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Thursday, 5 March, 2026
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मोदी ने 8 साल पहले भारतीय सेना को बदलने का वादा किया था लेकिन अभी तक अधर में है योजना

सेना में अपने आपमें परिपूर्ण कई सुधारों की योजनाएं बनीं लेकिन पता नहीं किन अज्ञात कारणों से उन्हें लागू नहीं किया गया.

हिंदी यूं ही लोकप्रिय नहीं, काफी सरकारी जोर-आजमाइश हुई है

आजादी के बाद हिंदी का जो विकास हुआ, वह पूरी तरह स्वाभाविक नहीं है. हिंदी आज अगर पहले से ज्यादा लोकप्रिय नजर आ रही है, तो इसमें सरकार का पैसा और प्रयास लगा है.

हिबतुल्लाह खुद तो छिपे रह सकते हैं मगर तालिबानी नेतृत्व के अंदर उभरती कलह को नहीं छिपा सकते

मुल्ला उमर के रहस्यमय उत्तराधिकारी हिबतुल्लाह अखूंदज़ादा ने इस सप्ताह ईद पर संदेश जारी किया मगर वे सबके सामने क्यों नहीं आते इसका कोई खुलासा नहीं किया गया है.

काफी लंबी खिंची जंग से वैश्विक मिलिट्री सप्लाई सिस्टम हुआ तबाह, भारत का आगे आने का वक्त

अमेरिका ने यूक्रेन में ए-ग्रेड स्वीचब्लेड ड्रोन उतारा, तो भारत को छोटे डिलिवरी सिस्टम वाले हथियारों का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए

देश में लाउडस्पीकर को लेकर हो रही राजनीति क्या असल मुद्दों से भटकाने की कोशिश है

भाजपा के लिए आने वाले चुनाव बहुत महत्वपूर्ण और इनमें खासकर गुजरात, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़, राजस्थान जैसे बड़े राज्य शामिल हैं जो भाजपा के गढ़ हैं या कभी रहे हैं, जिन्हे भाजपा कभी हल्के में नहीं लेगी.

बीजेपी हो, आप या शिवसेना-नेताओं को सरकारी कामकाज की फुर्सत नहीं, सत्ता तो बस बदला लेने का औजार

महाराष्ट्र में हनुमान चालीसा पर बवाल से लेकर मोदी की पेट्रोल-डीजल टैक्स पर बातें, राजनैतिक मर्यादाएं तो दरवाजे से बाहर हैं. झेलते तो देश के गरीब लोग हैं.

CAA, CDS, OBCs- बड़ी घोषणाएं करने और फिर उन्हें खटाई में डालने में महारत हासिल कर ली है मोदी सरकार ने

नरेंद्र मोदी बेशक सबसे लोकप्रिय नेता हैं लेकिन सुधारों की जो घोषणाएं उनकी सरकार ने की हैं उनमें कोई प्रगति होती नहीं दिख रही, चाहे वह सीएए हो या सीडीएस हो या ओबीसी में वर्गीकरण.

अमित शाह और अजय देवगन के बयानों से शुरू नहीं हुई है भारत को हिंदी राष्ट्र बनाने की जिद

पहले राजभाषा आयोग में हिंदी और संस्कृत को जिस तरह से महत्व मिला उससे जाहिर है कि भारत में भाषा की बहस में सरकार पहले भी हिंदी और संस्कृत के पक्ष में खड़ी होती रही है.

ऐसे ‘दोस्तों’ के रहते हिन्दी को दुश्मनों की क्या जरुरत

एक प्रेक्षक ने ठीक ही लिखा है कि ‘किच्चा ने जहां सही अर्थों में कलाकार होने का परिचय दिया और सभी भाषाओं के सम्मान की बात कही, वहीं अजय देवगन भाषाई राजनीति का मोहरा बनते नजर आए.

महिला आत्मघाती हमलावरों ने एक ‘खास’ तरह का डर पैदा किया, लेकिन यह बमों से नहीं पितृसत्तात्मकता से जुड़ा है

पुरुषों की तरह महिला आत्मघाती हमलावर भी कुछ कारणों—अच्छे हों या बुरे—से अपनी जान देती हैं और तमाम लोगों की जान ले भी लेती हैं. वे भी राजनीतिक नाराजगी, प्रतिशोध और आक्रोश की वजह से ऐसा कदम उठाती हैं.

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महाराष्ट्र: अंडाणु दान मामले में नासिक में आईवीएफ केंद्र सील

नासिक, पांच मार्च (भाषा) महाराष्ट्र के नासिक में अधिकारियों ने कथित अवैध अंडाणु दान से जुड़े मामले में एक इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) केंद्र को...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.