ऐसे ही निर्णायक मौके पर नेतृत्व की परीक्षा होती है. आज, देश सचमुच जानना चाहता है कि हमारी सरहदों पर क्या हो रहा है, कोरोनावायरस के फैलाव के रोकथाम के मद्देनजर क्या कुछ किया जा रहा है.
भारत को लोग आईटी सुपरपावर कहते हैं. इस नाते क्या हमें इस बात को लेकर चिंतित होना चाहिए कि भारत के सबसे ज्यादा डाउनलोड होने वाले 10 में से एक भी मोबाइल ऐप भारतीय नहीं है?
जयराज और बेनिक्स आज हमारे बीच मौजूद होते अगर मजिस्ट्रेट ने रिमांड के लिए तमिलनाडु पुलिस की याचिका स्वीकार करते समय कठपुतली की तरह काम करने के बजाये अपने विवेक से कोई फैसला लिया होता.
फ़ैकल्टी की नियुक्ति के समय विश्वविद्यालय लगभग हर मामले में अपने ही पुराने छात्रों को तरजीह देते हैं, भले ही योग्यता के लिहाज से वे कई तरह से उपयुक्त न होते हों. यह हमारे विश्वविद्यालयों के लिए धीमा जहर साबित हो रहा है.
भारत में कोयले का विश्व का पांचवा सबसे बड़ा भंडार है, फिर भी हम दुनिया के दूसरे सबसे बड़े आयातक हैं. केवल चीन ही हमसे अधिक, प्रति वर्ष लगभग 300 मिलियन टन, कोयला आयात करता है.
जब पिछड़े वर्ग या अनुसूचित वर्ग के लोगों के संवैधानिक हकों पर डकैती पड़ती है तो सवर्ण समाज को खुशी महसूस होती है. उन्हें इस बात का अहसास नहीं हो पाता कि ताकतवर तबका उनके भी हकों को लूट रहा है.
मोदी सरकार ने पिछड़ों के उप-वर्गीकरण के बारे में सिफ़ारिशें करने के लिए गठित जस्टिस रोहिणी आयोग को जो अंतिम समय सीमा दी थी उसके दो साल बाद भी भारत के पिछड़े वर्ग उसकी रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं, और भाजपा की हिचक रहस्यमय बनी हुई है.
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अभी दो साल दूर हैं लेकिन मायावती के प्रियंका गांधी को निशाना बनाने से यही लगता है कि कांग्रेस नेता राजनीतिक तौर पर कुछ तो सही कर रही हैं.
दीन दयाल उपाध्याय की हत्या और माधवराव सिंधिया के प्लेन क्रैश से लेकर गांधी परिवार की हत्याओं तक, राजनीति में जो कुछ भी होता है, उसका हिसाब-किताब से कम और किस्मत से ज़्यादा लेना-देना होता है.