रूस-यूक्रेन युद्ध, वैश्विक मंदी की आशंका, और कुछ भारतीय कंपनियों के आईपीओ के निराशाजनक प्रदर्शन सहित कई कारणों से फंडिंग विंटर का दौर और ज्यादा लंबा खिंचता जा रहा है.
मौजूदा बाजार पूंजीकरण स्तरों पर, अगर सरकार सूचीबद्ध कंपनियों में हिस्सेदारी घटाकर 51% कर देती है, तो वह गैर-वित्तीय कंपनियों से 1.7 लाख करोड़ रुपये और वित्तीय कंपनियों से 1.8 लाख करोड़ रुपये कमा सकती है.
तीन कारकों—राजनीतिक समर्थन, कलेक्टर के कार्यालय का एक 'लिसनिंग पोस्ट' (सूचना केंद्र) के रूप में कार्य करना, और उग्रवाद-विरोधी अभियानों में हस्तक्षेप न करना—ने यह सुनिश्चित किया कि दंतेवाड़ा अभियान सफल रहा.