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Wednesday, 28 January, 2026
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वो पांच चीज़ें जो 2021 में तय करेंगी भारतीय अर्थव्यवस्था की दशा-दिशा

कोरोना महामारी के बाद अर्थव्यवस्था में सुधार उम्मीद से ज्यादा तेजी से हो रहा है लेकिन अगले महीने बजट पेश करने से पहले निम्नलिखित पांच मुद्दों पर ध्यान देना जरूरी है. 

मुश्किल भरे 2020 के बाद कैसे नए साल में भारतीय अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट सकती है

वित्त वर्ष 2021 में भारत की जीडीपी में सिकुड़न जारी रहने के ही अनुमान हैं लेकिन प्रतिबंधों में छूट, सप्लाई चेन की रुकावटों को दूर करने के उपायों से मांग में वृद्धि के साथ अर्थव्यवस्था में उछाल आने की उम्मीद की जा रही है. 

मोदी सरकार विकास वित्त संस्थाओं के गठन की योजना बना रही लेकिन पहले फंड का जरिया तलाशना जरूरी 

सरकार और रिजर्व बैंक की ओर से दिया गया रियायती ऋण पहले भी कोई टिकाऊ वित्तीय साधन नहीं साबित हुआ है, और वैसे भी भारत के बॉन्ड मार्केट अभी भी सुधारों का इंतजार कर रहा है.

आर्थिक वृद्धि के लिए इनफ्लेशन टारगेट में ढील हमेशा अच्छी नहीं होती, मोदी सरकार को सोच कर फैसला करना चाहिए

मुद्रास्फीति दर का लक्ष्य फिलहाल 4 प्रतिशत का रखा गया है, जिसमें 2 प्रतिशत का इधर-उधर हो सकता है, वैसे इसकी समीक्षा मार्च 2021 में होनी ही है लेकिन इस लक्ष्य को 5 साल के लिए बढ़ाना कोई अच्छी बात नहीं होगी.

भविष्य में किसानों के विरोध से कैसे बच सकती है मोदी सरकार, सुधार से पहले परामर्श बेहतर उपाय

परामर्श और भागीदारी की प्रक्रिया के ज़रिए बदलाव किए जाने पर लोग बगैर टकराव के नए विचारों के अभ्यस्त हो सकते हैं. बुरे प्रस्तावों को छोड़ा जा सकता है जबकि अच्छे को बेहतर बनाया जा सकता है.

ब्याज दर पर RBI की यथास्थिति अभी भारत के लिए सबसे अच्छी नीति क्यों है

दूसरी तिमाही के लिए जीडीपी के आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहे, लेकिन अब भी कोविड के मामले बढ़ने से विकास पर असर पड़ सकता है. लगातार आपूर्ति-पक्षीय मुद्रास्फीति भी एक समस्या है.

RBI और मोदी सरकार को सुधार के बिना बैंकिंग क्षेत्र में कॉर्पोरेट्स को नहीं आने देना चाहिए

हाल में कई बैंक जिस तरह फेल हुए हैं वे जाहिर करते हैं कि रिजर्व बैंक की निगरानी क्षमता को लेकर शंकाएं बेजा नहीं हैं, जिसकी एक मिसाल यह है कि रिजर्व बैंक ने खराब कर्जों की समस्या को पनपने दिया.

‘RCEP’ से भारत में आयातों की बाढ़ आ जाती, निर्यातों को बढ़ाने का एक ही रास्ता है— सुधार

अलग-थलग पड़ने की आशंका में भारत ‘आरसीईपी’ समझौते में शामिल नहीं हुआ, चीन-केंद्रित यह समझौता भारत के निर्यातों के लिए शायद ही फायदेमंद होता.    

10 क्षेत्रों के लिए प्रोडक्शन-लिंक्ड इन्सेंटिव मोदी सरकार की मंशा बताते हैं, लेकिन इसे अस्थायी ही रखने की जरूरत है

पीएलआई योजना भारत में विनिर्माण और निर्यात संभावनाओं को बढ़ाने के उद्देश्य से प्रोत्साहन के जरिये कंपनियों की तीव्र प्रगति पर केंद्रित है. लेकिन लंबे समय में इन क्षेत्रों को अपने हाल पर ही छोड़ देने की जरूरत है.

मनरेगा के शहरी संस्करण में दूर की सोच नहीं, मोदी सरकार ने इसे ठंडे बस्ते में डालकर समझदारी दिखाई है

शहरों में नहरों की खुदाई जैसे शारीरिक श्रम वाले कार्यों की गुंजाइश बहुत कम है. शहरी मनरेगा के लिए अपेक्षानुरूप रोज़गार प्रदान करना और बुनियादी सुविधाएं तैयार करना शायद संभव नहीं हो.

मत-विमत

केरल में BJP की उलझन—ईसाइयों को साधने की कोशिश कामयाब नहीं हो रही

जब वामपंथी दल आक्रामक तरीके से हिंदू वोटों में सेंध लगा रहे हैं, तो बीजेपी के लिए तुरंत फायदा अपने कोर वोट बैंक को मजबूत करने में हो सकता है, उससे पहले कि वह अपना दायरा और फैलाए.

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भारत की ताकत राष्ट्रीय एकता में निहित, विकास के लिए सामाजिक सद्भाव आवश्यक: उपराष्ट्रपति

नयी दिल्ली, 27 जनवरी (भाषा) उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने मंगलवार को जोर देकर कहा कि भारत की ताकत राष्ट्रीय एकता और समाज की...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.