आजतक न्यूज़ रूम में मुख्य रूप से गैर-ब्राह्मण सवर्ण व्यक्ति शामिल थे. और मृणाल पांडे की प्रशंसा चयनात्मक है साथ ही यह कई जटिल प्रश्नों की जवाब ढूंढती है.
आदित्यनाथ अपनी कट्टर छवि को छोड़ने का जोखिम उठा सकते हैं क्योंकि वो आलाकमान की दखलंदाजी से बहुत आगे बढ़ चुके हैं लेकिन देवेंद्र फडणवीस का अभी वहां पहुंचना बाकी है.
जिस दौर में भारत में मुगल शहंशाह और दूसरे राजा-महाराजा तलवार भांज रहे थे, शिकार कर रहे थे, मुजरा देख और सुन रहे थे और अपने लिए महल और मर चुके परिजनों के लिए मकबरे बना रहे थे, तब यूरोप पुनर्जागरण के बाद धर्म को शासन से अलग करने में जुटा था.
लोकसभा की सीटों का आज की जनसंख्या के अनुपात में पुनर्वितरण लोकतांत्रिक लिहाज से तर्कसंगत लग सकता है, लेकिन यह उत्तर दक्षिण की खाई को गहरा करेगा, भारत की संघीय एकता को कमजोर करेगा.
उपभोक्ताओं के आत्मविश्वास का मौजूदा स्तर, और भावी को लेकर उनकी अपेक्षाएं मार्च 2019 के स्तर के करीब नहीं पहुंच पाई हैं, उन्हें मार्च 2020 में कोविड के हमले से पहले के स्तर से काफी ऊपर जाना जरूरी है
भारत का कारवां ऐसे लाखों अति प्रतिभाशाली लोगों द्वारा खींचे जा रहे विशालकाय रथ की तरह गति पकड़ते हुए आगे बढ़ रहा है, जिन्हें तैयार करना हमारे पुराने श्रेष्ठ संस्थानों के बस में नहीं हो सकता था.
पूर्वोत्तर में सांप्रदायिक और बहुसंख्यकवादी तर्क लागू नहीं किए जा सकते. इसके लिए धर्मनिरपेक्ष और संवैधानिक शासन की आवश्यकता है, जो जातीय और जनजातीय हितों की रक्षा करता हो.
विकसित सेना के गठन के लिए 2047 को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा का एक स्पष्ट ‘विजन’, हर 5 साल में समीक्षा की जाने वाली राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति और एक ठोस नेशनल डिफेंस पॉलिसी की ज़रूरत है.