सीधी-सच्ची बात यह है कि उभरते देशों के लिए भारत द्वारा समर्थन किए जाने के मूल में, बीजिंग से आगे निकलने की इच्छा है. इसे नैतिक दावों की आड़ में छिपाना भी कम पाखंड नहीं है.
आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा में अंततः वाजपेयी युग के बचे हुए लोग नेताओं की एक नई पीढ़ी के लिए रास्ता बनाते दिखेंगे - वे लोग जिनके लिए सब कुछ पीएम मोदी और शाह ही होंगे.
निज़ामाबाद में एक रैली को संबोधित करते हुए, पीएम मोदी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर उनके जितनी आबादी, उतना हक नारे पर पलटवार करते हुए अपनी रणनीति का खुलासा किया.
इस बात में कोई संदेह नहीं है कि सामरिक रूप से कुशल IDF अगले कुछ दिनों में हमास की घुसपैठ को कुचलने में सफल हो जाएगा. लेकिन 1973 के युद्ध की तरह यह संकट भी 3 महत्वपूर्ण सबक सिखाता है.
इस संगठन की स्थापना केवल नुकसान हो जाने के बाद बयान जारी करने के लिए नहीं की गई थी. इसका चार्टर संप्रभु समानता, क्षेत्रीय अखंडता और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर आधारित है.