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Thursday, 28 May, 2026
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बंगाल के हाकिमपुर बॉर्डर पर 150 बांग्लादेशियों की जांच, 60 वापस भेजे गए, 90 पुलिस को सौंपे गए: BSF डेटा

जो लोग खुद को ‘बांग्लादेशी नागरिक’ बताकर बांग्लादेश जाना चाहते हैं, उन्हें पहले चेकपोस्ट पर अपनी जानकारी देनी होती है और बायोमेट्रिक रिकॉर्ड कराना होता है, बीएसएफ अधिकारी ने कहा।

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नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बसीरहाट सबडिवीजन में हाकिमपुर आउटपोस्ट पर कथित तौर पर कई बांग्लादेशी नागरिकों की लाइन लगी होने वाले वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के एक दिन बाद, बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) के डेटा में सामने आया कि मंगलवार को वहां 150 लोगों की जांच की गई. इनमें से 60 लोगों को ‘वापस भेज दिया गया’ और 90 लोगों को पुलिस के हवाले कर दिया गया.

पश्चिम बंगाल सरकार की नई ‘पहचान करो, हटाओ और निर्वासित करो’ नीति और जिला स्तर पर होल्डिंग सेंटर बनाए जाने के बाद, बड़ी संख्या में बिना दस्तावेज वाले लोग इस बॉर्डर क्रॉसिंग पर इकट्ठा हो रहे हैं ताकि वे बांग्लादेश वापस जा सकें. 

मंगलवार शाम सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें कथित तौर पर बांग्लादेशी नागरिक चेकपोस्ट के पास अपने सामान के साथ समूह में खड़े दिखे. एक वीडियो में एक महिला कंधे पर कपड़े का बैग लिए दिखी, जबकि एक आदमी सामान संभालते हुए गोद में बच्चा लिए नजर आया. बुधवार को भी कई लोगों को आउटपोस्ट के पास जमा देखा गया.

इन वीडियो में, जिनकी दिप्रिंट स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका, लोगों ने दावा किया कि वे रोजगार की तलाश में बांग्लादेश से आए थे और भारत के अलग-अलग हिस्सों में मजदूर और सफाई कर्मचारी के तौर पर रह रहे थे. 

इन वायरल वीडियो के बाद दिप्रिंट को बीएसएफ का डेटा मिला, जिसमें बताया गया कि सिर्फ मंगलवार को 150 लोगों की जांच हुई. एक अधिकारी ने कहा, ‘इन 150 लोगों में से 60 को वापस भेज दिया गया और 90 लोगों को स्थानीय पुलिस के हवाले किया गया.’ अधिकारी ने बताया कि ‘वापस’ भेजे गए 60 लोगों को रात में पड़ोसी देश भेजा गया.

अधिकारी ने कहा, ‘अगर उनके पास यह दिखाने वाले कागज हैं कि वे बांग्लादेश से हैं, तो हमें उन्हें भारत की सीमा से बाहर भेजने का निर्देश दिया गया है.’

एक सरकारी अधिकारी के मुताबिक, जो विदेशी नागरिक अवैध तरीके से भारत में दाखिल होते हैं, उन्हें बीएसएफ को सौंपा जाता है. इसके बाद बीएसएफ पड़ोसी देश की बॉर्डर एजेंसी, यानी बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी), से संपर्क कर आगे की प्रक्रिया करती है.

जो लोग खुद को ‘बांग्लादेशी नागरिक’ बताकर बांग्लादेश जाना चाहते हैं, उन्हें पहले चेकपोस्ट पर मौजूद स्थानीय पुलिस को अपनी पूरी जानकारी देनी होती है.

बीएसएफ अधिकारी ने कहा, ‘सबसे पहले लोगों को बताना होता है कि वे बांग्लादेश में कहां से हैं. फिर भारत में कहां रह रहे थे, इसकी जानकारी देनी होती है. इसके बाद बीएसएफ उनके दस्तावेज जांचती है और बायोमेट्रिक रिकॉर्ड करती है. अगर बायोमेट्रिक किसी आपराधिक मामले से जुड़ा मिलता है या अधिकारियों को कुछ संदिग्ध लगता है, तो उन्हें स्थानीय पुलिस के हवाले कर दिया जाता है.’

उन्होंने कहा, ;अगर बायोमेट्रिक किसी चल रहे आपराधिक मामले से मैच करता है, तो उन्हें स्थानीय पुलिस को सौंप दिया जाता है.’

अधिकारी के मुताबिक, हाकिमपुर आउटपोस्ट पर बड़ी संख्या में ‘अवैध प्रवासियों’ की भीड़ इसकी भौगोलिक स्थिति की वजह से है. उन्होंने कहा, ‘यह आउटपोस्ट ऐसे बॉर्डर इलाके में है जहां अभी फेंसिंग नहीं हुई है. यह नदी वाला इलाका है जहां बहुत कम रोशनी रहती है, इसलिए बॉर्डर फोर्स के लिए उन्हें पकड़ना मुश्किल हो जाता है.’

पश्चिम बंगाल-बांग्लादेश सीमा के पास चेकपोस्ट पर लोगों की लाइन लगना कोई नई बात नहीं है. लेकिन यह आवाजाही तब बढ़ गई जब पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने अधिकारियों को नई नीति के तहत अवैध प्रवासियों की पहचान कर उन्हें डिपोर्ट करने का निर्देश दिया. 23 मई को राज्य सरकार के गृह एवं पहाड़ी मामलों का विभाग ने गृह मंत्रालय की गाइडलाइन के आधार पर एक नोटिफिकेशन जारी किया.

नोटिफिकेशन में कहा गया, ‘साथ में वह पत्र भेजा जा रहा है जिसमें इस देश में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या लोगों के डिपोर्टेशन की प्रक्रिया बताई गई है. इसके तहत जिले में पकड़े गए विदेशियों और डिपोर्टेशन या वापसी का इंतजार कर रहे विदेशी कैदियों के लिए होल्डिंग सेंटर बनाने की कार्रवाई की जाए.’

वायरल वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ने मंगलवार को कहा, ‘जल्दी भागो, नहीं तो जो करना है सरकार करेगी.’

फिलहाल दार्जिलिंग, मालदा और मुर्शिदाबाद जिलों में तीन डिटेंशन सेंटर हैं, जहां कम से कम 16 लोग रखे गए हैं.

हालांकि वीडियो मंगलवार को वायरल हुए, लेकिन बीएसएफ के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल से बांग्लादेश जाने की आवाजाही निर्वाचन आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया शुरू होने के बाद से बढ़ी है. 4 नवंबर 2025 से अब तक कम से कम 25,000 बांग्लादेशी नागरिक भारत से बांग्लादेश जा चुके हैं. अधिकारी ने कहा, ‘जब SIR शुरू हुआ था तब बड़ी संख्या में बांग्लादेशी नागरिक वापस जाना चाहते थे. शुरुआती हफ्तों के बाद संख्या कम हुई थी, लेकिन रविवार से फिर बढ़ने लगी है.’

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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