भारत के लिए एक ताकत सीमा पर पहाड़ों के पार ही पड़ोसी के रूप में मौजूद है, तो दूसरी हमारे समुद्र में जमी हुई है. जाहिर है, भारत की अपनी रणनीति और जटिल ही होती जाएगी.
कांग्रेस अब अंदरूनी तौर पर बहुत से गुटों में बट गई है और गांधी परिवार के खिलाफ काफी नाराज़गी है. और अब अलग-अलग सूबों में उनकी चुनावी रणनीति का कोई सिर-पैर नहीं है.
हरियाणा कारोबार में आसानी के लिहाज से सबसे अच्छे राज्यों में से एक है. लेकिन क्या फायदा होगा यदि हम राज्य के युवाओं को ही रोजगार न दे पाएं. परस्पर संतुलन होना चाहिए.
भारत, चीन, पाकिस्तान, तीनों समझते हैं कि नक्शे दोबारा नहीं बनाए जा सकते और ताकत के सीधे इस्तेमाल की या छद्म युद्ध की अपनी सीमाएं हैं और उनके फायदे आगे घटते ही जाते हैं.
मोदी सरकार प्रभावशाली तथा गतिविधियों के मामले में अब तक स्वायत्त रहे केंद्रों पर जिस तरह ज्यादा से ज्यादा नियंत्रण कायम करने की ख़्वाहिश रखती है उससे जाहिर है कि देश किस दिशा में जा रहा है.
हम संस्थाओं को कमजोर किए जाने, एजेंसियों के दुरुपयोग, भेदभावपूर्ण क़ानूनों, देशद्रोह की धारा के इस्तेमाल, विधेयकों को जबरन पारित करवाने आदि की शिकायतें भले करें लेकिन ऐसे सभी प्रमुख मसलों पर निष्क्रियता का सारा दोष कांग्रेस के मत्थे जाता है.
चुनावी हार के बाद एकदम एक्शन में आई पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी ने ऐलान किया है कि प्रधानमंत्री संसद में विश्वासमत हासिल करेंगे, विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने इसे ‘पाकिस्तान में लोकतंत्र के लिए दुखद दिन’ करार दिया है.
मोदी सरकार अरविंद केजरीवाल के साथ जो कर रही है, वह गलत है. लेकिन क्या मोदी सरकार कभी अस्तित्व में आती, अगर केजरीवाल और उनके 'इंडिया अगेंस्ट करप्शन' आंदोलन ने UPA को तबाह न किया होता?
इस्लामाबाद, 30 अप्रैल (भाषा) पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने बृहस्पतिवार को जामिया मिल्लिया इस्लामिया में हुए विरोध प्रदर्शनों को 'दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया और भारत...