कवियों को मिलने वाले पारिश्रमिक की शुरुआत करने का श्रेय बच्चन को ही जाता है. उनका तर्क था कि जब हर किसी को मेहनताना मिलता है, तो कवि इससे पीछे क्यों रहे.
जो लोग ऑफिस में महिला मुद्दों पर लिबरल रहते हैं, वही लोग लड़कों के ग्रुप में लूज टॉक करते पाए जाते हैं. इनमें लड़कों के अलावा लड़कियां भी शामिल हो सकती हैं.
कमलेश्वर ने हिंदी साहित्य में रचनात्मकता लाने के लिए 'नई कहानी' जैसा आंदोलन चलाया और 1972 में उसी हिंदी साहित्य के पतन को देखते हुए समांतर कहानी आंदोलन की शुरुआत भी की.