Saturday, 21 May, 2022
होममत-विमतTV न्यूज में 90% नेता, 5% एक्सपर्ट, 5% एंकर होते हैं, आखिरकार UP की कवरेज से बदला माहौल

TV न्यूज में 90% नेता, 5% एक्सपर्ट, 5% एंकर होते हैं, आखिरकार UP की कवरेज से बदला माहौल

टीवी चैनलों को ‘सबसे पहले’ कहकर अपनी तारीफ करने में बड़ा मजा आता है, लेकिन यूपी चुनाव की बारी आई तो कुछ वाकई तारीफ के लायक हो रहा.

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हमारे प्यारे न्यूज चैनलों की एक लगातार जारी बेतुकी हरकत खुद की तारीफ करने की कमजोरी है, वहां भी जहां कोई मतलब न हो. बुधवार की सुबह, जैसे ही समाजवादी पार्टी के ‘नेताजी’ मुलायम सिंह यादव की बहू अपर्णा यादव ने नई दिल्ली के बीजेपी मुख्यालय में कदम रखा, न्यूज चैनल फौरन उनके दलबदल की खबरों का भोंपू बजाने लगे: ‘अखिलेश के लिए सबसे बड़ा झटका’ (टाइम्स नाउ), बहू ने यादव परिवार को ‘झटका’ (इंडिया टुडे), ‘बहू नांव से कूदी’ (सीएनन न्यूज18), ‘भाजपा ने बड़ा परिवार तोड़ा’ (एनडीटवी 24×7).

और अब अपनी पीठ थपथपाने की बारी थी: टाइम्स नाउ ने किया कि ‘स्कूप’ उसका था; इंडिया टुडे ने शेखी बघारी, ‘इंडिया टुडे ने इतवार को ही बताया था’; सीएनएन न्यूज 18 ने कहा, वही ‘खबर देने वाला पहला’ है; रिपब्लिक टीवी ने कहा, उसका ‘न्यूजब्रेक सही ठहरा’. जबकि सभी एक ही वक्त चला रहे थे- मजेदार है न?

यह तो और भी बेतुका है कि उन्होंने वह बताने की परवाह नहीं की जो वाकई तारीफ के काबिल है. इस मामले में उत्तर प्रदेश की कवरेज है, जहां विधानसभा चुनाव का दौर जारी है. कई चैनलों-ज्यादातर हिंदी-के संवाददाता यूपी घूम रहे हैं और लोगों से बात कर रहे हैं. माना कि यह कोई नया नहीं है. पिछले चुनावों में ऐसा ही हुआ था. हालांकि इससे यह कम तारीफ के काबिल नहीं हो जाता. यह चुनाव कवरेज का बेहतरीन ढंग है.

यह कहने की वजह है कि टीवी न्यूज का वास्ता अमूमन 90 प्रतिशत नेताओं के बारे में, 5 प्रतिशत ‘एक्सपर्ट’ और 5 प्रतिशत प्राइम टाइम एंकरों के नजरिए से होता है. तो, अगर वह आम लोगों पर समय और स्थान खर्च करते हैं कि वे क्या सोचते हैं और उनका क्या कहना है, हमें उन्हें ‘धन्यवाद’ कहने की दरकार है.
तो, धन्यवाद, टेलीविजन न्यूज चैनलो!


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लोगों से बात करने का धन्यवाद

हमें जिंदगी की असली झलक दिखाने और लोगों से सुनने का मौका देने के लिए आप सबको धन्यवाद. यह चुनाव के बारे में पार्टी प्रवक्ताओं और ‘बौद्धिक’ ज्ञान उगलते एंकरों को सुनने से बहुत ज्यादा कीमती है- लोग हमें राज्य के मूड का अंदाजा बेहतर देते हैं.

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भदोही के उस आदमी को सुनने देने के लिए धन्यवाद, जो उसने कुछ इस तरह बताया: मुसलमान हिंदुओं के लिए (समाजवादी पार्टी, कांग्रेस वगैरह के) को वोट डालते हैं, और हम बीजेपी को भी वोट डालेंगे, बशर्ते वह विभाजनकारी राजनीति छोड़ दे. उसने जोड़ा, मुद्दे (चुनाव में) अहमियत नहीं रखते, मायने तो ‘मेरी पहचान’ रखती है (न्यूज नेशन).
धन्यवाद हमें बुलंदशहर और खुर्जा के एक पॉटरी प्लांट का नजारा दिखाने के लिए, जहां पश्चिम बंगाल के 15 वर्ष के प्रवासियों ने कहा कि योगी आदित्यनाथ की सरकार अच्छा काम कर रही है; जहां औरतें ज्यादा खुलकर बोल रही थीं और उन्होंने कहा कि उन्हें तो बस रोजगार और तनख्वाह कमाने की फिक्र है; जहां मिठाई वाला के ग्राहक ने कहा, ‘यहां योगी का चल रहा.. ..’ और दूसरे ने बताया कि  ‘बीजेपी की वापसी लग रही है’ (आज तक).

धन्यवाद, ‘भैया जी कहिन’ (न्यूज18 इंडिया) मथुरा के एक गांव में प्रधान की खिंचाई के लिए, जहां सब कुछ डूबा हुआ और सड़कें गड्ढों से भरी लगीं; एमएससी कर रही लड़की से बात करने के लिए, जिसने कहा कि ट्यूशन बंद हो गया है, और दूसर लड़की ने कहा कि गांव की हालत बहुत बुरी है.

धन्यवाद न्यूज 24, हमें हापुड़ की सैर कराने के लिए, जहां एक दलित ने कहा कि सरकार तो जरूर बदलनी चाहिए, मगर किसे वोट देना है, इस बारे में उसे सोचना होगा. धन्यवाद न्यूज नेशन बागपत पहुंचने के लिए, जहां एक नौजवान ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपराध मुक्त कर दिया है, इस कदर कि लड़कियां भी बिना डर के रात में फोन पर बात करती घूम सकती हैं; जहां दमसरे ने कहा कि बेरोजगारी भारी है और ज्यादा चिंतित बुजुर्ग ने कहा कि ज्यादा बड़ा मुद्दा इनसानियत है. क्या बात है.

शुक्रगुजार हैं मेरठ में लोगों से मिलने के लिए; जहां एक ने कहा, ‘बदलाव जरूरी है’, दूसरे ने कहा, ‘योगी बेस्ट हैं’ जबकि तीसरे ने बताया कि उसकी राय में कीमतें और रोजगार मुद्दा हैं (इंडिया टीवी).

तो, लोग यूपी चुनावों के बारे में क्या कह रहे हैं? लगता है भाजपा को बढ़त है लेकिन वोटरों में भारी असंतोष है.

टीवी पर आपके लिए भविष्यवाणी है

दर्शकों को सलाह है कि वे चैनलों पर स्थानीय नेताओं की बेमानी बहस सुनने के बदले इन जमीनी रिपोर्टों को देखें. एबीपी न्यूज पर लगातार यह बहस चलती रहती है, जिसमें नेताओं, उनके समर्थकों की हुल्लड़बाजी चलती रहती है और हम सुन भी कम पाते हैं.

क्या ओपिनियन पोल ज्यादा सही हैं? कहना मुश्किल है मगर याद रखें कि उन सबने बंगाल में 2021 में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी में कांटे की टक्कर बताई थी, जो नतीजों के आसपास भी नहीं था. इसलिए यह उलझाऊ मामला है.
इससे उन न्यूज चैनलों को डर नहीं लगा, जो यूपी के बारे में अपनी भविष्यवाणी दिखा रहे हैं. सोमवार को इंडिया टीवी और रिपब्लिक टीवी ने भाजपा की आसान जीत की भविष्यवाणी की. इंडिया टीवी का अनुमान तो थोड़ा कमतर बीजेपी को 230-235 सीटें दे रहा था, जगकि रिपब्लिक टीवी उसे 252-272 सीटों पर जितवा रहा था, जो शायद अभी तक टीवी ओपिनियन पोल में सबसे ज्यादा है. पिछले हफ्ते टाइम्स नाउ और एबीपी न्यूज के पोल भी मोटे तौर पर इंडिया टीवी के आसपास थे. दरअसल सभी पोल में बीजेपी को गोवा, मणिपुर और उत्तराखंड में भी बढ़त दिखाई गई है. हैरानी होती अगर कोई कुछ और दिखाने की हिम्मत जुटाता….

हमें ज्यादा बेहतर आकलन के लिए इन राज्यों में लोगों की भी सुननी चाहिए. क्या चैनल उधर ध्यान देंगे या वे सबसे दमदार यूपी पर ही टिके रहेंगे?

आखिर में, हम जानते हैं कि न्यूज चैनलों को दर्शकों की बेतहाशा तलाश है लेकिन क्या उन्हें वही सांप्रदयिक खेल खेलना चाहिए, जिसका आरोप वे नेताओं पर लगाते हैं? दो सुर्खियां ही बता देंगी कि किस हद तक आपको उकसा सकती हैं: ‘पश्चिम उत्तर प्रदेश में गन्ना बनाम जिन्ना?’(टाइम्स नाउ), ‘हिंदू के खिलाफ महागठबंधन?’ (न्यूज18 इंडिया)

(इस ख़बर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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