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Thursday, 9 April, 2026
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किसान आंदोलन अराजनैतिक नहीं हो सकता और होना भी नहीं चाहिए, यह लोकतांत्रिक नहीं है

चंपारण से लेकर तेभागा तक किसानों का आंदोलन राजनैतिक रहा है. लेकिन 1980-90 में यह बदल गया जब अराजनैतिक आंदोलन की मांग उठने लगी.

हार्वर्ड के मंच पर हेमंत सोरेन की विभाजनकारी आदिवासी राजनीति बिरसा मुंडा के दर्शन के विपरीत है

झारखंड के मुख्यमंत्री सोरेन या तो नए ज़माने के मिशनरियों के हाथों में खेल रहे हैं या संभवतः धर्मांतरण लॉबी के इशारे पर काम कर रहे हैं.

शी के मीडिया प्रचार से भ्रमित न हों, चीन की ‘ज़ीरो गरीबी’ जो दिखा रही उससे ज्यादा छिपा रही है

चीन दुनिया को यक़ीन दिलाना चाहता है, कि उसके ‘राज्य के नेतृत्व में विकास’ ने ग़रीबी को ख़त्म कर दिया है. लेकिन, जैसा कि हर चीनी चीज़ के साथ होता है, सच्चाई उससे कहीं ज़्यादा जटिल है, जितनी लगती है.

ममता बनर्जी दीदी से बंगाल की बेटी क्यों बन गईं

पश्चिम बंगाल के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ‘बंगाल की बेटी’ को बाहरी हमलावरों से बचाने का नारा देकर मतदाताओं की भावनाओं को उभारने की कोशिश में जुटी है.

क्यों एकजुट रहने के लिए कांग्रेस को आगामी विधानसभा चुनाव हारने होंगे

इंदिरा ने 1969 और 1978 में, कांग्रेस के दिग्गजों को चुनौती दी थी और पार्टी को विभाजित कर दिया था. राहुल या प्रियंका के पास अपनी दादी वाला करिश्मा नहीं है.

शहतूत एग्रीमेंट, चमोली और अफगानिस्तान के बीच संबंध और आत्मबोधानंद के अनशन के मायने क्या है

मातृसदन के साधुओं ने एकबार फिर प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है.जीडी अग्रवाल की मांगों और उन मांगों पर सरकारी दावों – वादों की याद दिलाया है. जबकि प्रधानमंत्री विकास की नई इबारत लिखने के लिए अफगानिस्तान के साथ शहतूत एग्रीमेंट  पर हस्ताक्षर किया है.

1971 के युद्ध के 50 साल होने पर जिंदगी बचाने वाले सैशे और उसे लोगों तक पहुंचाने वाले बंगाली डॉक्टर को न भूलें

भले ही आज हर कोई ओआरएस जानता है, जिसे मेडिकल जर्नल लांसेट ने 20वीं शताब्दी में 'चिकित्सा क्षेत्र की संभवत: सबसे महत्वपूर्ण प्रगति' कहा है लेकिन डॉ. दिलीप महालनबिस को याद करने वाले कम ही लोग होंगे.

भारत को सोचना चाहिए की सकारात्मक विकास दर के बावजूद वह चीन की तरह गरीबी को क्यों नहीं खत्म कर पा रहा

भारत के लिए प्रगति की रफ्तार में गिरावट ही चिंता की बात नहीं है, वह उन दूसरे देशों से आगे निकलने में भी सुस्त हो गया है जो आर्थिक वृद्धि और विकास के मामले में चीन की दूर-दूर तक बराबरी नहीं करते

वैक्सीन पर संदेह से लेकर हड़बड़ी तक, टीकाकरण के दूसरे चरण में मोदी सरकार के सामने क्या है चुनौतियां

जब वरिष्ठ नागरिकों और कोमोर्बिडिटी के शिकार 45 से 60 वर्ष की उम्र के लोगों को वैक्सीन लगेगी तो टीके लगने के बाद इसके प्रतिकूल असर का संभावित खतरा बढ़ सकता है.

राजद्रोह कानून के जरिए अब नागरिक चेतना को नहीं दबाया जा सकता, मोदी सरकार को यह समझना होगा

मोदी सरकार के पिछले छह-सात सालों में बढ़ते गये उसके राजनीतिक व सांप्रदायिक दुरुपयोग ने उसे न सिर्फ बुरी तरह डिमॉरलाइज किया है बल्कि उसके प्रोफेशनलिज्म को भी बहुत धक्का पहुंचाया है.

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पानी से वीज़ा और सुरक्षा तक—हसीना के बाद आगे बढ़े भारत-बांग्लादेश संबंध

बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान की इस हफ्ते नई दिल्ली की दो दिन की यात्रा, एक बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ, को ‘बड़ा कूटनीतिक ब्रेकथ्रू’ माना जा रहा है.

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उत्तराखंड में यूसीसी के तहत मुकदमा दर्ज न होने से छिड़ा विवाद

हरिद्वार, आठ अप्रैल (भाषा) उत्तराखंड में हरिद्वार जिले के बुग्गावाला क्षेत्र में दहेज को लेकर तीन तलाक दिए जाने के एक मामले में पुलिस...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.