नई दिल्ली: दिल्ली एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 के बाहर पिक-अप एरिया में राजनीश कुमार अपने फोन पर कई राइड-हेलिंग ऐप एक साथ खोलकर अगली बुकिंग का इंतिजार करते हैं. इनमें भारत टैक्सी भी शामिल है, जो सरकार समर्थित पहली और फिलहाल इकलौती राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म है.
लेकिन ज्यादातर दिनों में उन्हें अगला ग्राहक भारत टैक्सी पर नहीं, बल्कि भारत की सबसे बड़ी निजी राइड-हेलिंग कंपनियों में से एक उबर पर मिलता है. कुमार ने दिप्रिंट से कहा, “मुझे उबर पर रोज करीब 15 राइड रिक्वेस्ट मिलती हैं, लेकिन भारत टैक्सी पर सिर्फ 2-3 राइड रिक्वेस्ट आती हैं.”
कुमार की तरह कई ड्राइवर जल्दी राइड पाने के लिए एक साथ कई प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं. कुमार ने फरवरी में लॉन्च होने के तुरंत बाद भारत टैक्सी पर रजिस्ट्रेशन करा लिया था, लेकिन आज भी उनकी रोज की कमाई का बड़ा हिस्सा उबर, ओला और रैपिडो जैसे निजी कैब एग्रीगेटर्स से आता है.
कुमार का अनुभव बताता है कि भारत टैक्सी के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है.

रजिस्ट्रेशन से राइड तक का सफर
अपने पहले पांच महीनों में इस प्लेटफॉर्म ने करीब 7 लाख ड्राइवरों को जोड़ा है, लेकिन इन रजिस्ट्रेशन को नियमित राइड में बदलना अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है.
सहकारिता मंत्रालय के सहयोग से भारत टैक्सी को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने फरवरी में निजी राइड-हेलिंग कंपनियों के सहकारी विकल्प के तौर पर लॉन्च किया था.
इसका मकसद ऐसा प्लेटफॉर्म बनाना था जहां ड्राइवरों को कैब एग्रीगेटर्स को भारी कमीशन न देना पड़े, उन्हें सीधे भुगतान मिले और आगे चलकर सहकारी संस्था के मुनाफे में हिस्सेदारी के जरिए वे इसके मालिक भी बन सकें.
शुरुआत में इसकी सेवाएं दिल्ली-एनसीआर में शुरू हुई थीं, लेकिन अब यह गुजरात के कुछ हिस्सों, मुंबई, लखनऊ और चंडीगढ़ तक फैल चुकी हैं. फिलहाल इसके करीब 7 लाख रजिस्टर्ड ड्राइवरों में से लगभग 60 प्रतिशत दिल्ली-एनसीआर और गुजरात से हैं.

दिप्रिंट ने करीब एक दर्जन ड्राइवरों से बात की. बातचीत में सामने आया कि भारत के राइड-हेलिंग बाजार में अब बहस सिर्फ कमीशन तक सीमित नहीं रही.
ड्राइवरों ने कहा कि वे अब भी निजी राइड-हेलिंग कंपनियों को प्राथमिकता देते हैं क्योंकि इन ऐप्स पर ज्यादा बुकिंग मिलती है, बेहतर इंसेंटिव मिलता है और रोज की कमाई ज्यादा भरोसेमंद रहती है.
पिछले कुछ वर्षों में भारत का राइड-हेलिंग बाजार भी काफी बदल गया है. ज्यादातर निजी कंपनियां अब कमीशन मॉडल छोड़कर सब्सक्रिप्शन मॉडल पर आ गई हैं, जहां ड्राइवर फीस देकर प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं.
ऐसे में भारत टैक्सी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब ड्राइवरों को जोड़ना नहीं, बल्कि उन्हें प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रखना और इतनी सवारी दिलाना है कि वे उसी पर निर्भर हो सकें.

ज्यादा राइड Vs ज्यादा किराया
ज्यादातर ड्राइवरों ने माना कि भारत टैक्सी अभी नया प्लेटफॉर्म है और उसे स्थिर होने और ग्राहक आधार बनाने में समय लगेगा. लेकिन उन्होंने कहा कि वे किस प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहेंगे, यह राइड की संख्या और कमाई पर निर्भर करता है.
दिल्ली एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 पर 45 वर्षीय ड्राइवर कपिल परदाल ने दिप्रिंट से कहा, “दिन के आखिर में हमें ज्यादा कमाई करनी होती है. इसलिए हम वही राइड या रूट चुनते हैं, जिससे सबसे ज्यादा पैसा मिले.”
भारत टैक्सी के जीरो कमीशन और कम सब्सक्रिप्शन फीस मॉडल के बावजूद ड्राइवरों का कहना है कि असली कमाई प्लेटफॉर्म चार्ज से ज्यादा किराए, इंसेंटिव और राइड की संख्या पर निर्भर करती है.
दिप्रिंट से बात करने वाले कई ड्राइवरों ने कहा कि सब्सक्रिप्शन फीस देने के बाद भी उन्हें निजी एग्रीगेटर्स पर आमतौर पर 14 से 18 रुपये प्रति किलोमीटर की कमाई होती है, जबकि भारत टैक्सी पर यह करीब 10 से 12 रुपये प्रति किलोमीटर रहती है.

दिल्ली के ड्राइवर सुधीर शर्मा, जो कई प्लेटफॉर्म पर काम करते हैं, ने कहा, “जैसे ही भारत टैक्सी बेहतर किराया और इंसेंटिव देने लगेगी, हम दूसरे प्लेटफॉर्म छोड़कर वहां चले जाएंगे. अभी सिर्फ राइड और किराया कम मिलने की दिक्कत है.”
राजकोट के ड्राइवर राहुल जांबूकिया, जिन्होंने दो हफ्ते पहले भारत टैक्सी पर रजिस्ट्रेशन कराया, ने कहा कि फिलहाल शहर में राइड कम हैं, लेकिन अभी इस सहकारी टैक्सी सेवा के बारे में राय बनाना जल्दबाजी होगी क्योंकि राज्य में इसका व्यावसायिक संचालन पिछले महीने ही शुरू हुआ है.
उन्होंने कहा, “अभी कैब की संख्या कम है, लेकिन जैसे-जैसे नेटवर्क बढ़ेगा, अगले एक-दो साल में बुकिंग भी बढ़नी चाहिए.”
आखिरकार, हम ज़्यादा कमाना चाहते हैं. इसलिए, हम वही राइड या रूट चुनते हैं जिससे हमें सबसे ज़्यादा पैसे मिलें.
— कपिल परदाल, दिल्ली एयरपोर्ट पर ड्राइवर
भारत टैक्सी के अधिकारियों का कहना है कि यह सेवा अभी शुरुआती दौर में है और इसकी तुलना पुराने निजी खिलाड़ियों से करना सही नहीं होगा.
भारत टैक्सी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर दिप्रिंट से कहा, “हम बाजार में कई निजी कंपनियों के मुकाबले नए हैं, जो कई सालों से काम कर रही हैं. हमें थोड़ा समय दीजिए, हमारी राइड की संख्या भी बढ़ जाएगी.”
हालांकि अधिकारी ड्राइवरों की कमाई के आकलन से सहमत नहीं थे. उनका कहना था कि भारत टैक्सी पर भी ड्राइवर आमतौर पर 14 से 16 रुपये प्रति किलोमीटर कमा लेते हैं.
उन्होंने कहा, “4 किलोमीटर की राइड का बेस किराया लगभग 100 रुपये है, यानी करीब 25 रुपये प्रति किलोमीटर. इसलिए लंबी दूरी की राइड में भी ड्राइवर की कमाई लगभग 14 से 16 रुपये प्रति किलोमीटर रहती है.”
लेकिन अधिकारियों ने यह भी माना कि ड्राइवरों की कमाई और यात्रियों के लिए किफायती किराए के बीच संतुलन बनाना भारत टैक्सी की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है.
कई प्राइवेट कंपनियों की तुलना में हम मार्केट में अभी नए हैं. हमें समय दें, हमारा वॉल्यूम भी बढ़ेगा.
— सीनियर अधिकारी, भारत टैक्सी
अधिकारी ने कहा, “यह मुर्गी पहले या अंडा जैसी स्थिति है. अगर हम किराया बढ़ा दें तो ग्राहक खुश नहीं होंगे, जबकि ड्राइवर खुश होंगे.”
उन्होंने कहा कि भारत टैक्सी का किराया तय करते समय यात्रियों और ड्राइवरों, दोनों के हितों का ध्यान रखा गया है.
सब्सक्रिप्शन आधारित मॉडल
पिछले कुछ वर्षों में भारत का राइड-हेलिंग बाजार कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच काफी बदल गया है. लंबे समय तक निजी कैब एग्रीगेटर्स द्वारा लिया जाने वाला कमीशन ड्राइवरों के बीच सबसे बड़ा मुद्दा था. लेकिन अब ज्यादातर बड़ी कंपनियां SaaS (सॉफ्टवेयर-एज-ए-सर्विस) सब्सक्रिप्शन मॉडल अपना चुकी हैं, जिससे ड्राइवर किराए का बड़ा हिस्सा अपने पास रख पाते हैं.
SaaS सब्सक्रिप्शन मॉडल में ड्राइवर प्लेटफॉर्म की तकनीक इस्तेमाल करने के लिए रोजाना या महीने का एक तय शुल्क देते हैं. उदाहरण के तौर पर, उबर चार पहिया वाहनों के लिए रोजाना पास के 139 रुपये और उस पर 18 प्रतिशत GST लेता है. इसके अलावा हर राइड पर मामूली शुल्क भी लिया जाता है. उबर कमाई के आधार पर कई दिनों वाले प्लान भी देता है.
रैपिडो भी सब्सक्रिप्शन मॉडल पर काम करता है. इसमें ड्राइवर अपनी कमाई के अलग-अलग स्लैब के हिसाब से प्लान खरीद सकते हैं.
वहीं, भारत टैक्सी दो विकल्प देती है. चार पहिया वाहनों के लिए 50 रुपये का रोजाना सब्सक्रिप्शन, जिसमें अनलिमिटेड राइड मिलती हैं, या फिर प्रति राइड 10 रुपये का शुल्क. तीन पहिया वाहनों के लिए प्रति राइड 5 रुपये का शुल्क है.
यह मुर्गी पहले या अंडा जैसी स्थिति है. अगर हम ज्यादा किराया लेंगे तो ग्राहक खुश नहीं होंगे, जबकि ज्यादा किराया मिलने पर ड्राइवर खुश होंगे.
— सीनियर अधिकारी, भारत टैक्सी
लेकिन ड्राइवरों का कहना है कि सिर्फ प्लेटफॉर्म शुल्क कम होना काफी नहीं है. उनके मुताबिक, भारत टैक्सी की कम सब्सक्रिप्शन फीस कम राइड और कम कमाई की भरपाई नहीं कर पाती. इसलिए ज्यादा प्लेटफॉर्म फीस होने के बावजूद पुराने प्लेटफॉर्म रोज की कमाई के लिए ज्यादा भरोसेमंद हैं.
दिप्रिंट के सवालों के जवाब में रैपिडो के प्रवक्ता ने भारत टैक्सी के आने को “लोगों के लिए उपलब्ध मोबिलिटी विकल्पों की दिशा में एक सकारात्मक कदम” बताया. उन्होंने कहा कि भारत टैक्सी का इसी तरह का सब्सक्रिप्शन मॉडल अपनाना इस बात को मजबूत करता है कि “सब्सक्रिप्शन आधारित मॉडल राइड-हेलिंग के भविष्य के लिए बेहद अहम हैं.”
दिप्रिंट ने ओला और उबर से भी ई-मेल और संदेश के जरिए प्रतिक्रिया मांगी, लेकिन खबर लिखे जाने तक उनका जवाब नहीं मिला था. जवाब मिलने पर रिपोर्ट अपडेट की जाएगी.

यात्रियों को जोड़ना अब भी बड़ी चुनौती
जहां ड्राइवर भारत टैक्सी को मिलने वाली राइड की संख्या के आधार पर आंकते हैं, वहीं यात्री इसे किराए के आधार पर देखते हैं. किराए को लेकर यात्रियों का अनुभव अलग-अलग रहा है. कुछ लोगों को यह दूसरे प्लेटफॉर्म से सस्ती लगी, जबकि कुछ का कहना है कि बुकिंग के समय के हिसाब से इसका किराया ज्यादा भी हो सकता है.
दिल्ली के रहने वाले प्राकल गुप्ता ने जून की एक दोपहर टर्मिनल-3 से भारत टैक्सी बुक की थी. उन्होंने कहा कि उन्हें इसका किराया उबर के मुकाबले करीब 15 प्रतिशत कम लगा.
इसी तरह अमृतसर की रहने वाली कनिषा ने भी उसी दिन दिल्ली एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 से भारत टैक्सी बुक की थी. उन्होंने कहा कि उबर और ओला का किराया भारत टैक्सी से करीब 10 से 15 प्रतिशत ज्यादा था.
लेकिन मुंबई की रहने वाली साक्षी मेहरा, जो बांद्रा की एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम करती हैं, का अनुभव अलग रहा. उन्होंने फोन पर दिप्रिंट को बताया कि कई बार भारत टैक्सी का किराया उबर के बराबर होता है, लेकिन मुंबई में मानसून और पीक ऑवर के दौरान यह काफी ज्यादा भी हो जाता है.
उन्होंने कहा, “ज्यादातर सुबह मेरे ऑफिस गोरेगांव जाने के लिए भारत टैक्सी का किराया उबर से करीब 20 से 30 प्रतिशत ज्यादा होता है.”
भारत टैक्सी के अधिकारियों ने कहा कि प्लेटफॉर्म पीक ऑवर में सर्ज प्राइसिंग नहीं करता, लेकिन अगर लंबे समय तक ट्रैफिक जाम रहे तो किराया बढ़ सकता है. अधिकारियों ने कहा कि अलग-अलग शहर, बुकिंग का समय और मंजिल के हिसाब से किराया बदलता है. इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि भारत टैक्सी हमेशा सस्ती है या हमेशा महंगी.
कई यात्रियों के लिए सिर्फ किराया ही मायने नहीं रखता. हरियाणा के रेवाड़ी के कारोबारी दीपक शर्मा ने कहा कि कैब की उपलब्धता और इंतजार का समय भी उतना ही महत्वपूर्ण है.
उन्होंने कहा, “मैंने भारत टैक्सी के बारे में सुना है, लेकिन अभी तक ऐप डाउनलोड नहीं किया क्योंकि मुझे अभी इसकी नेटवर्क और भरोसेमंद सेवा के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है. मैं ज्यादातर उबर का इस्तेमाल करता हूं क्योंकि उसकी सेवा पूरे भारत में उपलब्ध है.”
शर्मा ने कहा कि अगर भारत टैक्सी अच्छे डिस्काउंट दे और अपना नेटवर्क बढ़ाए तो वह इसका इस्तेमाल करने पर विचार करेंगे.
मैंने भारत टैक्सी के बारे में सुना तो है, लेकिन मैंने इसका ऐप डाउनलोड नहीं किया है क्योंकि मुझे अभी भी नहीं पता कि उनका नेटवर्क और भरोसेमंदता कैसी है.”
— ड्राइवर, हरियाणा
वॉलेट नहीं, इंसेंटिव भी कम
ज्यादा यात्रियों को जोड़ने के अलावा ड्राइवरों का कहना है कि भारत टैक्सी को अपनी तकनीक और ड्राइवर सपोर्ट सिस्टम भी मजबूत करना होगा. लगभग सभी ड्राइवरों की एक जैसी मांग थी कि इसमें डिजिटल वॉलेट की सुविधा शुरू की जाए. यह सुविधा सभी निजी राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म पर पहले से मौजूद है.
कपिल परदाल ने कहा, “अगर भारत टैक्सी एयरपोर्ट पर अपनी राइड बढ़ाना चाहती है तो उसे अपना वॉलेट शुरू करना होगा. वॉलेट से इंसेंटिव, पेमेंट और पार्किंग शुल्क अपने आप डेबिट और क्रेडिट हो जाते हैं.”
निजी प्लेटफॉर्म के विपरीत, भारत टैक्सी के ड्राइवर फिलहाल एयरपोर्ट पार्किंग जैसी लागत अपनी जेब से चुकाते हैं. उनका कहना है कि डिजिटल वॉलेट होने से पार्किंग शुल्क, टोल और इंसेंटिव ऐप के जरिए अपने आप एडजस्ट हो जाएंगे और नकद भुगतान की जरूरत कम होगी.
भारत टैक्सी के अधिकारियों ने कहा कि इस सुविधा पर काम चल रहा है.
अधिकारी ने कहा, “हमारी आधिकारिक शुरुआत को अभी कुछ ही महीने हुए हैं. हम बहुत जल्द भारत टैक्सी में डिजिटल वॉलेट लाने पर काम कर रहे हैं.”
ड्राइवरों ने यह भी कहा कि भारत टैक्सी को ज्यादा प्रतिस्पर्धी इंसेंटिव देने होंगे, क्योंकि दूसरी कंपनियां आज भी इंसेंटिव के जरिए ड्राइवरों को जोड़कर रखती हैं.
सुधीर शर्मा के मुताबिक, उबर वीकेंड पर 8 राइड पूरी करने पर 250 रुपये और 12 राइड पूरी करने पर 500 रुपये तक इंसेंटिव देता है. उन्होंने कहा कि रैपिडो और ओला भी दिन में तय संख्या में राइड पूरी करने पर ड्राइवरों को इनाम देते हैं.
दिल्ली एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 पर ड्राइवर मुकेश कुमार ने कहा कि शुरुआत में भारत टैक्सी हर राइड पर 100 रुपये इंसेंटिव देती थी. इससे कई ड्राइवर ज्यादा बुकिंग लेने लगे थे. लेकिन यह योजना सिर्फ दो महीने चली.
मुकेश कुमार ने कहा, “फिलहाल भारत टैक्सी इंसेंटिव के तौर पर मुफ्त आटा, चावल और दाल दे रही है, लेकिन हमें नकद इंसेंटिव चाहिए. ये सामान तो हम खुद भी खरीद सकते हैं.”
योग्य ड्राइवर अमूल के रिटेल आउटलेट से ये सामान ले सकते हैं.
भारत टैक्सी के अधिकारियों ने माना कि इंसेंटिव से राइड की संख्या बढ़ती है और ड्राइवर जुड़े रहते हैं, लेकिन उनका कहना है कि लंबे समय तक यह आर्थिक रूप से संभव नहीं है.
अधिकारी ने कहा, “ये इंसेंटिव हमेशा के लिए नहीं होते. इनका मकसद सिर्फ ड्राइवरों को आकर्षित करना होता है.”
उन्होंने कहा कि निजी कंपनियां ज्यादा राइड पाने और प्रतिस्पर्धा खत्म करने के लिए लगातार पैसा खर्च कर रही हैं, लेकिन सहकारी मॉडल ऐसी रणनीति नहीं अपनाएगा.
आगे की राह
भारत टैक्सी, सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड के तहत काम करती है. यह एक बहु-राज्य सहकारी संस्था है, जिसकी स्थापना जून 2025 में 300 करोड़ रुपये की अधिकृत शेयर पूंजी के साथ हुई थी.
जीरो कमीशन मॉडल के अलावा, भारत टैक्सी ड्राइवरों को IFFCO-Tokio के जरिए 5 लाख रुपये का बीमा कवर भी देती है. साथ ही, ड्राइवर 100 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से अधिकतम पांच शेयर खरीदकर सहकारी संस्था के सदस्य भी बन सकते हैं.
पहले तीन वर्षों में सहकारी संस्था का ध्यान विस्तार पर रहेगा. इसके बाद वह अपने मुनाफे का 20 प्रतिशत संचालन और भविष्य के विस्तार के लिए रखेगी, जबकि बाकी 80 प्रतिशत अपने सदस्यों में बांटेगी.
हालांकि, कई ड्राइवर इन फायदों से परिचित नहीं हैं.
कपिल परदाल ने कहा, “करीब 90 प्रतिशत ड्राइवर ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं, इसलिए उन्हें इन बातों की जानकारी नहीं है. जरूरी है कि उन्हें इन फायदों के बारे में बताया जाए.”
उन्होंने कहा कि ड्राइवर फिलहाल सरकारी ई-श्रम पोर्टल पर मिलने वाली कल्याण योजनाओं और स्वास्थ्य सुविधाओं पर ज्यादा भरोसा करते हैं.
भारत टैक्सी के अधिकारियों ने भी माना कि बीमा कवर और सहकारी स्वामित्व मॉडल के बारे में जागरूकता अभी सीमित है और इसे बढ़ाने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं.
अधिकारी ने कहा, “हम ‘सारथियों’ यानी ड्राइवरों को सहकारी मॉडल के फायदों के बारे में जागरूक करने के लिए अभियान चला रहे हैं.”
इन्हीं कोशिशों के साथ भारत टैक्सी वित्त वर्ष 2027 में 100 शहरों और कस्बों तक पहुंचने की योजना बना रही है. इसकी शुरुआत रांची, पटना, भुवनेश्वर और गुवाहाटी से होगी. इसके बाद भोपाल, इंदौर, नागपुर और कोलकाता में विस्तार किया जाएगा.
सहकारी संस्था दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर दिल्ली एयरपोर्ट के तीनों टर्मिनलों पर प्रीपेड “काली-पीली” टैक्सी सेवा भी चला रही है. इसी तरह की सेवा मुंबई एयरपोर्ट पर भी शुरू करने की योजना है.
भारत टैक्सी ने लाखों ड्राइवरों को जोड़कर अच्छी शुरुआत की है. लेकिन इसकी लंबी अवधि की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह कितना मजबूत ग्राहक आधार बना पाती है और ड्राइवरों को नियमित राइड दिला पाती है. जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक ड्राइवर यह तय करेंगे कि वे कहां काम करेंगे, और इसका आधार सहकारी मॉडल नहीं बल्कि राइड की संख्या और कमाई होगी.
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