मोदी कहते हैं कि नेताजी होते तो देश का आज का पराक्रम देखकर खुश होते लेकिन जानकार बताते हैं कि प्रधानमंत्री जिस आरएसएस की विरासत थामे हुए हैं, नेताजी उसे पनपने के पहले उखाड़कर फेंक देना चाहते थे.
परेडों से दुनिया को यही संदेश जाता है कि देश की सुरक्षा क्षमता कितनी मजबूत है और वह विश्व समुदाय में एक भरोसेमंद सदस्य की तरह कितनी बड़ी भूमिका निभा सकता है.
मुनव्वर फारुकी के मामले में जो कुछ भी हो रहा है वह जानबूझकर तंग किए जाने का स्पष्ट मामला है लेकिन यहां उद्देश्य एक समुदाय विशेष को परेशान करना है, न कि किसी व्यक्ति मात्र को.
कर्पूरी की नैतिकता और ईमानदारी को समझने के लिए जानना चाहिए कि लंबी राजनीति पारी के बाद उनका निधन हुआ तो एक मकान तक उनके नाम नहीं था. न पटना में, न ही अपने पैतृक घर में वे एक इंच भी जमीन जोड़ पाए थे.
ऊपर के पदों पर माथा टेकने वालों को बैठाने की तमाम कोशिशों के बावजूद सेना राजनीति से अछूती रही लेकिन अब वह राष्ट्रवादी विचारधारा के जुनून में फंस रही है.
भारतीय नौसेना हमेशा से भारत की राजनीतिक सीमाओं से परे, राष्ट्रीय कूटनीतिक और अन्य संपर्क प्रयासों को समर्थन देने में सबसे आगे रही है. अब आगे बढ़कर ज़िम्मेदारी उठाने का समय आ गया है.