पैंगोंग झील के उत्तरी एवं दक्षिणी छोर से भारत और चीन के सैनिकों, अस्त्र-शस्त्रों तथा अन्य सैन्य उपकरणों को हटाए जाने की प्रक्रिया पूरी होने के दो दिन बाद कोर कमांडर स्तर की 10वें दौर की यह वार्ता हो रही है.
ले. जन. वाईके जोशी का कहना है, कि पीएलए फिंगर्स 4 और 8 के बीच से हटने को तैयार नहीं थी, लेकिन फिर कैलाश हाइट्स पर क़ब्ज़ा करके, भारत ने चीन को अपनी शर्तों पर बातचीत करने को मजबूर कर दिया.
भारतीय सेना की तरफ से जारी की गई नई तस्वीरों में चीनियों को अपने टेंट और शिविर हटाते और बड़ी संख्या में वाहनों को सैनिकों और सैन्य हथियारों को वापस ले जाते देखा जा सकता है.
इन असॉल्ट राइफलों का इस्तेमाल करने वाले विशेष बल और अन्य इन्हें पूर्व इजरायली सरकार की कंपनी इजरायल वेपंस इंडस्ट्री से आयात करते थे जिसका 2005 में निजीकरण हो गया था.
जनरल वी.पी. मलिक का कहना है कि झड़पों को रोकने के लिहाज से फिंगर 4 और 8 के बीच गश्त पर अस्थायी रोक खासी 'अहमियत' रखती है, और इसका यह मतलब कतई नहीं है कि यह क्षेत्र चीन के हवाले कर दिया गया है.
राजनीतिक नेतृत्व ने 1971 की तरह 2020 में भी सैन्य मामलों में दखल न देकर सही राजनीतिक निर्देश जारी किया, और रक्षा मंत्री ने सेना अध्यक्ष को सलाह दी कि 'जो उचित समझो वो करो.'