पिछले कुछ वर्षों में, विशेष रूप से महामारी के बाद, वित्तीय बचत में बदलाव देखा गया है, क्योंकि अधिक से अधिक परिवार बैंक जमा जैसे पारंपरिक साधनों से दूर जा रहे हैं.
तीन कारकों—राजनीतिक समर्थन, कलेक्टर के कार्यालय का एक 'लिसनिंग पोस्ट' (सूचना केंद्र) के रूप में कार्य करना, और उग्रवाद-विरोधी अभियानों में हस्तक्षेप न करना—ने यह सुनिश्चित किया कि दंतेवाड़ा अभियान सफल रहा.