इंदिरा गांधी जैसा चतुर राजनेता भारत में दूसरा कोई हुआ नहीं, जिन्होंने एक नयी कांग्रेस ही खड़ी कर दी थी लेकिन राहुल गांधी तो विरासत में मिली पार्टी को बरबाद कर रहे हैं .
पर्दे के पीछे के चैनल बेशक सक्रिय हैं. वैसे भी, आत्मसम्मान से भरे परमाणु शक्ति संपन्न देश, खासकर पड़ोसी देश दिखावे के लिए भले आपसी संपर्क से इनकार करें मगर वे एक-दूसरे से बात करने से मना नहीं कर सकते.
शेखर गुप्ता का कहानी कहने का अपना एक अनोखा अंदाज़ है, और CTC की कामयाबी को दोहराना तक़रीबन नामुमकिन है. लेकिन दिप्रिंट के तरकश में सिर्फ एक ही तीर नहीं है.
सवाल है कि इसके बावजूद जो लोग मानते हैं कि कांग्रेस के बगैर कोई राष्ट्रीय विकल्प बन ही नहीं सकता, वे कभी उसे इसका इलहाम करा पायेंगे या नहीं? अगर नहीं तो उससे लगाई गई उनकी उम्मीदें क्योंकर हरी हो सकती हैं?
एक चीज़ जो ट्रांस की खूबसूरती को ज़िंदा रखती है, वह है उनका समुदाय और अपनापन. लेकिन कानून बनाने वालों की नजर में, यह अपनापन ‘धोखा’, ‘लुभाना’ और ‘गलत असर डालना’ बन जाता है.