तीन कारकों—राजनीतिक समर्थन, कलेक्टर के कार्यालय का एक 'लिसनिंग पोस्ट' (सूचना केंद्र) के रूप में कार्य करना, और उग्रवाद-विरोधी अभियानों में हस्तक्षेप न करना—ने यह सुनिश्चित किया कि दंतेवाड़ा अभियान सफल रहा.
एक व्यक्ति की मौत की सज़ा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया है. शराब के नशे में धुत पिता ने अपनी ही बेटी का कम से कम 20 बार यौन उत्पीड़न किया, जिसके कारण वह गर्भवती हो गई.