जब महामारी ने भारतीय स्वास्थ्य प्रणाली की क्षमताओं से पूरी तरह से कसौटी पर कस दिया है, मोदी सरकार को स्वास्थ्य संबंधी वित्तीय जरूरतों और आर्थिक हालात की वास्तविकता के बीच एक अच्छा संतुलन बनाना पड़ सकता है.
पिछले महीने इसके नतीजों का एक प्री-प्रिंट जारी किया गया, जिससे पता चला कि ट्रायल में, वैक्सीन के तीनों फार्मूलों के नतीजे में मज़बूत इम्यून रेस्पॉन्स पैदा हुए.
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि 24 घंटे की अवधि में देश में आयोजित 4,049 सत्रों में 2,37,050 लोगों को टीके लगाये गये. अब तक कुल 18,167 सत्र आयोजित किए जा चुके हैं.
लोकलसर्कल्स द्वारा संचालित सर्वे में 17,000 लोगों ने भाग लिया. वैक्सीन को लेकर हिचिकचाहट के संबंध में प्रतिकूल प्रभावों और वैक्सीन की प्रभावशीलता पर शंकाएं भी ज़ाहिर की गयी.
कई संस्थान और विशेषज्ञ इसे एक प्रभावकारिता परीक्षण के तौर पर देखने की वकालत करते हैं जो टीकों के प्रति भरोसा बढ़ाने में मददगार होगा, खासकर भारत बायोटेक की कोवैक्सीन के लिए जो ट्रायल के तीसरे चरण में है.
महामारी की एक वर्ष की अवधि में सामने आए तमाम अहम वैज्ञानिक साक्ष्य इस तरफ इशारा करते हैं कि कोविड-19 का संक्रमण सतह को छूने की तुलना में हवा में मौजूद होने के कारण ज्यादा फैलता है.
सीमित स्टॉक और ज्यादा जोखिम वाले लोगों के तत्काल टीकाकरण की जरूरत जैसे कई फैक्टर काफी मायने रखते हैं जिससे वह स्थिति आने में वक्त लगेगा जब कोई भी अपने नजदीकी स्टोर से टीके की खुराक ले सकेगा.