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Saturday, 21 March, 2026
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मत-विमत

कांग्रेस के लिए अपना खुद का नरेंद्र मोदी ढूंढने का यह आखिरी मौका है

कांग्रेस को एक ईमानदार आंतरिक चुनाव की आवश्यकता है न कि गांधी परिवार निर्देशित नाटक की जिसमें कि बाकी नेताओं की महज सजावटी भूमिका होती है.

किसानों की ट्रैक्टर परेड से बहुत पहले बाबरी मस्जिद आंदोलन भी गणतंत्र दिवस के मौके पर विवाद का कारण बना था

1987 के असहभागिता और/या बहिष्कार के आह्वान की तुलना किसानों की 2021 की परेड के साथ नहीं की जा सकती. हालांकि, इन दोनों प्रकरणों को जोड़ने वाला एक साझा सवाल है.

भारतीय संविधान में राम के चित्र की अहमियत क्यों है

भारतीय संविधान तैयार होने के साथ ही इतिहास के चुनिंदा महात्माओं, गुरुओं, शासकों एवं पौराणिक पात्रों को दर्शाते हुए संविधान के अलग-अलग भागों में सजाया. प्रत्येक चित्र भारत की अनंत विरासत से एक सन्देश और उद्देश्य को व्यक्त करता है .

भारत के लोगों ने गणतंत्र को ऊंचे आसन पर बैठा दिया है और इस पर अमल करना भूल गए हैं

खुले तौर पर तो हम गणतंत्र के प्रति सम्मान प्रकट करते हैं, संविधान की पूजा तक करते हैं मगर उसे व्यवहार में लाने की परवाह नहीं करते.

ममता बनर्जी बनाम नरेंद्र मोदी- पश्चिम बंगाल में कैसे टूट रही हैं राजनीतिक मर्यादाएं

मोदी कहते हैं कि नेताजी होते तो देश का आज का पराक्रम देखकर खुश होते लेकिन जानकार बताते हैं कि प्रधानमंत्री जिस आरएसएस की विरासत थामे हुए हैं, नेताजी उसे पनपने के पहले उखाड़कर फेंक देना चाहते थे.

गणतंत्र दिवस परेड को लेकर सवाल उठ रहे हैं लेकिन इस समारोह के लिए इससे बेहतर समय नहीं हो सकता

परेडों से दुनिया को यही संदेश जाता है कि देश की सुरक्षा क्षमता कितनी मजबूत है और वह विश्व समुदाय में एक भरोसेमंद सदस्य की तरह कितनी बड़ी भूमिका निभा सकता है. 

मुनव्वर फारुकी कोई खूंखार अपराधी नहीं, उसे जमानत देने से मना करने का उद्देश्य मुस्लिमों को सबक सिखाना है

मुनव्वर फारुकी के मामले में जो कुछ भी हो रहा है वह जानबूझकर तंग किए जाने का स्पष्ट मामला है लेकिन यहां उद्देश्य एक समुदाय विशेष को परेशान करना है, न कि किसी व्यक्ति मात्र को.

भारत कहे ‘नमस्ते बाइडन’, US को इरान पर प्रतिबंधों में ढील के लिये मनाए वर्ना चीन से पिछड़ जाएगा

नई दिल्ली को नहीं भूलना चाहिए, कि अमेरिका का चीन से रिश्तों का एक अलग प्रक्षेप पथ है, जो उसके राष्ट्रीय हितों पर आधारित है.

भारत की खेतीबाड़ी में अब तक क्यों उपेक्षित है ‘आधी आबादी’ का संकट

असल में भारत में महिलाओं के संकट को समझने से पहले हमें भारत की खेती की बुनियादी समस्या में जाना होगा.

भारतीय अर्थव्यवस्था का भविष्य मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की बजाय सेवा क्षेत्र पर निर्भर करेगा

शायद यह कबूल करने का समय आ गया है कि भारत पूर्वी-एशियाई देशों या बांग्लादेश तक की मैन्युफैक्चरिंग की कहानी को दोहराने नहीं जा रहा है.

मत-विमत

‘विश्वगुरु’ बनने का हमारा-आपका भ्रम, दुनिया को देखने की समझ बिगाड़ रहा है

एक पक्ष सोचता है कि आज भारत अपनी हैसियत से ज्यादा आगे बढ़कर कदम उठा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष सोचता है कि मोदी ने भारत की हैसियत कमजोर कर दी है और भारत अपनी हैसियत से कम कदम उठा रहा है. सच यह है कि दोनों ही गलत हैं.

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राजनीति

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तेलंगाना : पुलिस उप-निरीक्षक ने आत्महत्या की

करीमनगर (तेलंगाना), 21 मार्च (भाषा) तेलंगाना के करीमनगर जिले में शनिवार को एक पुलिस उपनिरीक्षक ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। एक...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.