यूपी का ब्राह्मण मतदाता बीजेपी का कोर वोट बैंक रहा है लेकिन प्रदेश में चार बार सत्ता में आने के बाद भी बीजेपी ने कभी भी किसी ब्राह्मण को सीएम नहीं बनाया. इस बार तो वह बिल्कुल ठगा हुआ महसूस कर रहा है.
भाजपा के लिए अयोध्या मुद्दा सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है. और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 5 अगस्त को होने वाले भव्य समारोह से दूर रहने की संभावना नहीं है, भले ही कोविड हो या न हो.
भारतीय लोकतंत्र का चौथा खंभा माने जाने वाले प्रेस को आज इसके बाकी तीन खंभों जितनी अहमियत नहीं दी जा रही, तो साफ है कि पत्रकारों के सामने आज कौन-से रास्ते खुले हैं.
मौजूदा समय में जब दुनिया की विनिर्माण कंपनियां चीन पर निर्भर उच्च जोखिम वाली सप्लाई चेन के विकल्प ढूंढ रही हैं, भारत में आईफोन 11 असेंबल करने का एपल का निर्णय भारत की पात्रता को और अधिक विश्वसनीय बनाता है.
कोई भी केंद्रीय सत्ता हमें नहीं बचा सकती. वह सिर्फ़ झूठे दावे करती है, इसका अहसास हम सभी को हो ही गया है. गांधी हमें अहिंसक ढंग से, धीमे-धीमे इस महाकाय राक्षसी आर्थिक-राजनीतिक व्यवस्था से छोटे-छोटे स्थानीय समूहों की मानवीय व्यवस्था की ओर ले जाते.
आज, दिल्ली यूनिवर्सिटी तमाम विश्व रैंकिंग्स में कहीं नीचे की तरफ खिसकी नज़र आती है और देशभर की दूसरी तमाम यूनिवर्सिटीज़ का भी यही हाल है लेकिन एक रास्ता निकल सकता है.
केंद्रीय जल आयोग ने जून के पहले हफ्ते में एक डाटा के अनुसार देश के 123 बांधों या जलग्रहण क्षेत्रों में पिछले 10 सालों के औसत का 165 फीसद पानी संग्रहित है.
शाहूजी महाराज ने न्याय एवं समता की स्थापना के लिए जो कदम उठाए, उसमें बहुत सारे कदम ऐसे हैं जिन्हें उठाने में आजाद भारत की सरकारों को दशकों लग गए और कुछ कदम तो अब तक नहीं उठाए गए हैं.
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण चुनाव जीतने की संभावना बढ़ाने के लिए किया गया लगता है, लेकिन एक बड़ा कानूनी सवाल है: क्या इससे उन पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है?