छात्र बिहार एसएससी की सभी पाली की परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहे थे. छात्रों का कहना था कि दूसरी और तीसरी पाली के पेपर भी लीक हुए थे इसलिए परीक्षा को पूरी तरह से रद्द कर सबको मौका मिलना चाहिए.
केवी के कुल टीचिंग स्टाफ में संविदा शिक्षकों की संख्या 20% है, लेकिन स्थायी शिक्षकों को मिलने वाला वेतन डेढ़ से चार गुना तक अधिक है. यही वजह है देश के केवी स्कूलों में पढ़ाने वाले संविदा शिक्षक नाखुश हैं.
प्रभावित कॉलेजों में रामानुजन कॉलेज और राजधानी कॉलेज शामिल हैं. डीयू के रजिस्ट्रार विकास गुप्ता के मुताबिक, ये फंड सीधे यूजीसी जारी करता है. यूनिवर्सिटी का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है.
समिति ने स्कूलों में मीडिया और मनोरंजन स्टूडियो/प्रयोगशाला पर बल देते हुए इस क्षेत्र में प्रवेश के लिए एक विशेष प्रवेश परीक्षा आयोजित करने का भी सुझाव दिया.
बायजू के संस्थापक रवींद्रन को पाठ्यक्रमों की जानकारी के अलावा, फीस, छात्र संख्या, फीस वापसी नीति और अन्य प्रासंगिक कानूनी दस्तावेजों के ब्योरे के साथ शीर्ष बाल अधिकार निकाय के समक्ष पेश होने को कहा गया है.
कोविड की महामारी के दौरान आर्थिक रूप से प्रभावित हुए कई सारे अभिभावकों ने अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में स्थानांतरित कर दिया है, लेकिन लॉकडाउन के कारण हुए ‘सीखने के नुकसान की भरपाई के लिए, वे अब प्राइवेट ट्यूशन पर अधिक पैसे खर्च कर रहे हैं.
संसद के आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले तीन सालों से ब्रिटेन भारतीय छात्रों की पसंद बना हुआ है. पोस्ट-वर्क वीजा खोलना इसका एक बड़ा कारण है. जबकि कोविड और सख्त नियमों के चलते छात्रों ने अन्य देशों की तरफ कम ही रुख किया.
हैदराबाद का इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस 'कलेक्टिव फिलांथ्रोपी' के जरिए स्थापित पहला उच्च शिक्षा संस्थान था. बाद में, इसी तर्ज पर सोनीपत में अशोका, श्रीसिटी में क्रीया और मोहाली में प्लाक्षा यूनिवर्सिटी बनाई गईं हैं.
इस महीने ट्रांसजेंडर टीचर जेन कौशिक ने कहा कि यूपी के एक स्कूल ने उनकी लैंगिक पहचान के कारण उन्हें निकाल दिया. अन्य नॉन-जेंडर-कंफर्मिंग टीचर को भी संघर्ष करना पड़ता है.
गीता देशवाल नाम की शिक्षिका ने वंदना नाम की छात्रा पर पेपर कटर (कैंची) से हमला किया और फिर पहली मंजिल पर बनी क्लास से नीचे फेंक दिया. डॉक्टरों का कहना है कि बच्ची की हालत खतरे से बाहर है. पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है.
पंच का अपने प्लश टॉय से लगाव उसके देश से नहीं, बल्कि उससे मिलने वाले आराम से है. इसी तरह, ग्राहक जियोपॉलिटिकल लेबल से ज्यादा भरोसे और डिजाइन को प्राथमिकता देते हैं.