29 मई को जारी आदेश में विश्वविद्यालयों को विभिन्न स्रोतों से धन जुटाने और सरकारी धन पर निर्भरता कम करने को कहा गया था. इस कदम की राज्य के शिक्षण समुदाय ने आलोचना की थी.
12 जून को नेशनल मेडिकल कमीशन ने 25 साल बाद यूजी मेडिकल छात्रों के लिए नई गाइडलाइंस जारी की. इनका उद्देश्य अधिक 'शिक्षार्थी-केंद्रित, रोगी-केंद्रित और लिंग-संवेदनशील' होना है.
पाठ्यपुस्तक विकास समिति के सदस्यों के पत्र के जवाब में, एनसीईआरटी ने कहा कि समितियों का कार्य और कार्यकाल समाप्त हो गया है, शिक्षाविदों के नाम उनके योगदान की स्वीकृति मात्र है.
वी कामाकोटि ने कहा, आईआईटी मद्रास ने उन क्षेत्रों की पहचान की है जिनमें नए युग के पाठ्यक्रम भारत के विकास में सहायता करेंगे. उन्होंने आईआईटी में हाल ही में हुई आत्महत्याओं के बारे में भी बात की कि वे छात्रों की इससे निपटने में कैसे मदद कर रहे हैं.
डीयू इस साल से हिंदू स्टडीज में पोस्टग्रेजुएट और पीएचडी प्रोग्राम शुरू करने जा रहा है. बीएचयू एकमात्र अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालय है जहां इस तरह का कोर्स है.
सिलेबस में नए परिवर्तनों को ‘स्पष्ट रूप से पक्षपातपूर्ण’ कहते हुए, दोनों ने कहा कि उन्हें इस बारे में सूचित नहीं किया गया था. यादव और पलशिकर एनसीएफ के अनुसार, पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए 2005 में गठित पाठ्यपुस्तक विकास समिति का हिस्सा थे.
2018 में, आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज को सर्वश्रेष्ठ कॉलेजों के लिए NIRF की रैंकिंग में 14वां स्थान मिला था. 2023 में, कॉलेज डीयू के कुछ सबसे प्रसिद्ध कॉलेजों से आगे, नंबर 6 पर रहा.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 85% ड्रॉपआउट भारत के सिर्फ 11 राज्यों है. इन छात्रों की संख्या लगभग 30 लाख है. अपेक्षाकृत बेहतर पास प्रतिशत के बावजूद इन राज्यों में बंगाल और कर्नाटक शामिल हैं.
एनआईआरएफ इंजीनियरिंग रैंकिंग 2023 में, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मद्रास (आईआईटी मद्रास) ने पहला स्थान बरकरार रखा है इसके बाद आईआईटी-दिल्ली और आईआईटी-बॉम्बे ने लिस्ट में अपनी जगह बनाई है.
जब वामपंथी दल आक्रामक तरीके से हिंदू वोटों में सेंध लगा रहे हैं, तो बीजेपी के लिए तुरंत फायदा अपने कोर वोट बैंक को मजबूत करने में हो सकता है, उससे पहले कि वह अपना दायरा और फैलाए.