जहां तक प्रतापभानु मेहता के इस्तीफे का सवाल है, हमने एक कमजोर को अपना निशाना बनाना के लिए चुन लिया है लेकिन कोई भी कमरे में आ बैठे हाथी पर अंगुली नहीं उठा रहा.
मुंबई पुलिस एक अच्छी फोर्स रही है. सही नेतृत्व मिलने पर यह कभी अपने प्रदर्शन में नाकाम साबित नहीं हुई. बहुत कुछ नेतृत्व करने वाले पर निर्भर करता है, एक गलत विकल्प चुनना पतन की ओर धकेल देता है.
इस चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ खेमे का लस्तपस्त हाल देखकर तो यही लगता है कि उसके नेताओं ने अपनी चुनावी रणनीति बनाने का काम जमात-ए-इस्लामी और आरएसएस के नेतृत्व वाले संघ परिवार को सौंप दिया है.
सरकार बनाने के लिए ज़रूरी संख्या बल जुटाने से भी अधिक आनंददायक होता है पूर्व मेंसहयोगी रहे अपनेप्रतिद्वंद्वीको लगातार शर्मिंदगी झेलते और सत्ता केनाकाबिल नज़र आते देखना.
लाउडस्पीकर से अज़ान कभी-न-कभी तो बंद करना पड़ेगा. उम्मीद यही की जानी चाहिए कि इसे मौजूदा क़ानूनों को लागू करने की प्रक्रिया के तहत करने की जरूरत न पड़े बल्कि मुस्लिम समुदाय की ओर से अच्छे पड़ोसी के रूप में उनके सामूहिक विवेक और जमीर के प्रदर्शन के तौर पर हो.
महाराष्ट्र की मौजूदा सरकार का तख्ता पलट कर बदला लेने को बेताब भाजपा अब अंबानी-सचिन वाज़े कांड, राज्य में कोविड के बढ़ते मामलों और भ्रष्टाचार के आरोपों का सहारा लेती दिख रही है
आरएसएस की पुनर्गठित टीम संघ और सरकार के बीच अधिक सुचारू समन्वय के प्रयास का संकेत देती है, लेकिन शनिवार की कवायद के ज़रिए एक कहीं बड़ा संदेश दिया गया है.
केन और बेतवा दोनों ही नदियां मध्य प्रदेश से निकलती हैं. केन जबलपुर के पास से निकलकर पन्ना राष्ट्रीय उद्यान के बीच से बहती हुई बांदा के पास यमुना में मिल जाती है और बेतवा होशंगाबाद के पास से निकलती है.
क्या किसी ने सच में यह जांचा कि चर्च जाने के बावजूद उन्होंने हिंदू रीति-रिवाज़ बनाए रखे थे या नहीं? यह पता नहीं है, क्योंकि इसके लिए किसी व्यक्ति की निजी ज़िंदगी में और गहरी जांच करनी पड़ती, और कोई भी राज्य इतने लोगों की निजी ज़िंदगी में इतना अंदर तक नहीं जा सकता.