scorecardresearch
Sunday, 19 April, 2026
होमइंडियन लिबरल्स मैटर

इंडियन लिबरल्स मैटर

जब सरकार सबका कल्याण तय करती है, तब स्वतंत्रता और नागरिक भागीदारी कमजोर होती है—जी. जयचंद्रन

जीवन हमेशा एक दौड़ की तरह रहा है और रहेगा. लेकिन उस दौड़ में कोई आनंद नहीं, जिसमें पहले से ही निर्णायक यह तय कर दें कि सभी प्रतियोगी एक साथ लक्ष्य तक पहुंचेंगे.

मिशन लिबरटेरियनिज्म: मार्क्सवादी सामूहिकतावाद के बीच व्यक्तिवाद की नई चुनौती—एमए वेंकट राव

एमए वेंकट राव ने 1 अक्टूबर 1958 को लिखे इस लेख में मार्क्सवाद और राज्य विस्तार की आलोचना करते हुए व्यक्तिवादी स्वतंत्रता और आर्थिक संतुलन की वकालत की.

ट्रेड यूनियनों की शक्ति पर नियंत्रण के लिए कानूनी प्रावधान क्यों जरूरी हैं: एमएच मोदी

लेखक एमएच मोदी ने 1980 में लिखा था कि ब्यूरोक्रेट्स, पॉलिटिशियंस, बिज़नेसमैन और ट्रेड यूनियन बॉस के नए ग्रुप के बीच मिलीभगत कुछ हद तक शॉर्ट-टर्म फ़ायदों की वजह से और कुछ हद तक इसलिए बनी रहती है क्योंकि उन्हें सिस्टम से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं दिखता.

‘समाजवादी ढांचा’ और लोकतंत्र लंबे समय तक साथ नहीं चल सकते: मीनू मसानी

1989 में मीनू मसानी ने लिखा था कि ज़मीनी स्तर पर सतर्क लोकतंत्र के सबसे बड़े दुश्मन व्यक्तित्व पूजा, पार्टी के ‘हाई कमांड’ के प्रति अंधी वफादारी, चापलूसी और ऐसी नियंत्रित अर्थव्यवस्था हैं, जहां आर्थिक रूप से टिके रहने के लिए परमिट-लाइसेंस ज़रूरी शर्त बन जाता है.

बड़े पैमाने पर बेरोजगारी के लिए पूंजीवाद जिम्मेदार नहीं है, जापान और सिंगापुर को देखिए: बीएस अय्यर

1971 में बी.एस. अय्यर ने लिखा था कि लगातार बड़े पैमाने पर बेरोज़गारी की बुराइयों के लिए कैपिटलिज़्म ज़िम्मेदार नहीं है, बल्कि राजनेताओं की नीतियां ज़िम्मेदार हैं जो इसके काम को पंगु बना देती हैं.

कल्याणकारी राज्य देश के लिए सामाजिक और आर्थिक आपदा: जीएन लवांडे

जी.एन. लवांडे ने 1958 में लिखा था कि एक वेलफेयर स्टेट में, कानून के शासन को खराब कर दिया गया है और जनता की राय और संप्रभुता को मंत्रियों के अलोकतांत्रिक आदेशों से बदला जा रहा है.

मार्क्सवाद सत्ता में आते ही लोकतांत्रिक अधिकारों को खत्म कर देता है: एमए वेंकट राव

लिबर्टेरियन कमेंटेटर एमए वेंकट राव ने 1963 में लिखा था कि क्लास वॉर पर आधारित होने के कारण, मार्क्सवाद पर आधारित कोई भी राज्य खुद को दूसरे सभी देशों के खिलाफ, कड़े और पूरी तरह से विरोध में खड़ा कर लेगा.

मत-विमत

मोदी से कहां चूक हुई: भारतीय सैकड़ों नए सांसद नहीं चाहते

अगर सरकार टैक्सपेयर्स का पैसा देश को बेहतर बनाने में खर्च करना चाहती है, तो ज्यादा अदालतें बनाए, टूटती हुई नौकरशाही को सुधारे, लेकिन, ज़ाहिर है, नेता सिर्फ अपने बारे में सोचेंगे.

वीडियो

राजनीति

देश

भारतीय टैंकर ने होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित पार किया

नयी दिल्ली, 19 अप्रैल (भाषा) भारत के ध्वज वाले एक तेल के टैंकर ने होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित पार कर लिया। भारतीय टैंकर ने...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.