केंद्र सरकार अगर अपने विरोधियों को धमकाने, जेल में भेजने के लिए अपनी एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है, तो गैर-भाजपाई मुख्यमंत्रियों ने इसी तरह से प्रतिकार करने का जो तरीका चुना है वह आगे और तीखा रूप ले सकता है
अभी तीन साल पहले 2019 में नरेंद्र मोदी सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून बनाकर देशवासियों का विरोध मोल लिया और उसके खिलाफ जगह-जगह विरोध प्रदर्शन व आन्दोलन शुरू हो गये, तो फैज की प्रसिद्ध नज्म ‘हम देखेंगे’ उनका सबसे प्रिय हथियार बन गई.
पाकिस्तान में अब तक जो सरकारें बर्खास्त की गईं उन्हें भ्रष्ट बताकर कोसा जाता रहा है लेकिन इस बार मामला ज्यादा गंभीर है क्योंकि इमरान जो कचरा छोड़ गए हैं उसे साफ करना मुश्किल है.
2050 तक 821 मिलियन मेट्रिक टन प्लास्टिक कचरा नदी और समुद्रों में जमा हो जाएगा और 850 मेट्रिक टन माइक्रोप्लास्टिक हमारी नालियों, नदियों और समुद्र में घुल जाएगा. यानी मछलियों से ज्यादा प्लास्टिक तैरता नजर आएगा.
इस खतरे का जवाब सामरिक नीति है और टेक्नोलॉजी में श्रेष्ठता का मुक़ाबला बुद्धि की ताकत से किया जा सकता है इसलिए नए सीडीएस को काफी वैचारिक मंथन करना पड़ेगा.
सरकार को अगर जन-आंदोलन और आंदोलनकारियों से परहेज है तो फिर शिक्षा का सरकारी बोर्ड अपनी सरकार-भक्ति दिखाते हुए ऐसे पाठ पढ़ाने के जतन करेगा ही कि छात्र आंदोलनकारी ना बन जायें.
पश्चिम बंगाल चुनाव में वामपंथी दल और कांग्रेस खुरचन में हिस्सेदारी के लिए होड़ लगा रहे हैं. पूर्वी-मध्य भारत में माओवाद को कब्र में दफन कर दिया गया है, तो केरल में वे सरकार विरोधी दोहरी भावना से जूझ रहे हैं.