सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करने वाला सीएए भाजपा पर हमले का जोरदार हथियार बन सकता था मगर असम में कांग्रेस इसकी अनमनी, अनियमित, भ्रमित आलोचना तक ही सीमित दिखी.
दुनिया वर्चुअल यूनिवर्सिटी की ओर मुड़ चुकी है, ऑनलाइन शिक्षण भविष्य की व्यवस्था बनती जा रही है. इसका अर्थ यह हुआ कि न तो भवनों और परिसर की जरूरत होगी, न स्टाफ की प्रत्यक्ष जरूरत होगी.
विकास की शुरुआती सोच आर्थिक विकास जिसे जीडीपी से मांपा जाता था और जो देशों को गरीबी से उबार सकता था, पर केंद्रित थी. पर इस मॉडल में लैंगिक समानता नहीं थी.
अगर आप सोचते थे कि क्रिकेट और सशस्त्र बल धर्म से अछूते दो संस्थान हैं, तो आपको गहरा झटका लगा होगा. कांग्रेस के राहुल गांधी के शब्दों में अब क्रिकेट नफरत की चपेट में है.
पिछले एक वर्ष में लोगों ने नौकरियां और आय के साधन गंवाए हैं और महंगाई भी जमकर बढ़ी है. यह दोहरी मार की तरह है, ईंधन ऐसे समय पर महंगा हो रहा है जब लोगों की जेब में पैसा भी कम है.
नये वित्तीय कदमों के साथ मुद्रास्फीति का खतरा जुड़ा है, जो मतदाताओं को सरकार के विरोध में खड़ा कर देता है. और, दांव पर अगर आर्थिक वृद्धि है, तो इसने अगर निराश किया तब क्या होगा? मोदी को इस बारूदी रास्ते पर संभलकर ही चलना होगा.
कृषि कानूनों के साथ, मोदी सरकार ने श्रम सुधारों को पारित किया है और प्रमुख कंपनियों के निजीकरण का वादा किया है. इसने अर्थिक दक्षिण-वाम को विभाजित किया है, और यह एक अच्छी बात है.
किसान आंदोलन ने मोदी सरकार के लिए प्रचार के स्तर पर एक नयी चुनौती खड़ी कर दी है. एक ‘चायवाला’ से लोक कल्याण मार्ग तक मोदी के सफर को लेकर बड़े जतन से जो छवि गढ़ी गई थी वह अब धूमिल होने लगी है.
बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान की इस हफ्ते नई दिल्ली की दो दिन की यात्रा, एक बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ, को ‘बड़ा कूटनीतिक ब्रेकथ्रू’ माना जा रहा है.