‘इंडिया’ ने कुछ बुनियादी बातों को समेटने की कोशिश की है लेकिन उसे यह साफ करना होगा कि मतदाता मोदी को हटाने के उसके लक्ष्य का समर्थन क्यों करें, और यह गठबंधन उनके लिए बेहतर दांव क्यों साबित हो सकता है.
BRICS को हमेशा पश्चिम को संतुलित करने के लिए स्थापित एक गुट के रूप में माना जाता था. लेकिन अर्जेंटीना, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई के जुड़ने के बाद खेल बिल्कुल बदल गया है.
ग्लोबल साउथ का विचार, जिसके मुताबिक भारत या इसके नेता, बाकी देशों के अगुआ बन सकते हैं. नरेंद्र मोदी इसके सबसे प्रमुख और ताकतवर ग्लोबल एम्बेसडर बनकर उभरे हैं.
पाकिस्तान के फैसलाबाद में हाल में हुई एक घटना, जहां भीड़ ने ईशनिंदा के आरोपों पर चर्चों और ईसाइयों के घरों को जला दिया, ने देश में अल्पसंख्यकों की दुर्दशा पर एक दर्दनाक मुद्दा उठाया है.
भले ही नए कानूनों ने आलोचना को जन्म दिया है, पर विश्लेषण से पता चलता है कि उनका अधिकांश कंटेंट औपनिवेशिक युग के कानून के समान है जिसे वे रिप्लेस करते हैं
यदि किसी भाजपा प्रधानमंत्री ने वही किया होता जो इंदिरा गांधी ने किया था, तो क्या लिबरल्स अपनी विरासत के प्रति इतने उदार होते? राजीव ने कभी भी उनकी आलोचना नहीं की, लेकिन उन्होंने व्यवस्था में उनके द्वारा शुरू किए गए कई दुरुपयोगों को ख़त्म कर दिया.
बीजिंग सऊदी अरब और इंडोनेशिया जैसे देशों को ब्रिक्स में शामिल करने का लक्ष्य बना रहा है, जो व्यापार और निवेश के चीनी विचारों के बारे में अपेक्षाकृत संशयवादी हैं.
देहरादून में सर्वे ऑफ इंडिया, शिमला में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज़ और कोलकाता में नेशनल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया एक साल से अधिक समय से बिना प्रमुख के हैं, लेकिन प्रशासनिक काम चलता रहता है.
दो मोर्चों युद्ध लड़ने में नुक़सानों से बचा जा सकता है बशर्ते राष्ट्रीय रणनीति और सैन्य कार्रवाई के स्तर पर कौशल का प्रयोग किया जाए. भारत अपनी रणनीतिक गहराई की वजह से चीन, पाकिस्तान से बेहतर स्थिति में है.