मोदी और अमित शाह से लेकर खुली जीप में सवार होकर आए जेपी नड्डा तक सभी पिछले सप्ताह बिहार में जीत का जश्न मनाने के लिए भाजपा मुख्यालय पहुंचे थे. क्या जदयू की बजाये भाजपा का वर्चस्व कायम होने का समय आ गया है?
जीवन भर विवादों से दूर रहने वाले विनोबा के जीवन की एकमात्र विडंबना यह है कि उन्होंने 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा नागरिकों की स्वतंत्रता का अपहरण कर देश पर थोपी गयी इमरजेंसी को ‘अनुशासन पर्व’ बताया था.
मोदी यह मान बैठे कि चीन अपने आर्थिक हितों को दांव पर लगाकर हमारे लिए सैन्य चुनौती बनने की कोशिश नहीं करेगा, इसलिए प्रतिरक्षा पर खर्चे फिलहाल टाले जा सकते हैं. मोदी यहीं पर नेहरू की भूल के मुकाबले आधी भूल कर बैठे.
आज की तारीख में दीपावली का रूप-रंग कुछ इस तरह बदल गया है कि वह महज बाजार की उन शक्तियों का त्यौहार नजर आती है, जो शुभ-लाभ से जुड़ी देसी व्यावसायिक नैतिकताओं से परे पूंजी को ब्रह्म और मुनाफे को मोक्ष बना डालने पर आमादा हैं.
नया पाकिस्तान में महिला नेता को इज्ज़त तभी दी जाती है जब वह गद्दीनशीं पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ से जुड़ी हो, विपक्षी खेमे की महिला नेता की तो कोई पूछ ही नहीं है.
‘नक्सलवादी’, ‘आतंकी समर्थक’, ‘चीन-पोषित माओवादी’, ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ जैसे अलंकरणों वाले व्यापक दुष्प्रचार के बावजूद सीपीआई (एमएल) लिबरेशन ने बिहार में 12 सीटें जीती हैं.
हम घंटों इस बात पर बतियाते रह सकते हैं कि कैसे नीतीश कुमार का कद इस चुनाव में छोटा हुआ और ये भी कि क्या कांग्रेस को 70 सीटों पर लड़ने का मौका देना एक गलती थी. लेकिन, इसके तुरंत बाद ही हमारे मन में ये जानने की खुजली मचेगी कि आईपीएल के फायनल में क्या हुआ?
मुझे उम्मीद है कि ईरान में भारतीय छात्र सुरक्षित घर लौट आएंगे. उन्होंने घर और विदेश में बहुत दुख झेला है. लेकिन एक ऐसा कल्चर जो 2026 में सिर्फ़ दो प्रोफेशन को ही स्वीकार करता है, वह इससे कुछ नहीं सीखेगा. अगली निकासी में मिलते हैं.