अगले सीडीएस के लिए एक कठित चुनौती ये भी है कि बिडिंग प्रक्रिया में उसे सरकार की तरफ से काम करना होगा और उसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि दोनों के बीच एक सीमा रेखा बनी रही.
अगर आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद चाहता है कि भारत एक शुद्ध हिंदू राष्ट्र बने और दूसरे धर्म के लोग शुद्धिकरण करके हिंदू बन जाएं, तो उसे जाति की समस्या से जूझना होगा और जाति का विनाश करना होगा.
एमएसपी की गारंटी देने का अर्थ होगा उगाही की एक योजना बनाना, कीमत में अंतर की भरपाई का विकल्प देना या इन दोनों को एक साथ लागू करना. इसका सरकार और बाजार पर क्या असर पड़ेगा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में नागा शांति समझौते पर दस्तखत तो हो गए मगर ‘आफ़स्पा’ अब भी वहां लागू है, और हम खुद को सबसे बड़ा लोकतंत्र कहते हैं!
मीडिया के साथ आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की हाल की मुलाक़ात के तो कई मायने निकाले जा रहे हैं. मगर कुछ महीने पहले पुस्तक प्रकाशकों के साथ उनकी बातचीत पर कई लोगों ने ध्यान भी नहीं दिया.
डोभाल सिविल सोसाइटी को युद्ध का अगला मोर्चा मानते हैं लेकिन ‘शिलंग वी केयर’ नाम के छोटे-से नागरिक संगठन ने उग्रपंथियों, और जबरन वसूली के चलन का डटकर मुक़ाबला किया
लेकिन BJP-विरोधी या मोदी विरोधी होना ही, एक ‘न्यूनतम साझा कार्यक्रम’ का ताना बाना बुनने के लिए काफी नहीं होगा, जो 90 के दशक का एक और घिसा-पिटा वाक्य है.
पाकिस्तान अधिकतर मामलों में भारत की बराबरी करे यह न केवल नामुमकिन है, बल्कि वह और पिछड़ता ही जाएगा. उसके नेता अपनी अवाम को अलग-अलग बोतल में सांप का तेल पेश करते रहेंगे.