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Saturday, 17 January, 2026
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मत-विमत

वो भारत जो वीर दास और उदारवादी चाहते हैं— और एक वो जिसके बारे में वे बात नहीं करते

स्टैंडअप कॉमेडियन वीर दास का कैनेडी सेंटर मोनोलॉग ‘टू इंडियाज’ 2014 से पहले की पुरानी यादों और उन बातों पर आधारित है जिन्हें हर उदारवादी की तरफ से जबरन दफना दिया गया है.

लोकतंत्र का धुंधलका- आखिर वायु-प्रदूषण राजनीतिक मुद्दा क्यों नहीं बन रहा?

वायु-प्रदूषण या फिर जलवायु-परिवर्तन का मसला चाहे कितना भी गंभीर हो, यह आप से आप तो राजनीतिक मुद्दा बनने से रहा. इसे राजनीतिक मुद्दा बनाना की मशक्कत करनी पड़ेगी.

रोजगार में भारतीय युवा महिलाओं की भागीदारी कितनी है, और इसमें उनकी दिक्कतें क्या-क्या हैं

भारत में ‘नायका’ नामक ब्युटी कंपनी की सफलता पर खुश होने के साथ हमें यह भी जानना चाहिए कि आज कितनी युवा महिलाएं रोजगार करने का फैसला कर सकती हैं या वाकई रोजगार कर सकती हैं

हिन्दू, हिन्दुत्व और हिन्दूवाद का मतलब क्या है? क्या हिंदुत्व के बारे में न्यायिक व्यवस्थाओं पर पुनर्विचार की जरूरत है

सलमान खुर्शीद की किताब में हिन्दुत्व को आईएस और बोको हराम के साथ तुलना करने पर ‘हिन्दुत्व’ को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है.

यमुना हमारे सीवेज से ही दिख रही है, नाले बंद कर देंगे तो वो नजर नहीं आएगी

दिल्ली के मुखिया जिस यमुना में दिल्लीवासियों को डुबकी लगवाना चाहते हैं वह यमुना सरकारी फाइलों में ‘मृत नदी’ के रूप में दर्ज है.

आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियों के मद्देनजर अमित शाह शासन पर ज्यादा ध्यान दें और नड्डा पार्टी संभालें

गृह मंत्री अमित शाह के लिए काम निश्चित हैं, लेकिन अगर वे उत्तर प्रदेश की राजनीति में उलझे हुए हैं तो इसकी वजह यह है कि भाजपा उन पर बहुत ज्यादा निर्भर है

2024 की जंग से पहले BJP नहीं बल्कि ममता और केजरीवाल के बीच की टक्कर देखने लायक होगी

मोदी के राजनीतिक विकल्प के रूप में उभरने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अफरातफरी 2014 के बाद से ही मची हुई है, और मोदी ने भारत के मुख्यमंत्रियों की महत्वाकांक्षा को पर लगा दिए हैं.

मोदी के साढ़े सात साल: घरों और शौचालयों के आंकड़े अच्छे, पर गरीबी के मामले में खराब रिकॉर्ड

2020 से पहले मोदी सरकार का आर्थिक रेकॉर्ड उतना ‘बुरा’ नहीं था जैसा मनमोहन सिंह ने अनुमान लगाया था, लेकिन आर्थिक वृद्धि भी दहाई अंकों वाले आंकड़े की ओर नहीं बढ़ी; सरकार कोविड के दौरान लड़खड़ाती और फिर भूलों से सबक लेती दिखी

RSS/हिंदुत्व पर कई सवाल उठ सकते हैं पर ‌ISIS से तुलना कितनी वाजिब?

बौद्धिक आलस के शिकार होने वालों में सलमान खुर्शीद अकेले नहीं हैं इसलिए उनसे सीख लेने से पहले कांग्रेसनेताओं को आइएसआइएस और चुनावी राजनीति के बारे में पूरी जानकारी हासिल कर लेनी चाहिए.

हे देशप्रेमियों, MTI को बीमारी मानना भाषायी रंगभेद है, अंग्रेजी को अपनी भाषा की तरह ओढ़िए-बिछाइए

तरक्की के सपने संजोने वाले और इसके लिए शुद्ध अंग्रेजी बोलने के चक्कर में मादरी जुबान को भुलाने की जुगत में लगे हिन्दुस्तानियों की हालत जितनी त्रासद है, उतनी ही प्रहसनात्मक भी.

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पाकिस्तान से आज़ादी: भारत, आगे बढ़ो और उसे इतनी अहमियत देना बंद कीजिए

पाकिस्तान अधिकतर मामलों में भारत की बराबरी करे यह न केवल नामुमकिन है, बल्कि वह और पिछड़ता ही जाएगा. उसके नेता अपनी अवाम को अलग-अलग बोतल में सांप का तेल पेश करते रहेंगे.

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गर्भाशय ग्रीवा कैंसर खत्म करने के लिए एचपीवी टीकाकरण और स्क्रीनिंग के विस्तार की मांग: विशेषज्ञ

नयी दिल्ली, 17 जनवरी (भाषा) सरकार और कैंसर संस्थानों ने यहां अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में एचपीवी टीकाकरण के विस्तार और स्व-नमूना आधारित...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.