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Thursday, 2 April, 2026
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क्यों प्रधानमंत्री मोदी को अपने इर्द-गिर्द जमा कागजी शेरों को लेकर चिंता होनी चाहिए

प्रधानमंत्री मोदी के कागजी शेर टीवी और ट्विटर पर विपक्ष के खिलाफ खूब दहाड़ते हैं, लेकिन उनमें से कोई भी लुटियंस की दिल्ली से निकलकर सिंघू, टिकरी और गाज़ीपुर बॉर्डर तक नहीं जाता.

लोकतांत्रिक सूचकांक में भारत का फिसलना चिंताजनक, क्या लोकतंत्र सच में कल्पना में रह गया है

जब हमारे सत्ताधीश हमारे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का आधा हिस्सा हजम कर गये हैं, हम क्या कर रहे हैं? उसे दुनिया का सबसे बढ़िया लोकतंत्र बनाने का कोई सपना हमारे पास बचा है या नहीं?

कृषि कानूनों पर मोदी सरकार को व्यापक स्वीकृति हासिल करनी होगी

किसान ही नहीं, दूसरे तबकों को भी यकीन होने लगा है कि दिल्ली की गद्दी पर बैठी सरकार अब उसका प्रतिनिधित्व नहीं करती. इसका अर्थ यह हुआ कि सरकार चाहे बड़ी आसानी से कानून बना ले, उसे देखना होगा कि उन्हें व्यापक स्वीकृति कैसे हासिल होगी.

सिख अलगाववाद के वजूद की लड़ाई लड़ रहा है, किसान आंदोलन से अगर ढंग से न निपटे तो आग लग सकती है

पंजाब में जरनैल सिंह भिंडरांवाले की आज कुछ-कुछ वैसी ही स्थिति है जैसी 1970 के दशक में चे ग्वेरा की स्थिति युवाओं के बीच थी.

मोदी सरकार कृषि कानून की लड़ाई हार चुकी है, अब सिख अलगाववाद का प्रेत जगाना बड़ी चूक होगी

कृषि क़ानूनों पर जंग तो मोदी सरकार हार ही चुकी है, अब अगर वह किसानों के आंदोलन को लेकर सिख अलगाववाद का राग अलापती रहेगी तो और भी गंभीर भूल करेगी

समय आ गया है कि मोदी एक बड़े राजनेता की भूमिका निभाएं और कृषि कानूनों को रद्द करें

नरेंद्र मोदी कृषि कानूनों को रदद् करने के बजाये उन्हें रद्द नहीं करके अपनी राजनीतिक साख ज्यादा गंवा रहे हैं.

शिक्षा क्षेत्र को बजट 2021 में क्या मिला, राज्य और केंद्र को स्कूलों में निवेश बढ़ाना चाहिए

बजट 2021 में शिक्षा क्षेत्र में हुए आवंटन की बात करें तो इस वर्ष शिक्षा क्षेत्र को 93,224.31 करोड़ रूपये आवंटित हुए है जो कि पिछले साल से 6087 करोड़ रूपये कम है.

अमेरिका की चीन पर रणनीति को लेकर ‘अनाम लेखक’ के पेपर में भारत के लिए अहम संदेश छिपा है

पेपर अमेरिका और चीन के बीच तेजी से घटते अंतर के बारे में चेतावनी देता है. मतलब कि भारत को तुरंत फैसला करना है कि अगर साउथ चाइना सी या ताइवान में युद्ध हुआ तो किसी का पक्ष लेना चाहेगा या नहीं.

निर्मला सीतारमण के लिए 2021 का बजट कामयाबी का पल लेकिन सुषमा स्वराज बनना आसान नहीं है

रक्षा मंत्री और वित्त मंत्री के रूप में काफी आलोचनाएं झेलने के बाद सीतारमण के लिए इस बार का बजट एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है जिसके बाद अब उनके काम को शायद अधिक गंभीरता से लिया जाए.

अन्ना हज़ारे पर मत हंसिए, वे तो खुद ही मोहरा बनकर रह गए हैं

एक समय था जब अन्ना को आज का महात्मा कहा गया था, वे आज उस दौर को वापस लाना चाहते हैं लेकिन उन्हें इसलिए खारिज मत कीजिए कि वे अरविंद केजरीवाल की महज एक कठपुतली बनकर रह गए थे.

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ढाका नई दिल्ली के साथ अपने संबंधों को नया मोड़ दे रहा है, मोदी सरकार को खुलकर आगे बढ़ना चाहिए

बांग्लादेश के नए विदेश मंत्री खलील-उर-रहमान के अप्रैल में भारत आने की उम्मीद है. प्रधानमंत्री तारिक रहमान के पद संभालने के बाद ये दोनों देशों के बीच पहला बड़ा हाई-लेवल संपर्क होगा.

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दिल्ली: कांग्रेस ने एसआईआर प्रक्रिया में ‘कानूनी जोखिम’ का मुद्दा उठाया, अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा

नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) कांग्रेस की दिल्ली इकाई ने बुधवार को मतदान विवरण प्रमाणित करने के लिए पार्टी द्वारा नियुक्त बूथ स्तरीय...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.