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Saturday, 25 April, 2026
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नरेंद्र मोदी का भारत ‘आंशिक तौर पर स्वतंत्र’ क्यो हैं और किस दिशा में देश जा रहा है

मोदी सरकार प्रभावशाली तथा गतिविधियों के मामले में अब तक स्वायत्त रहे केंद्रों पर जिस तरह ज्यादा से ज्यादा नियंत्रण कायम करने की ख़्वाहिश रखती है उससे जाहिर है कि देश किस दिशा में जा रहा है.

मोदी सरकार को रोकना नामुमकिन, कांग्रेस की नैया डूब रही है और राहुल अपने डोले दिखा रहे

हम संस्थाओं को कमजोर किए जाने, एजेंसियों के दुरुपयोग, भेदभावपूर्ण क़ानूनों, देशद्रोह की धारा के इस्तेमाल, विधेयकों को जबरन पारित करवाने आदि की शिकायतें भले करें लेकिन ऐसे सभी प्रमुख मसलों पर निष्क्रियता का सारा दोष कांग्रेस के मत्थे जाता है.

चीन को क्लीनचिट देने की जल्दबाजी न करें, मुंबई पॉवर ग्रिड का फेल होना भारत के लिए कड़ी चेतावनी

मुंबई में पावर ग्रिड फेल होने के बाद तेलंगाना की घटना एक तरह से यह चेतावनी है कि भारत खतरे को हल्के में नहीं ले सकता है.

इमरान खान दुखी हैं, विश्वास मत चाहते हैं लेकिन विपक्ष को उन्हें सत्ता से हटा पाने की उम्मीद

चुनावी हार के बाद एकदम एक्शन में आई पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी ने ऐलान किया है कि प्रधानमंत्री संसद में विश्वासमत हासिल करेंगे, विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने इसे ‘पाकिस्तान में लोकतंत्र के लिए दुखद दिन’ करार दिया है.

किसान आंदोलन अराजनैतिक नहीं हो सकता और होना भी नहीं चाहिए, यह लोकतांत्रिक नहीं है

चंपारण से लेकर तेभागा तक किसानों का आंदोलन राजनैतिक रहा है. लेकिन 1980-90 में यह बदल गया जब अराजनैतिक आंदोलन की मांग उठने लगी.

हार्वर्ड के मंच पर हेमंत सोरेन की विभाजनकारी आदिवासी राजनीति बिरसा मुंडा के दर्शन के विपरीत है

झारखंड के मुख्यमंत्री सोरेन या तो नए ज़माने के मिशनरियों के हाथों में खेल रहे हैं या संभवतः धर्मांतरण लॉबी के इशारे पर काम कर रहे हैं.

शी के मीडिया प्रचार से भ्रमित न हों, चीन की ‘ज़ीरो गरीबी’ जो दिखा रही उससे ज्यादा छिपा रही है

चीन दुनिया को यक़ीन दिलाना चाहता है, कि उसके ‘राज्य के नेतृत्व में विकास’ ने ग़रीबी को ख़त्म कर दिया है. लेकिन, जैसा कि हर चीनी चीज़ के साथ होता है, सच्चाई उससे कहीं ज़्यादा जटिल है, जितनी लगती है.

ममता बनर्जी दीदी से बंगाल की बेटी क्यों बन गईं

पश्चिम बंगाल के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ‘बंगाल की बेटी’ को बाहरी हमलावरों से बचाने का नारा देकर मतदाताओं की भावनाओं को उभारने की कोशिश में जुटी है.

क्यों एकजुट रहने के लिए कांग्रेस को आगामी विधानसभा चुनाव हारने होंगे

इंदिरा ने 1969 और 1978 में, कांग्रेस के दिग्गजों को चुनौती दी थी और पार्टी को विभाजित कर दिया था. राहुल या प्रियंका के पास अपनी दादी वाला करिश्मा नहीं है.

शहतूत एग्रीमेंट, चमोली और अफगानिस्तान के बीच संबंध और आत्मबोधानंद के अनशन के मायने क्या है

मातृसदन के साधुओं ने एकबार फिर प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है.जीडी अग्रवाल की मांगों और उन मांगों पर सरकारी दावों – वादों की याद दिलाया है. जबकि प्रधानमंत्री विकास की नई इबारत लिखने के लिए अफगानिस्तान के साथ शहतूत एग्रीमेंट  पर हस्ताक्षर किया है.

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राइटिंग्स ऑन दि वॉल—नक्सलबाड़ी की क्रांति से ‘विनर्स’ तक: बंगाल की नई इबारत

पश्चिम बंगाल चुनाव में वामपंथी दल और कांग्रेस खुरचन में हिस्सेदारी के लिए होड़ लगा रहे हैं. पूर्वी-मध्य भारत में माओवाद को कब्र में दफन कर दिया गया है, तो केरल में वे सरकार विरोधी दोहरी भावना से जूझ रहे हैं.

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आम आदमी पार्टी जनता से किए गए वादों को पूरा करने में विफल रही: जयंत चौधरी

मेरठ (उप्र), 25 अप्रैल (भाषा) केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोकदल अध्यक्ष जयंत चौधरी ने शनिवार को कहा कि आम आदमी पार्टी (आप)जनता से किए...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.