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Sunday, 8 March, 2026
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1966 से 2005 तक भारतीय डाक टिकटों परिवार नियोजन का संदेश, डाक विभाग ने कैसे निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

यह याद दिलाती है कि इमरजेंसी में सरकार प्रायोजित जबरन परिवार नियोजन से प्रजनन दर में नहीं के बराबर फर्क. 2022 में तो जबरन कार्यक्रम चलाने की कोई कोशिश मोटे तौर पर बेवजह, क्योंकि दर लगातार घट रही.

लालू यादव के बड़े दिल और नीतीश-तेजस्वी की निडरता से विपक्ष में नया जोश

भाजपा जिस तरह से क्षेत्रीय दलों को अमर्यादित और अनैतिक तरीक़ों से नेस्तनाबूद करने में लगी थी, ऐसे में राजद यह अपनी ज़िम्मेदारी समझता है कि अपनी पूरी ताक़त से बीजेपी का मुक़ाबला करे और क्षेत्रीय पार्टियों को बचाए.

बिजली, स्कूल, सड़कें या अस्पताल- ‘मुफ्त रेवड़ियों’ पर रोक लगाना मोदी के लिए भी आसान क्यों नहीं

बुद्धिमानी तो इसी में है कि पैर उतना ही पसारिए जितनी चादर लंबी है लेकिन भारत में लोग रियायतों के इतने आदी हो चुके हैं कि उन्हें वे उपाय जमते नहीं जिनसे भविष्य में बेहतर नतीजा हासिल होता हो.

राष्ट्रवाद पर मोदी से टक्कर लेने को तैयार केजरीवाल, उन्हें तिरंगा-दर-तिरंगा लोहा लेना पड़ेगा

नरेंद्र मोदी को लेकर अरविंद केजरीवाल ने अपना ‘मौन व्रत’ तोड़ दिया है. राजनीति में आया यह मोड़ बिहार में आए नाटकीय मोड़ जितना ही महत्वपूर्ण है.

6 वजहें: फॉरेस्ट गम्प की रिमेक की जगह, बॉलीवुड फिल्म बनकर क्यों रह गई लाल सिंह चड्ढा

इसके निर्माताओं का दावा है कि ये अमेरिकी फिल्म फॉरेस्ट गम्प (1994) की रिमेक है.

रक्षा मंत्रालय का हिस्ट्री डिवीजन बस तथ्यों-आंकड़ों का संग्रह करे, इतिहास को इतिहासकारों पर छोड़ देना चाहिए

इतिहास बताता है कि सेनाएं अपने युद्धों और अभियानों का ईमानदारी से रेकॉर्ड नहीं रखतीं, और भारतीय सेना भी इस मामले में कोई अपवाद नहीं है.

बिहार, पंजाब, राजस्थान वित्तीय रूप से परेशान क्यों हैं? हर राज्य के अपने मूल कारण हैं

बिहार का कर राजस्व सबसे कम है, पंजाब ने ज्यादा खर्चों के वादे कर रखे हैं,, तो राजस्थान वित्तीय घाटा कम करने का लक्ष्य पूरा करने से चूक गया है. इन सभी राज्यों को वोट बैंक और वित्तीय विवेक के बीच संतुलन बनाने की जरूरत है.

बिहार: सत्ता संघर्ष में भाजपा की यह शिकस्त विपक्ष के कितने काम आयेगी?

देश की जनता को जो पहले ही एक जैसे चेहरे वाले दलों के बीच होते आ रहे चुनावों में सरकारें बदल-बदलकर हार चुकी है और निराश ही करेंगे, सो अलग.

कैसे अशराफ उलेमा पैगंबर के आखिरी भाषण में भ्रम की स्थिति का इस्तेमाल जातिवाद फैलाने के लिए कर रहे

मक्के में आखिरी हज पर और गदीर में दिए गए भाषण में कही गई बात बिल्कुल एक दूसरे के विपरीत है. एक में पैगंबर मुहम्मद अपने द्वारा किए गए कार्यों का पालन करने का निर्देश देते हैं और दूसरे में अपनी औलाद और रिश्तेदारों का अनुसरण करने को कहते हैं.

ग्रामीण सामंतवाद का बुरा दौर, नोएडा में कैसे जीत गए शहरी इलीट

भारत में आधुनिकता या मॉडर्निटी का शास्त्रीय यानी क्लासिक रूप लागू नहीं होता. यहां मॉडर्न होने का मतलब परंपरा और अतीत से संबंध विच्छेद नहीं है.

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ईरान का संघर्ष भारत तक पहुंचा, मुसलमानों से फिर देशभक्ति साबित करने की मांग

जो भी सच में सच्चाई जानना चाहता है, वह आसानी से उन कई घटनाओं को देख सकता है—कश्मीर से लेकर लखनऊ तक, जहां भारतीय मुसलमान आतंकवादी हमलों के खिलाफ सबसे आगे खड़े होकर आवाज़ उठाते रहे हैं.

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दिल्ली के नांगलोई में अचार के कुएं में गिरने से फैक्टरी मालिक और उसके बेटे की मौत

नयी दिल्ली, सात मार्च (भाषा) दिल्ली के नांगलोई इलाके में शनिवार शाम को अचार बनाने की एक फैक्टरी में कुएं में गिरने से फैक्टरी...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.