नेपाली प्रधानमंत्री अपने विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावाली की अपुष्ट दिल्ली यात्रा से देश में पैदा हुए संवैधानिक संकट के बीच अपनी कुर्सी बचाने के लिए दिल्ली से आस लगा रहे हैं.
मोदी के राजनीतिक मॉडल के लिए असम कसौटी के समान है. भाजपा ने अपने प्रभाव क्षेत्र से बाहर के इस राज्य में 2016 में जीत का परचम लहराया था लेकिन क्या वह उस सफलता को दोहरा सकती है?
CAA और संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकांश अंश खत्म करने जैसे फैसले के खिलाफ अगर समाज का एक वर्ग के आक्रोषित हुआ तो क्या कोर्ट इसके अमल पर भी रोक लगाएगा?
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला की बेटी ने दूसरी सूची में जगह बनाई है. क्या यूपीएससी की दो किस्तों में परिणाम घोषित करने की नीति आरक्षित श्रेणियों को लाभान्वित करती है?
बालेंद्र शाह की लोकप्रियता के बावजूद, यह संभावना ज्यादा है कि आरएसपी को साफ बहुमत न मिले, लेकिन नेपाली कांग्रेस को अपने सात दशक पुराने वोटर आधार का फायदा मिल सकता है.