नई दिल्ली: यह कुछ दिनों की खुशी का समय होना था. कश्मीर परिवार के साथ घूमने के लिए एक लोकप्रिय जगह है. कर्नाटक के शिवमोग्गा के रहने वाले मंजुनाथ राव और पल्लवी के लिए कश्मीर की यह पहली यात्रा उनके बेटे अभिजान के 12वीं में 97 प्रतिशत अंक आने की खुशी मनाने के लिए थी.
टिकट बुक हो चुके थे, कपड़े खरीद लिए गए थे और बैग पैक थे. परिवार ने बर्फ से ढके कश्मीर में जश्न मनाने के लिए अपनी यात्रा की पूरी योजना बनाई थी.
19 अप्रैल 2025 को परिवार कश्मीर के लिए रवाना हुआ. उन्होंने अपनी यात्रा के वीडियो और फोटो बनाए और कुछ सोशल मीडिया पर डाले.
एक वीडियो में मंजुनाथ (47), जो रियल एस्टेट व्यवसायी थे, और पल्लवी शिकारा की सवारी, नाव की यात्रा और बोट हाउस में रहने के बारे में बात कर रहे थे. यह उनका आखिरी वीडियो साबित हुआ.
22 अप्रैल को उनकी खुशी अचानक खत्म हो गई, जब घाटी में नागरिकों पर हुए सबसे घातक आतंकी हमलों में से एक हुआ.
22 अप्रैल को पहलगाम के बैसारन मैदान में आतंकवादियों के एक समूह ने पर्यटकों पर हमला किया. इसमें 26 पर्यटक मारे गए. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने धर्म के आधार पर पुरुषों को अलग करके निशाना बनाया.
मंजुनाथ के चचेरे भाई डॉ. रवि किरण, जो शिवमोग्गा में डेंटिस्ट हैं, ने बताया, “मेरे भाई को गोली मारने के बाद आतंकवादी पल्लवी के पास आए. उसने उनसे कहा कि मुझे भी गोली मार दो. उनके बेटे ने भी कहा कि मुझे भी मार दो.”
किरण ने पल्लवी की बात याद करते हुए कहा, “आतंकवादियों ने हमें नहीं मारा. वे यह कहते हुए चले गए कि जाओ और मोदी से पूछो.”

पहलगाम में हमला
कश्मीर के कुछ हिस्सों में घूमने के बाद मंजुनाथ और उनका परिवार 22 अप्रैल को पहलगाम पहुंचे, उसी दिन हमला हुआ.
आतंकवादियों ने बैसारन मैदान में 25 भारतीय नागरिकों और एक नेपाली नागरिक को मार दिया और फिर जंगलों में भाग गए. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लोगों को उनके धर्म के आधार पर चुना गया और उनके परिवारों के सामने पास से गोली मारी गई.
रवि ने बताया कि उस दिन उनके पास सिर्फ एक ही सिम कार्ड काम कर रहा था और नेटवर्क खराब होने के कारण घर वाले मंजुनाथ से बात नहीं कर पा रहे थे.
मंजुनाथ ही उन्हें अपनी लोकेशन के बारे में बताते रहते थे.
हमले के समय पल्लवी परिवार से संपर्क नहीं कर पाईं. “पल्लवी और अभिजान को समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें और कहां जाएं. बहुत अफरा-तफरी थी,” रवि ने कहा. वे कुछ समय तक मंजुनाथ के शव के पास बैठे रहे.
“फिर पल्लवी ने किसी तरह मुझे फोन किया. उसने कहा कि कुछ लोग आए और सभी पुरुषों को मार दिया. ‘मैं क्या करूं?’ उसकी आवाज सुन्न थी. मैं भी घबरा गया,” किरण ने बताया.
बाद में मारे गए लोगों के शव अस्पताल ले जाए गए. मंजुनाथ का शव भी ले जाया जा रहा था और पल्लवी से कहा गया कि उसे दूसरे वाहन में ले जाया गया है. “उसने कहा कि वह मंजुनाथ के शव के साथ ही रहेगी और कहीं नहीं जाएगी,” रवि ने बताया.
हमले के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सऊदी अरब के दौरे पर थे और अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भारत में थे. लश्कर-ए-तैयबा के संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट ने इस हमले की जिम्मेदारी ली.

हमले के अगले दिन प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की बैठक हुई. बयान में कहा गया कि हमले में पाकिस्तान से जुड़े संबंधों के संकेत मिले हैं.
‘दुख में जी रहे हैं’
रवि ने कहा, “हम अभी तक इस घटना को स्वीकार नहीं कर पाए हैं. हर दिन हमें उनकी कमी महसूस होती है.”
किरण ने कहा कि मंजुनाथ बहुत खुशमिजाज इंसान थे. “वह सबको हंसाते थे और सबका ध्यान अपनी ओर खींचते थे. उनके साथ हर त्योहार हंसी-खुशी में बीतता था.”
लेकिन रवि कहते हैं कि उस दिन के बाद परिवार में सब कुछ रुक गया है. अब न कोई लंबी रातें हैं, न त्योहार और न ही मंजुनाथ हैं जो सबको हंसाएं.
“हमने त्योहार मनाना बंद कर दिया है. हम अभी भी इस दुख से उबर नहीं पाए हैं. पल्लवी टूट चुकी है. वह खुद को अधूरा महसूस करती है और रो भी नहीं पा रही है.”
“22 अप्रैल 2025 से लेकर अब 22 अप्रैल 2026 तक, हमारे परिवार ने सब कुछ खो दिया है. उम्मीद, ताकत, हिम्मत और सबसे जरूरी हमारे मंजुनाथ,” किरण ने कहा.
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