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Friday, 9 January, 2026
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समाज-संस्कृति

कारगिल युद्ध के बाद भारत ने खरीदे काफी हथियार, निजी कंपनियों के भी खोले दरवाजे

कारगिल युद्ध के बाद सेना ने वे सभी हथियार खरीद लिये हैं, जिनकी कमी कारगिल युद्ध के दौरान खली थी. अब तो भारत के पास राफेल भी आ गया है, जिससे हमारी वायु सेना की ताकत भी कई गुना बढ़ गई है.

नाम से जोरदार असल में बोर करती कन्या भ्रूण हत्या पर बनी कमजोर फिल्म है ‘जयेशभाई जोरदार’

फिल्म में ढेर सारे रंग-रंगीले लोग होने के बावजूद यह फिल्म भरी-पूरी नहीं है बल्कि ये लोग फिल्म में भीड़ और शोर बढ़ाने का ही काम करते हैं. किसी भी किरदार को यह फिल्म कायदे से उठा नहीं पाती.

‘POK भारत में वापस’ भारत-पाकिस्तान डिप्लोमेसी पर आधारित है उपन्यास

अमित बगड़िया पिछले चार सालों में 12 किताबें लिख चुके हैं, जिनमें से चार बेस्ट सेलर साबित हुई हैं. काल्पनिक घटना पर आधारित उनका काल्पनिक घटना पर आधारित उनका यह पहला उपन्यास है, जिसकी 15,000 से अधिक प्रतियां मात्र डेढ़ साल में बिक चुकी हैं.

मैरिटल रेप यानी जब पति ही बलात्कारी बन जाए

दुनिया के 150 देशों में वैवाहिक दुष्कर्म को कानूनन अपराध माना जाता है जिनमें अमेरिका, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस जैसे देश शामिल हैं जबकि भारत, पाकिस्तान, चीन जैसे 32 देशों में इसे अपराध नहीं माना जाता है.

चार्ल्स शोभराज से लेकर अफजल गुरु और सुनील बत्रा तक, जानें जेल के भीतर कैसी थी क़ैदियों की दुनिया

प्रभात प्रकाशन से छपी किताब ब्लैक वारेंट में जेल की दुनिया की हक़ीक़त को बड़ी ही साफ़गोई से बयां किया गया है. बिकनी किलर के नाम से मशहूर चार्ल्स शोभराज के रौब से लेकर निर्भया केस के मुख्य आरोपी की मौत तक. रंगा-बिल्ला से लेकर अफजल गुरू की फांसी की सच्चाई से होते हुए किताब फांसी की क्रूर प्रक्रिया को बड़े ही बेहतरीन तरीके से पाठकों तक पहुंचाती है.

‘मानवता के ऊपर देशभक्ति की जीत नहीं होने दूंगा’: टैगोर ने राष्ट्रवाद को क्रूर महामारी क्यों कहा था

टैगोर राष्ट्रवाद की आलोचना करने वाले 20वीं शताब्दी के सबसे प्रमुख व्यक्ति हैं. 1916-17 में जब वो जापान और अमेरिका में व्याख्यान दे रहे थे तो उन्होंने राष्ट्रवाद से उभरते खतरों को साफ तौर पर व्यक्त किया था.

दिल्ली विश्वविद्यालय के 100 साल: इबारत और इबादत की जगह को कट्टरता से बचाने की ज़रूरत

दिल्ली विश्वविद्यालय को अपने शताब्दी वर्ष में ठहर कर सबसे ज्यादा इस बात को सोचने की जरूरत है कि आने वाला वक्त विश्वविद्यालय को किस ओर ले जाएगा?

‘महंगाई मार गई’: ईंधन की क़ीमतों को लेकर केंद्र-राज्यों की खींचतान पर उर्दू प्रेस को याद आया हिट गाना

दिप्रिंट का जायज़ा कि उर्दू मीडिया ने पूरे हफ्ते की विभिन्न ख़बरों को किस तरह कवर किया, और उनमें से कुछ ने क्या संपादकीय रुख़ इख़्तियार किया.

‘भाजपा मेरी मां है, कोई बेटा अपनी मां से बड़ा नहीं हो सकता’: 2007 में मोदी ने ऐसा क्यों कहा था

भागवत ने ही आडवाणी को 2009 में आखिरी मौका देने की दलील दी थी, यानी अब भाजपा के लिए मिशन और विजन-2009 का आम चुनाव था, जिसकी तैयारी जोर-शोर से होने लगी.

‘अकेली लड़की की शिकायत पर नहीं होता ज्यादा यकीन’: बिहार के महिला थाने महिलाओं के लिए नहीं हैं

ग्रामीण बिहार में बहुत सी रेप पीड़िताओं को पुलिस थानों में उदासीनता, संदेह, यहां तक कि और अधिक अत्याचार का सामना करना पड़ता है. दिप्रिंट ने सूबे के बिल्कुल विपरीत छोर पर दो ऐसे ही मामलों का पता लगाया.

मत-विमत

शेख हसीना की तानाशाही को शह देने का खामियाजा भुगत रही है जातीय पार्टी

आलोचकों का कहना है कि जातीय पार्टी ने बांग्लादेश की उन चुनावी प्रक्रियाओं और सरकारी सत्ता को वैधता देने में मदद की, जिनकी विश्वसनीयता नहीं थी.

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राजनीति

देश

कर्नाटक के कारोबारी को ठाणे के होटलों में बंधक बनाकर रखा, बंदूक दिखाकर दो करोड़ रुपये लूटे

ठाणे, आठ जनवरी (भाषा) कर्नाटक के एक व्यवसायी की फर्म में निवेश का वादा करके उन्हें महाराष्ट्र के ठाणे जिले में बुलाने और उन्हें...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.