जिन कारणों से कांग्रेस ने भारत जोड़ो पदयात्रा की आवश्यकता महसूस की उन्हें उसने अधिकृत रूप से तीन बिंदुओं के अंतर्गत रखा है. पहला, अर्थव्यवस्था का विनाश. दूसरा, राजनीतिक केंद्रीयकरण और तीसरा सामाजिक ध्रुवीकरण.
यह मान लेना भूल होगी कि सेना उत्तर-पूर्व में बगावत विरोधी कार्रवाई की ज़िम्मेदारी से पूरी तरह मुक्त हो गई है और असम राइफल्स के महानिदेशक ने इसकी पूरी ज़िम्मेदारी संभाल ली है
राहुल गांधी को छोड़ अधिकतर विपक्षी नेता इस सच्चाई को कबूल कर चुके हैं कि नरेंद्र मोदी पर हमले करने से वोट नहीं मिलने वाला है; इसलिए सबने अपना-अपना उपाय खोज लिया है.
अमेरिका स्थित फेथ एंड मीडिया इनिशिएटिव के सीईओ, जिनसे पूर्व में पीएम मोदी और राहुल गांधी भी सलाह ले चुके हैं, ने दिप्रिंट से आस्था और धर्म पर उनकी संस्था द्वारा करवाए गए सर्वेक्षण के निष्कर्षों के बारे में विशेष रूप से बातचीत की.
बहुचर्चित न्यूजऐंकर रवीश कुमार की मानें तो मुख्य चुनाव आयुक्त का यह प्रस्ताव विपक्ष, खासकर छोटे दलों के आर्थिक स्रोत खत्म करने की कवायद है, जो सत्तापक्ष व विपक्ष के दलों के बीच आर्थिक असंतुलन और बढ़ायेगी.
हिजाब दरअसल अपनी पहचान, राज्यतंत्र, सामाजिक भेदभाव जैसे मसलों के लिए संघर्ष का एक प्रतीक है और ईरान में हुए पश्चिमीकरण से वहां की महिलाओं को बराबरी नहीं, यातनाएं ही मिलीं.
विशाल दौलत और राजनीतिक दबदबा रखने वाले कुलीनों ने तो अपना खजाना बेरोकटोक भरा लेकिन यूक्रेन सोवियत संघ के विघटन से पहले यूरोप के निर्धनतम देशों में बना रहा.
कांग्रेस के वोटर करीब एक दशक से विकल्प की तलाश में हैं और आंध्र से लेकर तेलंगाना और महाराष्ट्र तक एक ही कहानी दोहराई गई है. इधर ‘आप’ इसी का फायदा उठाने में जुटी है.
पाकिस्तान हम पर 'ईरान जैसा' हमला करने के लिए बेताब होगा, और चीन हमें 'असममित विस्तार' का मौका दिए बिना ही एक हवाई अभियान को अंजाम देने की योजना बना रहा होगा. भारत के पास खुद को बदलने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है.