Tuesday, 18 January, 2022
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SC का आरक्षण पर फैसला आने तक NEET-PG की काउंसलिंग नहीं होगी शुरू: केंद्र

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर काउंसलिंग प्रक्रिया तय समय के मुताबिक आगे बढ़ती है तो इससे छात्रों के लिए बड़ी समस्या पैदा हो जाएगी.

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नई दिल्ली: सोमवार को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया कि नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट-पीजी) की काउंसलिंग प्रक्रिया तब तक शुरू नहीं होगी जब तक सुप्रीम कोर्ट मौजूदा शैक्षणिक सत्र से पीजी ऑल इंडिया कोटा सीट में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 फीसदी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) कैटेगरी को 10 फीसदी आरक्षण देने से जुड़ी अधिसूचना को दी गई चुनौती के संबंध में फैसला नहीं कर लेती.

जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस बी वी नागरत्ना की बेंच ने केंद्र की तरफ़ से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एम के नटराज के इस आश्वासन को दर्ज किया और कहा कि अगर काउंसलिंग प्रक्रिया तय समय के मुताबिक आगे बढ़ती है तो इससे छात्रों के लिए बड़ी समस्या पैदा हो जाएगी.

कुछ नीट उम्मीदवारों की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा के महानिदेशक ने जिस शिड्यूल की घोषणा की है उसके मुताबिक नीट-पीजी के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया 25 अक्टूबर से शुरू होनी है. इसके बाद नटराज ने यह आश्वासन दिया.


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दातार ने कहा कि शैक्षणिक वर्ष से आरक्षण लागू करने से जुड़ी 29 जुलाई की अधिसूचना को चुनौती देने वाली लंबित याचिकाओं पर कोर्ट का फैसला आने तक दाखिला प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और इसका छात्रों पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा.

नटराज ने कहा कि याचिकाकर्ता के वकील जिस संवाद का जिक्र कर रहे हैं वो मेडिकल कॉलेजों में सिर्फ सीटों के वेरीफिकेशन के लिए भेजा गया था और सोमवार को एक और स्पष्टीकरण अधिसूचना जारी की गई है.

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एएसजी ने कहा, ‘काउंसलिंग प्रक्रिया लंबित याचिकाओं पर न्यायालय का फैसला आने तक शुरू नहीं होगी.’

बेंच ने शब्दों को रिकॉर्ड में रखते हुए कहा कि ‘हम आपके इन शब्दों को दर्ज कर रहे हैं कि याचिकाओं पर हमारा कोई फैसला आने तक काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू नहीं की जाएगी. आप जानते हैं कि अगर यह प्रक्रिया शुरू होती है तो छात्रों को गंभीर समस्या होगी.’

नटराज ने कोर्ट की इस टिप्पणी पर सहमति जताई और कहा कि अगर भविष्य में कोई समस्या होती है तो याचिकाकर्ता के वकील उनसे सीधे संपर्क कर सकते हैं.

कोर्ट ने 21 अक्टूबर को केंद्र सरकार से पूछा था कि क्या वह नीट या मेडिकल कोर्स में नामांकन के लिए आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के निर्धारण के लिए आठ लाख रुपए सालाना आय की सीमा तय करने पर पुनर्विचार करेगी.

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि वह नीति निर्धारण के क्षेत्र में दखल नहीं कर रही है बल्कि सिर्फ यह निर्धारित करने की कोशिश कर रही है कि क्या संवैधानिक मूल्यों का पालन किया गया है या नहीं.


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सुप्रीम कोर्ट ने सामाजिक न्याय, अधिकारिता मंत्रालय, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग से एक हफ्ते में अपने हलफनामे दाखिल करने को कहा था और केंद्र के लिए कुछ सवाल बनाए थे.

बेंच ने कहा, ‘हमें बताइए कि क्या आप मानक पर पुनर्विचार करना चाहते हैं या नहीं. अगर आप चाहते हैं कि हम अपना काम करें तो हम इसके लिए तैयार हैं. हम सवाल तैयार कर रहे हैं जिनका जवाब आपको देना है.’

अदालत ने आगे कहा कि ‘हम सरकार की अधिसूचना पर रोक लगा सकते हैं जिसमें ईडब्ल्यूएस निर्धारित करने के लिए आठ लाख रुपए का मानक तय किया गया है और आप हलफनामा दायर करते रहिएगा.’

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट उन कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है जिनमें केंद्र और मेडिकल काउंसिलिंग समिति (एमसीसी) की 29 जुलाई की अधिसूचना को चुनौती दी गई है. इस अधिसूचना के तहत मेडिकल कोर्स के लिए नीट में ओबीसी को 27 फीसदी और ईडब्ल्यूएस को 10 फीसदी आरक्षण दिया गया है.


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