पिछले साल सीबीएसई ने घोषणा की थी कि 2022 के लिए बोर्ड परीक्षाएं दो चरणों में आयोजित की जाएंगी. प्रमुख विषयों के लिए टर्म-1 परीक्षा पिछले साल 30 नवंबर से 11 दिसंबर के बीच आयोजित की गई थी.
यूनिवर्सिटी/कॉलेजों की तरफ से आयोजित की जाने वाली नई परीक्षा नेट/जेआरएफ की पूरक होगी. पॉलिसी डॉक्यूमेंट में सिलेबस, क्वालीफाइंग मार्क्स, रिसर्च संबंधी गाइडलाइंस, सुपरवाइजर के कर्तव्यों आदि के बारे में बताया गया है.
यहां तक कि डिमांड और सप्लाई में एक बड़े अंतर की वजह से राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) में 90 पर्सेंटाइल में स्कोर करने वाले छात्रों को भी भारत में मेडिकल सीट मिल पाना सुनिश्चित नहीं हो सकता है.
यूजीसी ने प्रस्ताव दिया है कि इंजीनियरिंग, नीति, तथा संचार आदि क्षेत्रों में इंडस्ट्री एक्सपर्ट लाए जाएं, जो कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पूर्ण-कालिक और अंश-कालिक फैकल्टी सदस्यों के तौर पर पढ़ा सकें.
बोर्ड ने शुक्रवार को तिथि तालिका जारी करते हुए कहा कि दोनों परीक्षाओं के बीच इस बात को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त अंतर रखा गया है कि महामारी के कारण स्कूल बंद थे.
इस समय जब यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्र खुद को बचाने की गुहार लगा रहे हैं, भारत में तमाम लोग इस बहस में व्यस्त हैं कि पढ़ाई के लिए विदेश जाना उनकी प्राथमिकता क्यों है. आइये जानते हैं कि उनके लिए भारत पसंदीदा ‘जगह’ क्यों नहीं है.
रूस और चीन के अलावा यूक्रेन भारतीय मेडिकल छात्रों के लिए एक सबसे पसंदीदा स्थल रहा है. इन विकल्पों के बाहर हो जाने के बाद फिलहाल छात्रों का भविष्य अनिश्चित लगता है.
दीन दयाल उपाध्याय की हत्या और माधवराव सिंधिया के प्लेन क्रैश से लेकर गांधी परिवार की हत्याओं तक, राजनीति में जो कुछ भी होता है, उसका हिसाब-किताब से कम और किस्मत से ज़्यादा लेना-देना होता है.