप पर उनकी मां उनके साथ हों. अगर वे किसी अजनबी से मिलना चाहते हैं, तो उन्हें पहले मम्मी से पूछना चाहिए.

RBI फिलहाल रेपो रेट में कटौती नहीं कर रहा है ताकि पहले से लागू नीतियों का पूरा असर देखा जा सके

सिर्फ़ घरेलू हालात ही RBI के 6 फरवरी के फ़ैसले की वजह नहीं हैं. ग्लोबल माहौल भी बहुत ज़रूरी हो गया है.

गाजियाबाद की घटना: सोशल मीडिया बन रहा है नया नशा, भारत की नीति में सख्ती ज़रूरी

जिन भारतीय बच्चों के पास स्मार्टफोन हैं, वे इसका ज़्यादातर इस्तेमाल मनोरंजन के लिए करते हैं—जैसे फिल्में देखना या सोशल मीडिया चलाना—न कि पढ़ाई के लिए. क्या यही ‘डिजिटल इंडिया’ का सही इस्तेमाल है?

राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर मोदी से मुकाबला नहीं, राहुल को पुरानी सैन्य रणनीति से सबक लेना चाहिए

सत्ता पक्ष ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की किताब का ज़िक्र करने पर नेता विपक्ष राहुल गांधी के लिए एक जाल बिछाया और वे खुद उसमें फंस गए.

नया रक्षा बजट इतना अच्छा नहीं है कि भारत को 2047 की ‘विकसित सेना’ दे सके

विकसित सेना के गठन के लिए 2047 को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा का एक स्पष्ट ‘विजन’, हर 5 साल में समीक्षा की जाने वाली राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति और एक ठोस नेशनल डिफेंस पॉलिसी की ज़रूरत है.

भारत में खेती पर ज्यादा ध्यान से मैन्युफैक्चरिंग की रफ्तार धीमी पड़ी है. अब सुधारों पर जोर देना होगा

भारत के सुधारकों के लिए असली चुनौती मैन्युफैक्चरिंग को कॉम्पिटिटिव बनाना है. यह केंद्र, राज्यों और लोकल बॉडीज़ के लिए सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए.

‘हाल मुकाम’ में बेदखली: इंडिया आर्ट फेयर में मलबे से निकली लाल ईंटें और उनसे बनी एक बेचैन दुनिया

इंडिया आर्ट फेयर में सबसे ज़्यादा चर्चा में रहने वाला आर्टवर्क किसी परिभाषा में नहीं बंधता—गिरजेश कुमार सिंह मलबे से निकाली गई ईंटों से लोगों और उनके बैग की मूर्तियां बनाते हैं. इस प्रदर्शनी का नाम 'हाल मुकाम' है.

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एक वायरल बंदर, एक IKEA का प्लश टॉय और US सुप्रीम कोर्ट का फैसला: टैरिफ के बारे में क्या बताते हैं

पंच का अपने प्लश टॉय से लगाव उसके देश से नहीं, बल्कि उससे मिलने वाले आराम से है. इसी तरह, ग्राहक जियोपॉलिटिकल लेबल से ज्यादा भरोसे और डिजाइन को प्राथमिकता देते हैं.

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जामिया विश्वविद्यालय ने वायरल ‘निकाह’ नोटिस को फर्जी बताया, शिकायत दर्ज कराई

नयी दिल्ली, 24 फरवरी (भाषा) जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने मंगलवार को एक परिपत्र जारी कर सोशल मीडिया पर प्रसारित उस अधिसूचना का खंडन किया,...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.