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Thursday, 29 January, 2026
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मोदी की राजनीति देश में तिहरे संकट से निपटने में नाकाम है, अब लोकनीति की जरूरत है

ऐसे ही निर्णायक मौके पर नेतृत्व की परीक्षा होती है. आज, देश सचमुच जानना चाहता है कि हमारी सरहदों पर क्या हो रहा है, कोरोनावायरस के फैलाव के रोकथाम के मद्देनजर क्या कुछ किया जा रहा है.

चीन के ऐप तो सरकार ने बैन कर दिये, पर भारत अब तक कोई लोकप्रिय ऐप क्यों नहीं बना पाया

भारत को लोग आईटी सुपरपावर कहते हैं. इस नाते क्या हमें इस बात को लेकर चिंतित होना चाहिए कि भारत के सबसे ज्यादा डाउनलोड होने वाले 10 में से एक भी मोबाइल ऐप भारतीय नहीं है?

जयराज-बेनिक्स की हिरासत में मौत के लिए सिर्फ पुलिस पर सवाल न उठाएं, अदालतें भी हैं जिम्मेदार

जयराज और बेनिक्स आज हमारे बीच मौजूद होते अगर मजिस्ट्रेट ने रिमांड के लिए तमिलनाडु पुलिस की याचिका स्वीकार करते समय कठपुतली की तरह काम करने के बजाये अपने विवेक से कोई फैसला लिया होता.

‘जिसको डिग्री दो उसे अपने यहां शिक्षक भी बनाओ’ का फॉर्मूला बरबाद कर रहा है भारतीय विश्वविद्यालयों को

फ़ैकल्टी की नियुक्ति के समय विश्वविद्यालय लगभग हर मामले में अपने ही पुराने छात्रों को तरजीह देते हैं, भले ही योग्यता के लिहाज से वे कई तरह से उपयुक्त न होते हों. यह हमारे विश्वविद्यालयों के लिए धीमा जहर साबित हो रहा है.

कॉमर्शियल कोल माइनिंग मोदी के आत्मनिर्भर भारत के लिए महत्वपूर्ण है, राज्यों को भी अपना दायित्व निभाना चाहिए

भारत में कोयले का विश्व का पांचवा सबसे बड़ा भंडार है, फिर भी हम दुनिया के दूसरे सबसे बड़े आयातक हैं. केवल चीन ही हमसे अधिक, प्रति वर्ष लगभग 300 मिलियन टन, कोयला आयात करता है.

खिसक लीजिए अरविंद केजरीवाल, अमित शाह हैं अब दिल्ली के सुपर सीएम

कोविड-19 वैश्विक महामारी की शुरुआत से लापता चल रहे गृहमंत्री अमित शाह, अब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को, कमज़ोर और अयोग्य साबित कर रहे हैं.

हम मिनियापोलिस की घटना से आहत है, हमें तमिलनाडु नहीं दिखता

जब पिछड़े वर्ग या अनुसूचित वर्ग के लोगों के संवैधानिक हकों पर डकैती पड़ती है तो सवर्ण समाज को खुशी महसूस होती है. उन्हें इस बात का अहसास नहीं हो पाता कि ताकतवर तबका उनके भी हकों को लूट रहा है.

मोदी सरकार की गलत प्राथमिकताओं और नीतिगत जोखिम की कोशिशों ने अर्थव्यवस्था को खराब हालत में पहुंचा दिया है

इस समय भारत व्यापक नीतिगत अनिश्चितताओं से जूझ रहा है जिसका खामियाजा मौजूदा परिस्थितियों से भी प्रतिबिंबित होता है.

कैसे मोदी-शाह की भाजपा ओबीसी आरक्षण के बनाए अपने ही जाल में फंस रही है

मोदी सरकार ने पिछड़ों के उप-वर्गीकरण के बारे में सिफ़ारिशें करने के लिए गठित जस्टिस रोहिणी आयोग को जो अंतिम समय सीमा दी थी उसके दो साल बाद भी भारत के पिछड़े वर्ग उसकी रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं, और भाजपा की हिचक रहस्यमय बनी हुई है.

उत्तर प्रदेश की राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई में एक नई प्रतिद्वंदिता उभर रही है- मायावती बनाम प्रियंका गांधी

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अभी दो साल दूर हैं लेकिन मायावती के प्रियंका गांधी को निशाना बनाने से यही लगता है कि कांग्रेस नेता राजनीतिक तौर पर कुछ तो सही कर रही हैं.

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अजित पवार की मौत ने भारतीय राजनीति में एक और ‘क्या होता अगर’ वाली बहस छोड़ दी है

दीन दयाल उपाध्याय की हत्या और माधवराव सिंधिया के प्लेन क्रैश से लेकर गांधी परिवार की हत्याओं तक, राजनीति में जो कुछ भी होता है, उसका हिसाब-किताब से कम और किस्मत से ज़्यादा लेना-देना होता है.

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प्राथमिक बाजार 2025-26 में मजबूत रहा, आईपीओ में भारत वैश्विक स्तर पर अग्रणी बना: समीक्षा

नयी दिल्ली, 29 जनवरी (भाषा) संसद में बृहस्पतिवार को पेश की गई आर्थिक समीक्षा के अनुसार देश के प्राथमिक पूंजी बाजार ने वित्त...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.