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Wednesday, 25 February, 2026
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नहीं, भारत में कोविड की रिपोर्टिंग को लेकर पश्चिमी मीडिया पक्षपातपूर्ण नहीं है. ये हैं कारण

अगर कोविड हमारे समय की सबसे बड़ी मानवीय त्रासदि है, तो पत्रकारों को उसे दिखाना होगा, बताना होगा, लिखना होगा. पत्रकारिता में कोई राष्ट्रवाद शामिल नहीं होता.

सात चीजें, जो कोविड की तीसरी लहर आने के पहले मोदी सरकार को करनी चाहिए, यही है सही समय

मोदी सरकार को, जो लापता जैसी लगती है और जिसकी आवाज़ केवल सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्टों में ही सुनाई देती है, व्यवस्था को अपने नियंत्रण में लेकर ऐसे कदम उठाने चाहिए कि कोविड की तीसरी लहर के रूप में आशंकित जो बड़ी त्रासदी देश को दहशत में डाले हुए है उसे रोका जा सके

पोलियो, कुष्ठ रोग की लड़ाई में वैज्ञानिक डेटा भारत की ताकत थी. कोविड में, यह एक साइलेंट विक्टिम है

पहली लहर के बाद, वैज्ञानिक विशेषज्ञ हाशिये पर चले गए. जनवरी में, कोविड टास्क फोर्स ने मीटिंग तक बंद कर दिया था.

कोविड का मुकाबला करने के लिए RSS ने शुरू किया अभियान, राहत कार्यों की रणनीति भी बदली

आरएसएस प्रमुख सर संघचालक मोहन भागवत मई के दूसरे सप्ताह में राष्ट्र को संबोधित करेंगे. मकसद है देश में फैले भय और अनिश्चितता को दूर एक सकारात्मक माहौल तैयार करना.

कोरोनाकाल के दौर में BJP में अपने ही अपनों पर सवाल उठाने लगे हैं

भाजपा के विधायकों से जब अपने चुनाव क्षेत्र में मिलने वाली चुनौतियों के बारे में पूछा जाता था तब वे कहा करते थे कि ‘अरे, मोदी जी हैं न!’, लेकिन कोविड ने उनसे उनकी यह निश्चिंतता छीन ली है.

धीरूभाई शेठ- देशज आधुनिकता के सिद्धांतकार और भारत के आंदोलनजीवियों के दोस्त

बहुत से समाजविज्ञानी जिन्हें लगता था कि भारत के गांव तो जाति की धुरी पर बने हुए हैं, मंडल की बहस के दौरान पाला बदलकर ये कहने लगे थे कि आरक्षण का आधार जाति नहीं हो सकती. दूसरी तरफ धीरूभाई थे जो दृढ़मत थे कि आरक्षण की नीति जाति के आधार पर तय की जानी चाहिए.

वीरा साथीदार: जिन्होंने थिएटर के जरिए 40 सालों तक जातिगत अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ी

कोर्ट फिल्म में हमने जो देखा है, वो साथीदार की एक वृहत छवि है, उत्पीड़ित समुदायों के लिए असली प्रेरणा लेने का तरीका ये है कि उनकी सूक्ष्म छवि को पढ़ें और समझें, जो उनके काम, उनके आंदोलन, विरोध प्रदर्शन और उनकी कला में है.

ICU- 70 साल के बुजुर्ग या 30 साल की महिला के लिए? कोरोना की दूसरी लहर में डॉक्टर, नर्स मनोचिकित्सक का कर रहे रुख

भारत मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान नहीं देता है. दूसरी लहर ने इसे नकारे जाने को उजागर भी कर दिया है.

कोविड से हुई गड़बड़ियों के अलावा भारत की कहानी का दूसरा पहलू भी है, जो उम्मीद जगाता है

कोविड की महामारी से त्रस्त भारत को अच्छी खबरों की या सोचने के लिए किसी और विषय की तलाश है. ऐसे में यह खबर शायद कुछ मददगार हो.

असलियत को कबूल नहीं कर रही मोदी सरकार और भारतीय राज्यसत्ता फिर से लड़खड़ा रही है

पिछले सात वर्षों में मोदी सरकार ने बुनियादी शासन की नींव को मजबूत करने के लिए कुछ नहीं किया जिसका नतीजा यह है कि प्रधानमंत्री अपने कदम पीछे खींचते नज़र आ रहे हैं और उनके मंत्री विफल साबित हो रहे हैं जबकि कोविड का संकट गहराता जा रहा है.

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एक वायरल बंदर, एक IKEA का प्लश टॉय और US सुप्रीम कोर्ट का फैसला: टैरिफ के बारे में क्या बताते हैं

पंच का अपने प्लश टॉय से लगाव उसके देश से नहीं, बल्कि उससे मिलने वाले आराम से है. इसी तरह, ग्राहक जियोपॉलिटिकल लेबल से ज्यादा भरोसे और डिजाइन को प्राथमिकता देते हैं.

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जामिया विश्वविद्यालय ने वायरल ‘निकाह’ नोटिस को फर्जी बताया, शिकायत दर्ज कराई

नयी दिल्ली, 24 फरवरी (भाषा) जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने मंगलवार को एक परिपत्र जारी कर सोशल मीडिया पर प्रसारित उस अधिसूचना का खंडन किया,...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.