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Sunday, 12 July, 2026
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US कार्रवाई के बाद बेअंत सिंह के हत्यारे से जुड़ा बिश्नोई लिंक चर्चा में, गैंगस्टर-BKI गठजोड़ पर फोकस

कुछ दिन पहले, अमेरिकी अधिकारियों ने लॉरेंस बिश्नोई सिंडिकेट के सदस्यों पर आरोप तय किए, जबकि FBI की छापेमारी की तस्वीरों में ‘खालिस्तान का झंडा’ दिखने से गैंगस्टर्स के प्रतिबंधित BKI के साथ संबंधों की जांच फिर से तेज हो गई है.

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नई दिल्ली: अमेरिका में जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के संगठित अपराध सिंडिकेट पर कार्रवाई और उसके खिलाफ आरोप तय किए जाने के कुछ दिन बाद, उसकी एक तस्वीर सामने आई है जिसमें वह सिख अलगाववादी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) के सदस्य बलवंत सिंह राजोआना के साथ दिखाई दे रहा है. राजोआना को 1995 में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या में भूमिका के लिए दोषी ठहराया गया था.

X पर वायरल हो रही इस तस्वीर के साथ-साथ, अमेरिकी मामले में आरोपित एक आरोपी के कैलिफोर्निया स्थित घर के बाहर खालिस्तानी झंडे वाली तस्वीर, जो फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) की छापेमारी के दौरान ली गई थी, ने एक बार फिर सिख अलगाववादी संगठनों और अमेरिका, कनाडा समेत कई देशों में सक्रिय अंतरराष्ट्रीय गैंगस्टर नेटवर्क के बीच संबंधों पर ध्यान खींचा है.

BKI एक उग्र अलगाववादी संगठन है, जिसका मकसद खालिस्तान नाम का एक स्वतंत्र सिख देश बनाना है. इसकी स्थापना 1978 में हुई थी. भारत समेत कई देशों ने इसे आतंकवादी संगठन घोषित किया है.

पंजाब पुलिस के एक अधिकारी ने दिप्रिंट से कहा, “बिश्नोई 2015 से अलग-अलग राज्यों की जेलों से इस सिंडिकेट को चला रहा है. उसने अपना नेटवर्क बढ़ाने के लिए BKI समेत कई गैंग के लोगों से संपर्क किया. कई सालों से यह गठजोड़ दोनों के लिए फायदेमंद रहा है, जब तक उनके निशाने एक जैसे रहे.”

अधिकारी ने कहा कि अपराध सिंडिकेट और BKI के बीच संबंध स्थापित हो चुके हैं.

BKI के प्रमुख सदस्यों में शामिल राजोआना ने पहले पुलिस से कहा था कि बेअंत सिंह की हत्या पंजाब में “बेगुनाह सिखों पर हुए अत्याचारों” का बदला लेने के लिए की गई थी.

पुलिस अधिकारी ने कहा, “BKI सिख अलगाववाद की बात करता है, लेकिन यह समझना जरूरी है कि बिश्नोई गैंग और BKI की विचारधारा एक जैसी हो, यह जरूरी नहीं है. हालांकि, दोनों पर गंभीर अपराधों के आरोप हैं और दोनों की फंडिंग भी आपस में जुड़ी हुई है.”

उन्होंने आगे कहा, “बिश्नोई सिंडिकेट का खालिस्तान समर्थक तत्वों से जुड़ाव इसलिए हुआ क्योंकि उनका नेटवर्क कई भारतीय राज्यों में फैला हुआ था, उनके पास आसानी से शूटर उपलब्ध थे और पैसों की भी कमी नहीं थी.”

पंजाब के अलगाववादी आंदोलन में जाना-पहचाना नाम रहे राजोआना के साथ बिश्नोई की तस्वीर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर नाराजगी देखने को मिली.

कनाडा में रहने वाले लेखक कुशल मेहरा, जिन्हें पंजाब की अच्छी समझ है, ने अमेरिकी सरकार की कार्रवाई और खालिस्तानी झंडे वाली तस्वीर पर बात की.

उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “आज कोई भी खालिस्तान का सच्चा मानने वाला नहीं है. और यह अलगाववाद भी नहीं है. 1980 के दशक के मुकाबले इसकी विचारधारा पूरी तरह बदल चुकी है. यह नहीं भूलना चाहिए कि बिश्नोई एक गैंगस्टर है और खालिस्तान हमेशा से गैंग का आंदोलन रहा है.”

उन्होंने अलगाववाद से बिश्नोई के जुड़ाव को “कॉसप्ले करने जैसा” बताया.

उन्होंने कहा, “यह तथाकथित आंदोलन अब ड्रग्स नेटवर्क में बदल चुका है और खालिस्तान के नाम का इस्तेमाल नेटवर्क खड़ा करने के लिए किया जा रहा है. बिश्नोई एक आम गैंगस्टर है और खालिस्तान सिर्फ पीड़ित होने का नैरेटिव बनाने का जरिया है, बस.”

मेहरा ने कहा, “बिश्नोई इस विचारधारा का मानने वाला नहीं है. वह सिर्फ इसका इस्तेमाल कर रहा है.”

पुलिसकर्मी से आतंकी बनने तक

CBI की विशेष अदालत के आदेश के मुताबिक, राजोआना 1987 में पंजाब पुलिस में भर्ती हुआ था और 1993 में पटियाला के एक पत्रकार की सुरक्षा में तैनात किया गया था. उसका नाम लुधियाना के पास स्थित उसके गांव राजोआना के नाम पर पड़ा. माना जाता है कि 1990 के दशक में, जब पंजाब सिख उग्रवाद से जूझ रहा था, तब वह BKI से जुड़ गया.

अदालत के दस्तावेज के मुताबिक, जून 1995 में बेअंत सिंह की हत्या मानव बम के जरिए करने की योजना बनाई गई थी. इसके मास्टरमाइंड BKI प्रमुख जगतार सिंह हवारा और उसके सहयोगी जगतार सिंह तारा थे. उन्होंने बर्खास्त पुलिसकर्मी दिलावर सिंह और उस समय के कांस्टेबल राजोआना को मानव बम चुना था. दस्तावेज के अनुसार, अगर दिलावर सिंह नाकाम रहता तो राजोआना “बैकअप” मानव बम था.

31 अगस्त 1995 को जब बेअंत सिंह दिन का काम खत्म कर अपने कार्यालय से निकल रहे थे और उनका काफिला चंडीगढ़ सचिवालय परिसर में खड़ा था, तभी दिलावर सिंह ने खुद को विस्फोट से उड़ा लिया. इस धमाके में मुख्यमंत्री समेत 16 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. शक्तिशाली RDX विस्फोट में कम से कम 15 लोग घायल भी हुए.

अदालत के आदेश में अभियोजन पक्ष ने कहा कि “बेअंत सिंह की हत्या बब्बर खालसा इंटरनेशनल द्वारा रची गई गहरी आपराधिक साजिश के तहत की गई, क्योंकि संगठन का मानना था कि 1992 के चुनाव के बाद पंजाब में सत्ता में आने वाले बेअंत सिंह निर्दोष सिखों पर अंधाधुंध अत्याचारों के जिम्मेदार थे.”

भारत ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) संशोधन अधिनियम, 2004 के तहत BKI को आतंकवादी संगठन घोषित कर प्रतिबंधित किया है. कनाडा सरकार भी BKI को सिख आतंकवादी संगठन मानती है, जिसका उद्देश्य भारत के पंजाब राज्य में खालिस्तान (लैंड ऑफ द प्योर) नाम का एक कट्टरपंथी स्वतंत्र सिख देश बनाना है.

BKI की गतिविधियों में हथियारबंद हमले, हत्याएं और बम धमाके शामिल हैं. संगठन के सदस्य भारत के अलावा पाकिस्तान, उत्तरी अमेरिका, यूरोप और स्कैंडिनेविया में भी मौजूद हैं. कनाडा की पब्लिक सेफ्टी लिस्टिंग के मुताबिक, हाल के वर्षों में भारतीय पुलिस ने BKI से जुड़े लोगों को गिरफ्तार किया है, उनके पास से अवैध हथियार और गोला-बारूद बरामद किया है, और उन नार्को-तस्करों की साजिशें भी नाकाम की हैं जो BKI के लिए हथियार जुटाने या उसके ऑपरेटिव्स तक पैसे पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे.

गैंगस्टर और अलगाववादी

संगठित गैंग और सिख अलगाववादी संगठनों के बीच संबंध पहले से दर्ज और स्थापित हैं.

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मार्च 2023 में बिश्नोई और उसके करीबी सहयोगी गोल्डी बराड़ के खिलाफ दाखिल चार्जशीट में BKI से उनके संबंधों का आरोप लगाया था.

NIA ने कहा था कि “उगाही से कमाए गए पैसों का एक बड़ा हिस्सा कनाडा, अमेरिका, दुबई और ऑस्ट्रेलिया भेजा जाता है, जहां मौजूद उनके सहयोगियों और परिवार के लोगों के जरिए खालिस्तान समर्थक चरमपंथियों को फंडिंग की जाती है.”

अमेरिकी आरोपपत्र के मुताबिक, सिंडिकेट के उत्तरी अमेरिका नेटवर्क का प्रमुख गोल्डी बराड़ भी लंबे समय से BKI से जुड़ा रहा है. उसके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं, जिनमें पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या और 2015 के बेअदबी मामले के आरोपी प्रदीप कुमार की फरीदकोट में हत्या शामिल है.

मार्च 2023 की चार्जशीट में NIA ने यह भी आरोप लगाया था कि बिश्नोई सिंडिकेट ने BKI आतंकियों को शूटर और लॉजिस्टिक मदद मुहैया कराई थी, जिसमें 2022 का मोहाली RPG हमला भी शामिल है. एजेंसी के मुताबिक यह हमला पाकिस्तान में बैठे BKI सदस्य हरविंदर सिंह उर्फ रिंदा के निर्देश पर किया गया था. रिंदा की 2022 में मौत हो गई थी.

NIA की अब तक की जांच में यह भी सामने आया कि बराड़ के कनाडा में बैठे BKI ऑपरेटिव लखबीर सिंह उर्फ लांडा से सीधे संबंध थे, जो रिंदा के साथ मिलकर काम करता था.

पंजाब पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, बिश्नोई और बराड़ के BKI से जुड़े लोगों के साथ करीबी संबंध हैं, जिन्हें पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) का समर्थन प्राप्त है.

BKI का नाम 1985 में एयर इंडिया फ्लाइट 182 बम धमाके से भी जुड़ा है, जिसमें विमान में सवार सभी 329 लोगों की मौत हो गई थी.

पहले उद्धृत पुलिस अधिकारी ने कहा, “भारतीय सुरक्षा एजेंसियां और राज्य पुलिस इस गठजोड़ को पहले ही स्थापित कर चुकी हैं, लेकिन आधिकारिक स्तर पर इसे साबित करने में समय लगेगा. हमने पहले ही पता लगा लिया था कि ये सिंडिकेट सिर्फ भारत या कनाडा के सरे और टोरंटो जैसे शहरों तक सीमित नहीं हैं. इसके वैश्विक असर हैं और इससे निपटने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के बीच सहयोग जरूरी है.”

उन्होंने कहा, “पहले कनाडा तब जागा जब अलग-अलग जिलों में हिंसा हुई और अब अमेरिका भी जाग गया है. यह एक महत्वपूर्ण कदम है.”

जब FBI ने बिश्नोई और उसके साथियों के अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट के सदस्यों पर कार्रवाई की, तब फ्रीलांस फोटोग्राफर जोश एडेलसन की ली गई एक तस्वीर में कैलिफोर्निया के स्टॉकटन स्थित एक घर के बाहर FBI अधिकारी और ड्रोन दिखाई दिए. उस घर पर नीले और पीले रंग का खालिस्तान का झंडा लगा हुआ था.

अमेरिकी आरोपपत्र के मुताबिक, यह घर कैलिफोर्निया के स्टॉकटन निवासी गुरलाल सिंह का है, जिसे भारत में कैद बिश्नोई के कभी सहयोगी और बाद में प्रतिद्वंद्वी बने जग्गू भगवानपुरिया का करीबी बताया गया है. गुरलाल पर भी आरोप तय किए गए हैं.

आरोपपत्र के मुताबिक, स्टॉकटन निवासी गुरलाल ने लॉस एंजिलिस के एक परिवार से 4 लाख डॉलर की रंगदारी मांगी थी. जब परिवार ने पैसे देने से इनकार कर दिया, तो उसने पंजाब पुलिस के भ्रष्ट अधिकारियों को पीड़ित का नाम देकर उसके रिश्तेदारों का पता लगाने और उन्हें हत्या के एक मामले में फंसाने के लिए कहा.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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