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Tuesday, 7 April, 2026
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मत-विमत

हैरानी की बात है कि तेल की कीमतें आसमान छू रही है और भारत चुप है

पिछले एक वर्ष में लोगों ने नौकरियां और आय के साधन गंवाए हैं और महंगाई भी जमकर बढ़ी है. यह दोहरी मार की तरह है, ईंधन ऐसे समय पर महंगा हो रहा है जब लोगों की जेब में पैसा भी कम है.

CAA पर शाह की उलझन, राम बनाम दुर्गा और दिनेश त्रिवेदी- हर दिन बंगाल की सियासत मोड़ ले रही है

शाह बनाम ममता की जंग में हर दिन एक नयी चाल देखने को मिलती है और हर चाल संभावनाओं से भरी दिखती है जो उनकी मजबूती भी उजागर करती है और कमजोरियां भी.

मोदी का रवैया बदला है, विकास पर दांव लगाते हुए वो आर्थिक मसलों पर बड़ा जोखिम उठा रहे हैं

नये वित्तीय कदमों के साथ मुद्रास्फीति का खतरा जुड़ा है, जो मतदाताओं को सरकार के विरोध में खड़ा कर देता है. और, दांव पर अगर आर्थिक वृद्धि है, तो इसने अगर निराश किया तब क्या होगा? मोदी को इस बारूदी रास्ते पर संभलकर ही चलना होगा.

भारतीय राजनीति में विचारधाराओं को लेकर नई मोर्चाबंदी: मोदी का निजी क्षेत्र बनाम राहुल का समाजवाद

कृषि कानूनों के साथ, मोदी सरकार ने श्रम सुधारों को पारित किया है और प्रमुख कंपनियों के निजीकरण का वादा किया है. इसने अर्थिक दक्षिण-वाम को विभाजित किया है, और यह एक अच्छी बात है.

मोदी राजनीतिक छवि गढ़ने में अव्वल रहे हैं पर किसान आंदोलन उनकी इमेज के लिए बड़ी चुनौती बन गया है

किसान आंदोलन ने मोदी सरकार के लिए प्रचार के स्तर पर एक नयी चुनौती खड़ी कर दी है. एक ‘चायवाला’ से लोक कल्याण मार्ग तक मोदी के सफर को लेकर बड़े जतन से जो छवि गढ़ी गई थी वह अब धूमिल होने लगी है.

हरेक जवान वर्दी पहना किसान है, प्रदर्शनकारियों के अपमान से सीमाओं पर डटे जवानों को भी पीड़ा होगी

भारत में इस वक़्त किसान और जवान की इज़्ज़त दांव पर है, क्योंकि प्रत्येक जवान वर्दी पहना किसान है.

एलएसी से सैन्य वापसी चीन को आखिर में पूर्वोत्तर पर अपना दावा छोड़ने को बाध्य करेगी

यह साफ है कि जंग किसी को भी रास नहीं आती है. जून 2020 में गलवान घाटी में झड़प के बाद तैनाती के दौरान दोनों देशों की सेनाएं एकदम आमने-सामने आ जाने के बावजूद फिर कोई हताहत नहीं हुआ.

असहिष्णु से असुरक्षित राष्ट्रवाद तक पहुंच गया है मोदी का भारत : पृथ्वीराज चह्वाण

मोदी सरकार किसान आंदोलन से निबटने के लिए जो कुछ कर रही है उससे उदार लोकतांत्रिक देश वाली हमारी छवि धूमिल हो रही है, सरकार को भूलना नहीं चाहिए कि हर नागरिक को अपनी आवाज़ उठाने का अधिकार है.

इमरान ख़ान का पाकिस्तान बात करना चाहता है. पर मोदी का जवाब एक ही रहा -‘बात नहीं, सिर्फ व्हाट्सएप’

पाकिस्तान की कश्मीर नीति का कभी कोई अन्त नहीं होगा. अगर इसका मतलब ये भी हो कि उससे वार्ता करने वाला कोई न हो और उसे अपने से ही बातचीत आयोजित करनी पड़े

योगी नहीं, मायावती, अखिलेश, राहुल की विफलता, 2017 के बाद से यूपी की बड़ी राजनीतिक कहानी है

जबकि एक साल बाद ही यूपी विधानसभा का चुनाव होने वाला है, सभी विपक्षी दल—सपा, बसपा, कांग्रेस और रालोद भी— जहां के तहां खड़े नज़र आ रहे हैं. वे एक कदम भी आगे बढ़े हों ऐसा नहीं दिखता.

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जातिवाद भारतीय शहरों से खत्म नहीं हुआ है, बस उसने अंग्रेज़ी सीख ली है

शहरी भारत आज जातिवाद खत्म होने के दौर में नहीं है, बल्कि ऐसा दौर है जहां लोग जातिवाद मानना नहीं चाहते. वे ऊंच-नीच के फायदे तो चाहते हैं, लेकिन इसे मानने में शर्म महसूस करते हैं.

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बिहार : सीवान में झड़प के मामले में राजद विधायक ओसामा साहब नामजद

सीवान, छह अप्रैल (भाषा) बिहार के सीवान जिले में जीप और ऑटो-रिक्शा की टक्कर के बाद दो पक्षों के बीच हुई झड़प के...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.