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Friday, 27 March, 2026
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जम्हूरियत के जागीरदारों के खेतों में फूटती लोकतंत्र की नई कोंपलें

हम जिस दौर का सामना कर रहे हैं, वह बहुत ही तमतमाया हुआ है. इसलिए कि कुछ शक्तियां आम लोगों के विवेक का अपहरण सुनियोजित तरीकों से कर रही हैं. उनका चेहरा दिख तो सात्विक रहा है लेकिन वह भीतर से क्रोधान्वेषित हैं.

मोदी सरकार का पहला ‘बीजेपी बजट’ क्यों सही दिशा में लिया गया कदम है, ग्रोथ पर दांव लगा रहा है

विडंबना ये है कि इस बजट में नरेंद्र मोदी ने महामारी के कारण मिली मदद से  घड़ी की सुइयां पीछे घुमा दी हैं और ग्रोथ पर दांव लगा रही है.

टिकैत की उदारवादी उहापोह- मुजफ्फरनगर दंगों को नज़रअंदाज़ करें या मोदी के राज में अपना भविष्य देखें

टिकैत ने अपने आंसूओं से न केवल 2013 के दंगों की जनस्मृति को धो दिया, बल्कि वह सिखों की अगुआई वाले एक आंदोलन को जाटों के विद्रोह में भी बदलने में भी कामयाब रहे हैं.

मोदी-शाह के चुनिंदा चेहरों ने निराश किया, अब क्या वे नये चेहरे को लेकर अपनी कसौटी बदलेंगे

मोदी और शाह ने राज्यों में जिन नेताओं को आगे बढ़ाने की कोशिश की वे उनकी उम्मीदों पर भले ही खरे न उतरे हों मगर इस जोड़ी ने हर राज्य में नया चेहरा ढूंढने की कवायद छोड़ी नहीं है.

भारतीय पर्यावरण संरक्षण और आदित्य ठाकरे के खत में मैंग्रोव को बचाने की पीएम से गुहार के मायने क्या हैं

मैंग्रोव है तो समुद्र के खारापन का प्राकृतिक संतुलन बना हुआ है. लेकिन केंद्र की सोच मैंग्रोव बचाने से ज्यादा उन कंपनियों से बात करनें में है जो खारे पानी को मीठे पानी में बदलने की तकनीक लाने का दावा करती है.

तांडव के कई डायलॉग दलितों के खिलाफ, पहुंचाते हैं उनके सम्मान को ठेस

उनमें से सबसे प्रमुख डायलॉग है 'जब एक छोटी जाति का आदमी, एक ऊंची जाति की औरत को डेट करता है न, तो वो बदला ले रहा होता है, सदियों के अत्याचारों का, सिर्फ़ उस एक औरत से'.

महामारी के लाखों मूक पीड़ितों को उनके हालात से निकालने के लिए निर्मला सीतारमण क्या कर सकती हैं

इस बजट में उन लाखों लोगों की बात होनी चाहिए जिन्हें कोरोना महामारी ने फिर से गरीबी में धकेल दिया है. जिनकी नौकरी चली गई है. कुछ राहत दी गई है, लेकिन और अधिक किया जाना बाकी है.

आर्थिक व आजिविका की कठिनाइयों के बीच इस बजट में सबसे कमजोर परिवारों की सहायता बहुत जरूरी

कोविड महामारी के कारण जनसाधारण को इतनी कठिनाईयां सहनी पड़ी हैं कि आगामी केन्द्रीय बजट में उन्हें बड़ी राहत मिलनी ही चाहिए.

पाकिस्तान पर भारी रहा ये हफ्ता. टिक टॉक स्टार ने मुफ्ती को जड़ा झापड़, बाजवा ऑमलेट की लाईन में

मुफ्ती अब्दुल क़ावी का विवादों से पुराना रिश्ता रहा है. वे खुद को जन्नत का बंदा बताते हैं, लेकिन हर बार उनकी दुनियावी ख्वाहिशें उन पर हावी होती रही हैं

जैसे जैसे UP गर्त में जा रहा, योगी के सितारें बुलंद हो रहे हैं- इतने कि वो मोदी से लाइमलाइट की होड़ में है

योगी के राज में उत्तर प्रदेश की हालत शायद ही बेहतर हुई है लेकिन उनका अपनी राजनीतिक हैसियत इतनी जरूर बढ़ गई है कि मोदी को उस पर ध्यान देना पड़ रहा है.

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बैंक ऋण धोखाधड़ी:ईडी ने आरकॉम के पूर्व अध्यक्ष पुनीत गर्ग के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया

नयी दिल्ली, 27 मार्च (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) के पूर्व निदेशक पुनीत गर्ग और एक अन्य व्यक्ति के...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

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