राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पर्व-त्योहार या सर संघचालक द्वारा सालाना भाषण के समय अथवा अनेक शाखाओं के किसी समारोह के अवसर पर उपस्थित होनेवाले सभी सदस्यों को पूरी वरदी पहननी होती है.
उत्तर-पूर्व के सात राज्यों की बातें हिन्दी फिल्मों में कम हुई हैं. खासतौर से वहां की अशांति और हिंसा पर तो कायदे से कोई बात कभी हुई ही नहीं. बाकी भारत के लिए भी ये राज्य तस्वीरों में खूबसूरत और खबरों में डरावने मात्र ही रहे हैं.
दिप्रिंट ने पचास साल पहले बलात्कार की शिकार और आज भी न्याय का इंतजार कर रही मथुरा के बारे में पता लगाया. हालांकि, उसके मामले ने कानूनी सुधार की राह जरूर खोली थी.
कहानी यह है कि बरसों पहले मंजुलिका के भूत को एक कमरे में बंद कर के सारा परिवार कहीं और शिफ्ट हो गया. अब किसी वजह से ये लोग वापस उसी महल में रहने आए हैं तो ज़ाहिर है कि मंजुलिका भी छूटेगी और सब को डराएगी भी.
पंचायत के दूसरे सीजन को लेकर अलग-अलग रिव्यू भी आ गए हैं तो अब ठहर कर इस सीरीज के उन दो पहलुओं पर बात करना जरूर हो जाता है जिस पर अभी तक कोई चर्चा नहीं हुई. पहला 'बदलाव' और दूसरा 'भाषाई शैली'.
कारगिल युद्ध के बाद सेना ने वे सभी हथियार खरीद लिये हैं, जिनकी कमी कारगिल युद्ध के दौरान खली थी. अब तो भारत के पास राफेल भी आ गया है, जिससे हमारी वायु सेना की ताकत भी कई गुना बढ़ गई है.
फिल्म में ढेर सारे रंग-रंगीले लोग होने के बावजूद यह फिल्म भरी-पूरी नहीं है बल्कि ये लोग फिल्म में भीड़ और शोर बढ़ाने का ही काम करते हैं. किसी भी किरदार को यह फिल्म कायदे से उठा नहीं पाती.
अमित बगड़िया पिछले चार सालों में 12 किताबें लिख चुके हैं, जिनमें से चार बेस्ट सेलर साबित हुई हैं. काल्पनिक घटना पर आधारित उनका काल्पनिक घटना पर आधारित उनका यह पहला उपन्यास है, जिसकी 15,000 से अधिक प्रतियां मात्र डेढ़ साल में बिक चुकी हैं.
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण चुनाव जीतने की संभावना बढ़ाने के लिए किया गया लगता है, लेकिन एक बड़ा कानूनी सवाल है: क्या इससे उन पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है?