उत्तर-पूर्व के लोग ज्यादा स्मार्ट हैं. वे “दिल्ली” की अच्छी पेशकश के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हैं. शांति, संपर्क, और भारत की उछाल मारती अर्थव्यवस्था ने राष्ट्रीय भावना और भारतीयता को भी बढ़ावा दिया है
जब भारतीयों ने विपक्षी नेताओं पर छापा पड़ते और गिरफ्तार होते देखा, जैसा की अभी मनीष सिसोदिया के साथ हुआ है तो वे जानते हैं कि यह सिर्फ राजनीतिक लड़ाई है, सार्वजनिक जीवन में अखंडता के लिए एक झटका नहीं.
आज यह शिकायत एक भारतीय कर रहा है, इससे पहले यह पाकिस्तान के पूर्व पीएम नवाज शरीफ थे- जो 2018 में मुंबई हमले के मुकदमे में देरी पर सवाल उठाने के बाद उच्च राजद्रोह के लिए जेल गए थे.
भारत के रणनीतिकारों को स्पष्ट हो जाना चाहिए कि तिब्बत में इन्फ्रास्ट्रक्चर और सैन्य सुविधाओं का लंबे समय से विकास करने के बाद चीन सीमा विवाद का इस्तेमाल भारत से अपने मूल्यवान संसाधनों को बरबाद करवाने के लिए कर रहा है.
सरकार ने इस बार के बजट में नये टैक्स रिजीम को इस ढंग से पेश किया है कि लोगों को बचत करने की जरूरत ही न पड़े. अब जो करदाता नये टैक्स रिजीम को मानेगा उसे बचत करने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
भारत के जीवीए में सेवाओं की हिस्सेदारी 8 वर्षों में प्राथमिक फोकस के बिना 48% से बढ़कर 57% हो गई. कल्पना कीजिए कि अगर मोदी सरकार इस पर पूरी तरह फोकस हो जाए तो यह क्षेत्र क्या कर सकता है.
दो साल बाद खुसरो को दिल्ली की याद सताने लगी तो इस कामना के साथ अयोध्या छोड़ी कि राम की नगरी की खूबसूरती अपने दिल में बसाकर अपने पीर हजरत निजामुद्दीन औलिया के कदमों में आखिरी सांस लें.
जिन भारतीय बच्चों के पास स्मार्टफोन हैं, वे इसका ज़्यादातर इस्तेमाल मनोरंजन के लिए करते हैं—जैसे फिल्में देखना या सोशल मीडिया चलाना—न कि पढ़ाई के लिए. क्या यही ‘डिजिटल इंडिया’ का सही इस्तेमाल है?