मोदी सरकार की सबसे बड़ी कमजोरी यह रही है कि वह चुनावी बहुमत की सीमाओं को स्वीकार करने से कतराती है, जिस वजह से भूमि कानून, कृषि कानून का कबाड़ा हो गया, श्रम संबंधी नियम लागू न हो पाए
अयोध्या जैसे धार्मिक मुद्दों पर पहले जब चर्चा की जाती थी तब शालीनता का एक झीना परदा उसके ऊपर रहा करता था मगर अब तो नफरत का खुला प्रदर्शन करने से कोई परहेज नहीं किया जाता है.
सेक्युलरवाद भारतीय राष्ट्रवाद का अभिन्न अंग है, और सिर्फ गांधी-नेहरु की परंपरा वाला सेक्युलरवाद ही नहीं बल्कि भगतसिंह और सुभाषचंद्र बोस की परंपरा वाला सेक्युलरवाद भी हमारे राष्ट्रवाद का अटूट हिस्सा है.
उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट जैसे क़ानूनों की नींव डालने वाला 1923 का गुंडा एक्ट यह सिद्धांत स्थापित कर गया है कि सज़ा पाने के लिए अपराध करना जरूरी नहीं है.
सरकार कड़वा सच क्यों नहीं बोल सकती, इसे समझना बहुत आसान है. तमाम युद्धों की तरह यह युद्ध भी जब रुक जाएगा तब भी भारत के हित विजेता के साथ भी जुड़े होंगे और हारने वालों के साथ भी.