जब वरिष्ठ नागरिकों और कोमोर्बिडिटी के शिकार 45 से 60 वर्ष की उम्र के लोगों को वैक्सीन लगेगी तो टीके लगने के बाद इसके प्रतिकूल असर का संभावित खतरा बढ़ सकता है.
कुछ ऐसे राज्य जिन पर बोझ ज़्यादा है, संचयी टीकाकरण के मामले में तो अच्छा कर रहे हैं, लेकिन प्रति दस लाख पर टीकों की संख्या, और ऊंचे मृत्यु अनुपात के मामलों में, वो निचली रेंज में हैं.
नेताओं की हत्या और भारी बमबारी, चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, हार और आत्मसमर्पण करवाने के लिए काफी नहीं हो सकती. इसके लिए लंबा और बहुत कठिन युद्ध लड़ना पड़ सकता है.