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Friday, 10 July, 2026
होमफीचरसत्यम के रामलिंगा राजू कहां हैं? हैदराबाद IT सेक्टर का 'टाइगर' अब गुमनामी की जिंदगी जी रहा है

सत्यम के रामलिंगा राजू कहां हैं? हैदराबाद IT सेक्टर का ‘टाइगर’ अब गुमनामी की जिंदगी जी रहा है

कभी भारत के IT उदय का चेहरा रहे राजू आज सार्वजनिक जीवन से दूर हैं, लेकिन उनके प्रभाव और कारोबारी विरासत के निशान हैदराबाद में अब भी मौजूद हैं.

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हैदराबाद: रोड नंबर 62 पर बना ऑफ-व्हाइट रंग का यह बंगला बिल्कुल साधारण दिखता है. ठीक उसी तरह जैसे यहां रहने वाले सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज के संस्थापक बी. रामलिंगा राजू. यहां कोई नेमप्लेट नहीं है और न ही वे एंटी-ट्रक बैरियर हैं जो बेहद आलीशान जुबली हिल्स की सड़कों पर अक्सर दिखाई देते हैं. लोहे के गेट के पास सिर्फ एक CCTV कैमरा लगा है. छोटी चौकी में बैठा गार्ड आने वालों को थकी हुई नजरों से देखता है.

गार्ड कहता है, “साहब कभी-कभी यहां आते हैं. आपको यहां नहीं मिलेंगे.” अब उसे लोगों को दूसरी दिशा में भेजने की आदत हो चुकी है.

सरकारी रिकॉर्ड बताते हैं कि यह बायराजू रामलिंगा राजू का मुख्य घर है. 1990 के दशक में उन्हें एक दूरदर्शी कारोबारी और IT जगत के बड़े नाम के तौर पर देखा जाता था. राजू की कहानी दक्कन की उसी ग्रेनाइट जमीन से जुड़ी है जहां हैदराबाद बसा. यही शहर भारत के सॉफ्टवेयर सपनों को आकार देने वाला बना, जिसने आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया और दुनिया में भारत की ताकत दिखाई. उस दौर में राजू हैदराबाद की सफलता का सबसे बड़ा चेहरा थे. लेकिन वह जरूरत से ज्यादा ऊंचाई तक पहुंच गए. आज उनकी सफलता और फिर अकाउंटिंग घोटाले के कारण हुई गिरावट बिजनेस स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली कहानी बन चुकी है. अगर कुछ है तो वह एक चेतावनी देने वाली कहानी है. अब वह बिल्कुल शांत, गुमनाम जिंदगी जी रहे हैं, सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर हैं और शहर की चर्चाओं से अलग रहते हैं.

‘दि डबल लाइफ ऑफ रामलिंगा राजू: दि स्टोरी ऑफ इंडियाज बिगेस्ट कॉरपोरेट फ्रॉड’ के लेखक किंगशुक नाग ने दिप्रिंट से कहा, “अगर वह मीडिया से नहीं मिलते तो इसकी वजह यह भी है कि वह इसमें सहज महसूस नहीं करते. हर कोई उनसे सत्यम घोटाले के बारे में सवाल पूछेगा.”

वरिष्ठ पत्रकार नाग का मानना है कि राजू का असर और प्रभाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. उन्होंने कहा, “उनका श्रेय देना होगा. ऑफशोरिंग की शुरुआत करने वालों में वह सबसे आगे थे. स्थानीय स्तर पर उन्हें काफी समर्थन मिला क्योंकि लोग उन्हें अपने इलाके से निकले उद्यमी के रूप में देखते थे.”

नाग ने अपनी किताब में लिखा है कि जब तक कानून ने उन्हें घेरा, तब तक राजू और उनके परिवार ने 6,800 एकड़ जमीन इकट्ठा कर ली थी और 325 कंपनियां बना ली थीं. कागजों पर इन कंपनियों की मालिकाना हिस्सेदारी उनके करीबी और बड़े परिवार के लोगों के नाम पर थी.

नाग ने अपनी किताब में लिखा, “जो लोग लंबे समय से रामलिंगा राजू को जानते हैं या उनके साथ करीब से काम कर चुके हैं, उनका कहना है कि उनके व्यक्तित्व के दो पहलू थे. वह एक तरफ अच्छे और मददगार डॉक्टर जेकिल जैसे थे, तो दूसरी तरफ बुरे मिस्टर हाइड जैसे भी हो सकते थे.”

The Satyam saga | Infographic: Shruti Naithani/ThePrint
मेलबर्न में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी | X/@narendramodi

इस बीच हैदराबाद आगे बढ़ चुका है. शहर के हर कोने में खाने-पीने की दुकानें और सुपरमार्केट खुल गए हैं. कांच और स्टील की इमारतों वाला नया हैदराबाद, जिसे 1990 के दशक में राजू ने ‘साइबराबाद’ नाम दिलाने में मदद की थी, अब पूरी तरह बदल चुका है. लेकिन आज इस नई कहानी में उनकी कोई जगह नहीं है.

एक समय था जब राजू समुदाय के लोग सीना ठोककर रामालिंगा गारू को अपना रिश्तेदार बताते थे. अब अगर आप उनके बारे में पूछें, तो वे अनजान होने का नाटक करते हैं.

– सत्यम एन्क्लेव के निवासी

फिर भी HITEC City में आज भी राजू की छाप दिखाई देती है. यहीं सत्यम का 12 एकड़ का कैंपस था, जहां से उनका ऑफशोरिंग कारोबार खड़ा हुआ. इसी साइबराबाद इलाके में चंद्रबाबू नायडू के कहने पर माइक्रोसॉफ्ट ने पहली बार अपना दफ्तर खोला था. 2006 में इस कैंपस को SEZ घोषित किया गया और बाद में अप्रैल 2009 में टेक महिंद्रा ने सत्यम का अधिग्रहण करने के बाद इसका विस्तार किया.

सत्यम में 10 साल तक काम कर चुके एक पूर्व कर्मचारी ने याद करते हुए कहा, “मैं अपने साथियों से कहता था कि हम एक डेंट लगी फेरारी जैसे हैं. कोई हमें खरीदना नहीं चाहता था और जो खरीदना चाहते थे, उन्हें भी भरोसा नहीं था कि यह डेंट कभी ठीक होगा या नहीं.”

टेक महिंद्रा के अधिग्रहण से पहले हैदराबाद के HITEC सिटी में सत्यम का IT कैंपस. अब वहां पुराने साइनबोर्ड में से कोई भी नहीं बचा है | कॉमन्स

हाल ही की एक दोपहर HITEC City के माधापुर स्थित इन्फोसिटी कैंपस में काफी चहल-पहल थी. चाय की दुकानें, खाने के ठेले और ऑटो रिक्शा दिन-रात की शिफ्ट में काम करने वाले हजारों टेक महिंद्रा कर्मचारियों की जरूरतें पूरी कर रहे थे. कभी भारत की चौथी सबसे बड़ी IT कंपनी रही सत्यम का नाम अब उस इमारत से पूरी तरह हट चुका है, जहां कभी 40,000 से ज्यादा कर्मचारी काम करते थे और जिन्होंने भारत के IT निर्यात को नई ऊंचाई दी थी. अब उसकी जगह टेक महिंद्रा का बोर्ड और उसका नारा ‘Together We Rise’ (साथ मिलकर हम आगे बढ़े) लगा हुआ है.

सत्यम के आधुनिक मुख्यालय में काम कर चुके एक रेजोल्यूशन प्रोफेशनल ने कहा, “मुझे याद है कि मैं सोचता था, कोई इतनी खूबसूरत और इतनी अच्छी तरह बनाई गई चीज को सिर्फ लालच के लिए कैसे बर्बाद कर सकता है.”

आज यह जगह शहर के टेक कॉरिडोर का एक सामान्य और व्यस्त हिस्सा बन चुकी है. घोटाले की चर्चा लगभग उतनी ही गायब हो चुकी है जितना इमारत से सत्यम का नाम.

Tech Mahindra's sprawling campus in HITEC City, earlier HQ of Satyam Computers Services | Amrtansh Arora/ThePrint
HITEC सिटी में टेक महिंद्रा का विशाल कैंपस, जो पहले सत्यम कंप्यूटर्स सर्विसेज़ का हेडक्वार्टर था | अमृतांश अरोड़ा/दिप्रिंट

राजू की अचानक हुई गिरावट से पहले, जिसने एक ही रात में कंपनी का लगभग 2 अरब डॉलर यानी करीब 14,000 करोड़ रुपये का बाजार मूल्य मिटा दिया था, सत्यम की सालाना आय की रफ्तार 11,276 करोड़ रुपये थी.

यह शानदार सफर 7 जनवरी 2009 को अचानक रुक गया. उस दिन राजू ने सत्यम के बोर्ड, SEBI और शेयर बाजारों को एक पत्र लिखा. उसमें उन्होंने कहा कि वह अपने “जमीर पर पड़े भारी बोझ” को उतार रहे हैं. उन्होंने बताया कि कंपनी के खातों में 7,000 करोड़ रुपये का अंतर है. इसमें ऐसे बैंक बैलेंस दिखाए गए थे जो वास्तव में मौजूद नहीं थे, ब्याज को बढ़ाकर दिखाया गया था, देनदारियों को कम दिखाया गया था और देनदारों की रकम को ज्यादा दिखाया गया था. इसके बाद उन्हें पहले आंध्र प्रदेश CID और फिर CBI ने गिरफ्तार किया. उन्होंने करीब 33 महीने जेल में बिताए. CBI मामले में उनकी सजा के खिलाफ अपील और ED की PMLA जांच दोनों ही बहुत धीमी रफ्तार से चल रही हैं.

लेकिन सत्यम राजू का पहला कारोबार नहीं था और न ही आखिरी. आज भी उनके परिवार के कई कारोबार और CSR से जुड़ी संस्थाएं चल रही हैं. राजू के परिवार के ये कारोबार भी उनके बिना ज्यादा चर्चा में आए काम करते हैं. रियल एस्टेट, टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर और कृषि जैसे कई क्षेत्रों में फैले इन कारोबारों में उनके परिवार के सदस्य या करीबी लोग प्रमोटर या डायरेक्टर के रूप में दर्ज हैं और इन्हें राजू से अलग रखा जाता है.

जो चीज पूरी तरह गायब है, वह है सत्यम का नाम. अब यह नाम सिर्फ कोम्पल्ली स्थित ‘सत्यम एन्क्लेव’ के मेहराबदार प्रवेश द्वार पर दिखाई देता है. इस टाउनशिप को राजू ने अपनी सबसे बड़ी कंपनी के नाम पर बनाया था.

Arched gateway to Satyam Enclave in Kompally, the gated township Raju named after his crown jewel | Amrtansh Arora/ThePrint
कोम्पल्ली में सत्यम एन्क्लेव का मेहराबदार प्रवेश द्वार; यह गेटेड टाउनशिप राजू ने अपनी सबसे खास संपत्ति के नाम पर रखी थी | अमृतंश अरोड़ा/दिप्रिंट

पुराना पारिवारिक गढ़

रामलिंगा राजू अब पहले की तरह हैदराबाद की पहचान नहीं रहे. वह बहुत कम दिखाई देते हैं, उनके बारे में बहुत कम लिखा जाता है और उन्होंने सार्वजनिक रूप से भी कुछ नहीं कहा है. सिर्फ 2024 में उनके परिवार से जुड़ी विवादित AI कंपनी ब्रेन के एक सम्मेलन में उन्होंने भाषण दिया था, जहां उन्हें अंदरूनी तौर पर ‘चीफ मेंटर’ कहा गया. उस भाषण के बाद वह फिर से सार्वजनिक नजरों से दूर हो गए.

लेकिन भले ही वह खुद दिखाई नहीं देते, हैदराबाद में उनके शुरुआती कदमों के निशान अब भी मौजूद हैं.

Foundation for high-rise being laid on patch of Satyam Enclave overlooking NH-44 | Amrtansh Arora/ThePrint
NH-44 के पास सत्यम एन्क्लेव के एक हिस्से में ऊंची इमारत की नींव रखी जा रही है | अमृतंश अरोड़ा/दिप्रिंट

पेट बशीराबाद पुलिस स्टेशन के ठीक सामने और NH-44 के पास एक बहुत बड़ा जमीन का टुकड़ा है. अब यह कई फीट गहरा गड्ढा बन चुका है. हेलमेट पहने मजदूर वहां एक ऐसी ऊंची इमारत की नींव डाल रहे हैं जो आसपास बन रही दूसरी ऊंची इमारतों को टक्कर देगी.

यह जमीन कोम्पल्ली स्थित सत्यम एन्क्लेव का हिस्सा है. उत्तर हैदराबाद का यह इलाका राजू की शुरुआत की कहानी का अहम हिस्सा है. स्थानीय बिल्डर श्रीनिवास बद्दम के मुताबिक, कई बड़े लोगों ने सबसे पहले यहीं जमीन खरीदी थी.

बद्दम ने कहा, “टॉलीवुड अभिनेता शोभन बाबू, मुरली मोहन और यहां तक कि जयललिता की भी यहां संपत्ति थी.”

कोम्पल्ली से इस परिवार का रिश्ता 1960 के दशक से है, जब राजू के पिता सत्यनारायण ने यहां स्थानीय किसानों से अंगूर की खेती के लिए जमीन खरीदी थी.

उनके भाई सूर्यनारायण आज भी यहीं रहते हैं. वह करीब एक दर्जन आलीशान बंगलों वाले इलाके में रहते हैं, जहां बीच में एक सूखा पार्क है और उनके पिता की प्रतिमा लगी है, जिसके नीचे ताजे फूल रखे रहते हैं.

उन्हें (राजू को) ज़मीन का बहुत शौक था. वह ज़्यादा से ज़्यादा ज़मीन हासिल करने के मिशन पर थे, ताकि उनके पिता और दादा ने जो ज़मीन गंवा दी थी, उसकी भरपाई कर सकें.

– सत्यम के एक पूर्व कर्मचारी, जो 1996 से 2009 तक कंपनी के साथ थे

सत्यम में 1996 से 2009 तक काम कर चुके एक पूर्व कर्मचारी ने कहा, “उन्हें जमीन खरीदने का बहुत शौक था. वह ज्यादा से ज्यादा जमीन खरीदना चाहते थे ताकि उनके पिता और दादा ने जो जमीन गंवाई थी, उसकी भरपाई कर सकें.”

सत्यम एन्क्लेव में राजू का अपना बंगला अब सुनसान दिखाई देता है. उसके दरवाजे और खिड़कियां बंद हैं. टूटा हुआ प्रवेश द्वार और पुराने खराब हो चुके लैम्प इस बात की पुष्टि करते हैं कि कभी हैदराबाद के हाई सोसाइटी में मशहूर रहे उसके मालिक अब वहां नहीं आते.

गार्ड ने कहा, “यह राजू का घर है, लेकिन पिछले दो साल से खाली पड़ा है.”

Entry gate to Raju's bungalow in Satyam Enclave battered by the elements | Amrtansh Arora/ThePrint
सत्यम एन्क्लेव में राजू के बंगले का एंट्री गेट मौसम की मार से जर्जर हो गया है | अमृतंश अरोड़ा/दिप्रिंट

पहले यही बंगला बायराजू फाउंडेशन का मुख्य दफ्तर था. यह NGO राजू ने 2001 में अपने पिता की मौत के एक हफ्ते के भीतर उनकी याद में बनाया था. इसका मकसद संयुक्त आंध्र प्रदेश के 200 गांवों को अपनाकर उनका विकास करना था.

इसी सत्यम एन्क्लेव में 2003 में तत्कालीन राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने राजू के साथ मिलकर NGO के सेंटर फॉर रूरल ट्रांसफॉर्मेशन की आधारशिला रखी थी.

उस ऐतिहासिक पल का जिक्र सामने वाले बरामदे में लगी काले ग्रेनाइट की पट्टिका पर दर्ज है. यह राजू के प्रभाव की पूरी कहानी बताता है. एक ऐसा व्यक्ति जिसने कभी निजामों के शहर हैदराबाद में सबसे आगे जगह बनाई थी, लेकिन आज अपने ही परिवार के कारोबारों में एक परछाई बनकर रह गया है.

Plaque commemorating 2003 headline moment when Kalam, Naidu came to Satyam Enclave at Raju's invitation | Amrtansh Arora/ThePrint
2003 के उस अहम पल की याद में लगी पट्टिका, जब राजू के बुलावे पर कलाम और नायडू सत्यम एन्क्लेव आए थे | अमृतांश अरोड़ा/दिप्रिंट

राजू की सबसे बड़ी कमजोरी

राजू समुदाय अविभाजित आंध्र प्रदेश का एक छोटा लेकिन प्रभावशाली क्षत्रिय जाति समूह है. रियल एस्टेट के साथ उनका रिश्ता उतना ही गहरा है जितना सीमेंट और स्टील के साथ रेत का होता है.

रामलिंगा राजू ने इस समुदाय में खुद को एक बड़े सहारे और मार्गदर्शक के रूप में स्थापित किया था. वह अपनी जाति के लोगों के लिए बहुत प्रतिबद्ध माने जाते थे. सत्यम ने भी समुदाय के युवाओं को आगे बढ़ाने के एक खास प्रोजेक्ट के तहत उनमें से कई लोगों को नौकरी दी थी. अब उनमें से कुछ लोग उनसे दूरी बना चुके हैं.

A bust of Raju's father Satyanarayana inside Satyam Enclave; Satyam founder's brother still lives here | Amrtansh Arora/ThePrint
सत्यम एन्क्लेव के अंदर राजू के पिता सत्यनारायण की प्रतिमा; सत्यम के संस्थापक के भाई अभी भी यहीं रहते हैं | अमृतांश अरोड़ा/दिप्रिंट

सत्यम एन्क्लेव के एक निवासी ने कहा, “एक समय था जब राजू समुदाय के लोग गर्व से कहते थे कि रामलिंगा गरु हमारे अपने हैं. अब अगर आप उनके बारे में पूछते हैं तो वे अनजान बनने का नाटक करते हैं.”

सत्यम एन्क्लेव में राजू के पिता सत्यानारायण की प्रतिमा. सत्यम के संस्थापक के भाई अब भी यहां रहते हैं.

लेकिन राजू की सामाजिक पहचान के उलट, सत्यम एन्क्लेव अभी बेकार संपत्ति नहीं है. बल्कि यह उनकी महंगी जमीन पहचानने की क्षमता की याद दिलाता है, और शायद यही उनकी सबसे बड़ी कमजोरी भी थी.

बचपन से ही जमीन खरीदना राजू की जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा रहा. उनके दादा ने परिवार की काफी संपत्ति एक चीनी मिल में लगा दी थी, जो सफल नहीं हो पाई. राजू ने इस अनुभव से एक ऐसी सीख ली जो उनके परिवार ने मुश्किल से सीखी थी. जमीन का मालिकाना हक मुश्किल समय में सबसे बड़ा सहारा होता है.

1996 से 2009 तक IT कंपनी सत्यम में काम करने वाले एक पूर्व कर्मचारी ने कहा, “उन्हें जमीन खरीदने का बहुत शौक था. वह ज्यादा से ज्यादा जमीन खरीदने के मिशन पर थे ताकि उनके पिता और दादा ने जो खोया था, उसकी भरपाई कर सकें.”

कई अंदरूनी लोगों का कहना है कि जमीन के लिए उनकी यह लगातार बढ़ती चाहत, जो शायद एक सामंती सोच से जुड़ी थी जिसे राजू पूरी तरह पीछे नहीं छोड़ पाए, वही वजह बनी कि उनका राजू परिवार को भारत के अगले बड़े कारोबारी समूह में बदलने का सपना पूरा नहीं हो सका.

अब राजू क्या कर रहे हैं?

जिस दिन से रामलिंगा राजू ने वह चर्चित इस्तीफा पत्र भेजा था, उसके बाद के 17 सालों में वह “हैदराबाद के सामाजिक दायरों से पूरी तरह बाहर हो चुके हैं”, ऐसा एक शहर के कारोबारी ने कहा, जो उनके साथ लोयोला कॉलेज के दिनों से परिचित थे.

उस कारोबारी ने कहा, “जब वह गए तो हैदराबाद के उद्यमियों को बहुत झटका लगा. सत्यम के जाने के बाद उन्होंने अपने साथियों से निवेश के लिए संपर्क किया और कुछ लोगों ने मदद भी की. लेकिन हमें पता नहीं कि हमने उन्हें कितने समय से नहीं देखा है.”

लेकिन राजू के अब भी कुछ प्रशंसक हैं. हैदराबाद के एक पत्रकार ने उन्हें “पावन” यानी शुद्ध, पवित्र और पावन बताया.

अपनी बहू संध्या राजू द्वारा शेयर की गई 2017 की एक तस्वीर में रामलिंगा राजू | फोटो: इंस्टाग्राम

हाल के वर्षों में राजू की बहुत कम तस्वीरें सामने आई हैं. इनमें 2015 की उनकी जमानत सुनवाई की तस्वीरें और उनकी बहू संध्या राजू द्वारा इंस्टाग्राम पर डाली गई कुछ तस्वीरें शामिल हैं. इन तस्वीरों में 71 वर्षीय पूर्व सत्यम प्रमुख को एक दयालु परिवार के सदस्य के रूप में दिखाया गया है.

2020 की एक सेल्फ़ी में संध्या राजू, रामलिंगा राजू के साथ; कैप्शन है ‘मेरे दूसरे पिता के साथ लंच’ | फ़ोटो: इंस्टाग्राम

अगस्त 2015 की एक पोस्ट में वह पत्नी नंदिनी, बेटे रामा जूनियर और संध्या के साथ कैमरे की ओर मुस्कुराते दिखते हैं. इस तस्वीर का कैप्शन था, “ऑल ड्रेस्ड अप”.

उसी साल अक्टूबर की एक अन्य तस्वीर में कुचिपुड़ी नृत्यांगना संध्या अपने ससुराल वालों के साथ राज्य सरकार के रविंद्र भारती सभागार में कार्यक्रम से पहले दिखाई देती हैं.

जुलाई 2016 की एक तस्वीर में संध्या, नंदिनी और रामलिंगा राजू बाहर दिखाई देते हैं. इसका कैप्शन था, “राजापालयम मिनी ट्रेक. विद द हैदराबादिस.”

सबसे हाल की तस्वीर जनवरी 2020 की है, जिसमें संध्या और रामलिंगा राजू द वेस्टिन हैदराबाद माइंडस्पेस में दिखाई देते हैं. इसका कैप्शन था, “लंच डेट विद माय अदर फादर.”

ज्यादातर लोगों ने इस पर अच्छी प्रतिक्रिया दी. कुछ लोगों ने उन्हें “हीरो” और “हजारों परिवारों के पिता” कहा. हालांकि एक व्यक्ति ने उन्हें “नार्सिसिस्ट और धोखेबाज” बताया.

2020 में संध्या राजू के साथ रामलिंगा राजू की सेल्फी, जिसका कैप्शन था ‘लंच विद माय अदर फादर’.

उनके करीबी एक सूत्र ने कहा कि राजू ने पिछले 10 सालों में कोई सामान्य समाचार पत्र या मैगजीन नहीं पढ़ी है.

सूत्र ने दिप्रिंट से कहा, “राजू हमेशा विज्ञान और उससे जुड़े शोध के विषयों में रुचि रखते रहे हैं और अब वह इन्हीं चीजों में समय बिताकर काफी संतुष्ट हैं.”

लगभग एक हजार साल पहले अपने मूल शहर भीमावरम पर शासन करने वाले चोल शासक की तरह, राजू अब ऐसा लगता है कि उन्होंने दिखाई देने वाली दुनिया का बड़ा हिस्सा अपने दो बेटों बी. तेजा राजू और बी. रामा राजू जूनियर को सौंप दिया है. वे भी अभी अपने पिता की छाया से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं और चुपचाप सत्यम के सपने के टूटे हुए टुकड़ों पर चल रहे हैं.

उनका श्रेय देना होगा. वह ऑफशोरिंग के शुरुआती लोगों में से थे. स्थानीय स्तर पर उन्हें काफी समर्थन मिला क्योंकि उनकी छवि अपने इलाके से निकले उद्यमी की थी.

– किंगशुक नाग, पत्रकार और ‘द डबल लाइफ ऑफ रामलिंगा राजू’ के लेखक

उनके बेटों की नेतृत्व क्षमता की पहली बड़ी परीक्षा मायटास के साथ हुई. मायटास का नाम सत्यम यानी सच को उल्टा लिखने से बना था. यह परिवार का रियल एस्टेट कारोबार था, जिसे सत्यम ने दिसंबर 2008 में खरीदने की कोशिश की थी. इस फैसले से निवेशकों में विरोध शुरू हुआ और कुछ हफ्तों बाद राजू ने अपना अपराध स्वीकार किया.

बाद में राजू ने इस अधूरे सौदे को “काल्पनिक संपत्तियों को असली संपत्तियों से भरने की आखिरी कोशिश” बताया.

मायटास का भविष्य सत्यम से जुड़ गया था और जब बेटे राजू की तरह अपना साम्राज्य खड़ा नहीं कर पाए तो वह भी इसके साथ नीचे चला गया.

अंदरूनी लोगों का कहना है कि राजू की तरह उनके बेटे भी अच्छे संवादकर्ता नहीं थे. राजू बहुत कम शब्द बोलकर भी लोगों पर प्रभाव डाल सकते थे और कमरे को नियंत्रित कर सकते थे.

File photo of Byrraju Ramalinga Raju, founder of Satyam Computer Services at the opening plenary session of World Economic Forum's India Economic Summit 2008 in New Delhi (16-18 November 2008) | Norbert Schiller/WEF via flickr
नई दिल्ली में वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम के इंडिया इकोनॉमिक समिट 2008 (16-18 नवंबर 2008) के उद्घाटन सत्र में सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज़ के संस्थापक बायराजू रामलिंगा राजू की फ़ाइल फ़ोटो | नॉर्बर्ट शिलर/WEF (फ़्लिकर के ज़रिए)

एक पूर्व सत्यम कर्मचारी ने याद करते हुए कहा, “आप गिन सकते थे कि उन्होंने एक बैठक में कितने शब्द बोले. फिर भी वह अपनी असहमति भी बहुत शालीन तरीके से जता सकते थे.”

नवंबर 2008 में नई दिल्ली में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के इंडिया इकोनॉमिक समिट में सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज के संस्थापक बायराजू रामलिंगा राजू की फाइल फोटो.

दिसंबर 2024 में हैदराबाद स्थित नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल की बेंच ने कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की 15 साल पुरानी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें राजू के बेटों और मायटास के निदेशकों को दूसरी कंपनियों में निदेशक बनने से रोकने की मांग की गई थी. यह सत्यम मामले से जुड़ा पुराना विवाद था.

लेकिन राजू के मामले में दिखाई न देना यह नहीं बताता कि वह निष्क्रिय हैं. आज भी, भले ही वह सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आते, लेकिन पर्दे के पीछे वह सक्रिय हैं. वह नए उद्यमियों और उन पारिवारिक कारोबारों को सलाह दे रहे हैं, जिन्होंने सत्यम के पतन का दौर देखा और फिर भी आगे बढ़ पाए.

ऐसा ही एक कारोबार है कॉलहेल्थ. यह एक इंटीग्रेटेड हेल्थकेयर प्लेटफॉर्म है. शुरुआती वर्षों में इसने कोम्पल्ली के सत्यम एन्क्लेव में खाली पड़े ऑफिस स्पेस को फील्ड कर्मचारियों के प्रशिक्षण केंद्र के रूप में किराए पर लिया था.

सत्यम के एक पूर्व वरिष्ठ कर्मचारी के नेतृत्व में यह कंपनी 2013 में शुरू होने के बाद तेजी से बढ़ी है. इसके एक मीटिंग रूम में लगे लक्ष्य बोर्ड पर लिखा है कि कंपनी “अगला गूगल या फेसबुक” बनना चाहती है.

Now-abandoned bungalow in Satyam Enclave earlier leased by CallHealth | Amrtansh Arora/ThePrint
कॉलहेल्थ द्वारा पहले किराए पर लिया गया, अब खाली पड़ा सत्यम एन्क्लेव का बंगला | अमृतांश अरोड़ा/दिप्रिंट

न्याय के पहिए

इस बीच राजू के खिलाफ मामले अभी भी चल रहे हैं.

CBI द्वारा दर्ज मामले में 2015 में अतिरिक्त मुख्य महानगरीय मजिस्ट्रेट ने राजू और नौ अन्य लोगों को दोषी ठहराया था. तब तक राजू जनवरी 2009 में आंध्र प्रदेश क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट द्वारा गिरफ्तारी के बाद करीब 33 महीने जेल में बिताकर लगभग चार साल से जमानत पर बाहर थे.

CBI मामले में आया फैसला उन रोजाना होने वाली सुनवाइयों का नतीजा था, जिनमें अदालत ने हजारों दस्तावेजों की जांच की और अभियोजन पक्ष के 226 तथा बचाव पक्ष के 10 गवाहों को सुना.

2015 में दोषी ठहराए जाने के बाद राजू को फिर से चेरलापल्ली सेंट्रल जेल भेजा गया, लेकिन एक महीने के भीतर उन्हें जमानत मिल गई. उनकी सात साल की सजा अपील लंबित रहने तक रोक दी गई.

बी. रामलिंगा राजू का बिज़नेस कार्ड, जब वे सत्यम के चेयरमैन थे | फ़ोटो: अमृतंश अरोड़ा/दिप्रिंट

2024 में तेलंगाना हाई कोर्ट ने सजा बढ़ाने की मांग वाली CBI की याचिका खारिज कर दी. एजेंसी ने कहा था कि ट्रायल कोर्ट ने राजू और अन्य लोगों की अपील पर फैसला देने में देरी की.

सत्यम के चेयरमैन रहते समय बी. रामलिंगा राजू का बिजनेस कार्ड.

जहां तक प्रवर्तन निदेशालय का सवाल है, 2015 तक उसने राजू और उनके परिवार के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) की जांच में 1,000 करोड़ रुपये की संपत्ति और 822 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट जब्त की थी. इस मामले में 212 लोगों को आरोपी बनाया गया है.

राजू के कानूनी सलाहकार ने दिप्रिंट को दिए बयान में कहा कि वे “मामले में आगे बढ़ते हुए अपनी तरफ से पूरी मजबूती से इसका बचाव करना चाहते हैं.”

ED की जब्त की गई संपत्तियों पर उन्होंने कहा कि “इन कार्रवाइयों में ऐसी संपत्तियां शामिल हैं, जो हमारी राय में इस तरह की कार्रवाई के दायरे में नहीं आतीं.”

बयान में आगे कहा गया, “हमने इसके खिलाफ अपील की है और इस मामले में अपने तथ्यों को आगे भी रखते रहेंगे.”

दिप्रिंट की ओर से बायराजू रामलिंगा राजू, उनके करीबी परिवार के सदस्यों और परिवार द्वारा चलाए जा रहे कारोबारों के प्रबंधन से जुड़े लोगों से ईमेल, फोन और संदेशों के जरिए संपर्क किया गया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.

राजू परिवार में शुरू हुआ एक कारोबार

माधापुर में 15 मंजिला कमर्शियल इमारत रामकी ग्रैंडियोस के ग्राउंड फ्लोर की लॉबी में उम्मीदवारों की भीड़ लगी हुई है. कॉलहेल्थ के लिए भर्ती अभियान पूरे जोरों पर चल रहा है. AI और फुल-स्टैक डेवलपर्स, जिनके माथे पर पसीना बह रहा है, अपने नाम पुकारे जाने का इंतजार कर रहे हैं.

गुंटूर से आए एक नए इंजीनियरिंग ग्रेजुएट ने लिफ्ट में जाते हुए कहा, “मुझे यहां काम करने वाले एक दोस्त से नौकरी की खाली जगह के बारे में पता चला.”

लिफ्ट में उसके साथ 20 साल की उम्र के आसपास का एक युवक भी है. उसके गले में कॉलहेल्थ का ID कार्ड लटका हुआ है. वह पिछले दो महीने से इस कंपनी में काम कर रहा है. जब रामलिंगा राजू का नाम लिया जाता है, तो वह उसे पहचानने की कोशिश करता है लेकिन उसे याद नहीं आता.

क्योंकि वह एक कारोबारी परिवार से आते हैं, इसलिए हम हमेशा अलग-अलग बिजनेस आइडिया पर चर्चा करते रहते हैं. जब भी कोई आइडिया आता है, हम उसके बारे में बात करते हैं.

– संध्या राजू ने 2017 में iDream Media को दिए इंटरव्यू में कहा 

कॉलहेल्थ शायद अब राजू के सत्यम के बाद वाले पारिवारिक कारोबारों में सबसे ज्यादा दिखाई देने वाला नाम है. यह इंटीग्रेटेड हेल्थ प्लेटफॉर्म, जो प्रैक्टो और कई डायग्नोस्टिक कंपनियों जैसी ही जगह पर काम करता है, अब कोरोना के बाद बढ़ी मांग को पूरा करने के लिए विस्तार अभियान के बीच में है.

इसके शुरुआती प्रमोटरों में संध्या राजू भी थीं. वह नेशनल फिल्म अवॉर्ड जीतने वाली क्रिएटिव डायरेक्टर और कुचिपुड़ी नृत्यांगना हैं. उनकी शादी राजू के छोटे बेटे रामा जूनियर से हुई है.

तेलुगु इंफोटेनमेंट प्लेटफॉर्म iDream Media को 2017 में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि कॉलहेल्थ का आइडिया उन्हें खुद के अनुभव से आया. जब उनका टखना मुड़ गया था, तब उन्हें इसकी जरूरत महसूस हुई. इसका विचार एक ऐसा डिजिटल मार्केटप्लेस बनाने का था जहां अस्पताल, लैब और डॉक्टर सिर्फ एक क्लिक की दूरी पर हों.

उन्होंने इंटरव्यू में कहा था, “क्योंकि वह एक कारोबारी परिवार से आते हैं, इसलिए हम हमेशा अलग-अलग बिजनेस आइडिया पर चर्चा करते रहते हैं. जब भी कोई आइडिया आता है, हम उसके बारे में बात करते हैं.” उन्होंने बताया था कि राजू और परिवार के दूसरे सदस्यों के साथ खाने की मेज पर होने वाली बातचीत ने इस समाधान को आकार देने में मदद की.

कॉलहेल्थ बाद में कई कंपनियों के समूह के रूप में सामने आया. इनमें पहली कंपनी 2013 से 2015 के बीच शुरू हुई थी. मुख्य कंपनी, जिसमें संध्या राजू प्रमोटर हैं, के दो डायरेक्टर हैं. इनमें से एक हैं डॉ. सुब्बा राजू कोसुरी. वह टेक्सास में रहने वाले इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ और कार्डियोलॉजिस्ट हैं, जिनके पास 42 साल का अनुभव है.

दूसरे हैं 62 वर्षीय टी. हरि. उन्होंने सत्यम के HR विभाग से अपना करियर शुरू किया था और बाद में कंपनी के ग्लोबल मार्केटिंग और कम्युनिकेशन विभाग का नेतृत्व किया.

एक पूर्व सत्यम कर्मचारी ने याद करते हुए कहा कि हरि को राजू का पूरा भरोसा हासिल था. राजू ने अपने इस्तीफा पत्र में हरि को सत्यम के छह “सबसे सफल नेताओं” में शामिल किया था.

कॉलहेल्थ का उभार

अपने सोच-समझकर सजाए गए ऑफिस में बैठे CEO हरि के पीछे एक यूनिकॉर्न की तस्वीर लगी है, जो उन्हें कॉलहेल्थ के लक्ष्य की याद दिलाती है. हर मायने में वह “सत्यम वे” से जुड़े व्यक्ति हैं.

यह शब्द राजू ने उस समय के मशहूर “GE वे” की नकल करते हुए बनाया था. यह जनरल इलेक्ट्रिक के प्रमुख जैक वेल्च से जुड़ा था. यह एक ऐसा मैनेजमेंट तरीका था जिसमें बड़े अधिकारियों के कपड़े पहनने, व्यवहार करने, बोलने और काम करने के तरीके तय होते थे.

सत्यम वे” कंपनी की अपनी मैनेजमेंट सोच थी. यह चार हिस्सेदारों के आसपास बनी थी. कर्मचारी, निवेशक, ग्राहक और समाज. इसे सत्यम स्कूल ऑफ लीडरशिप के जरिए नेतृत्व प्रशिक्षण में आगे बढ़ाया गया.

बिल्कुल प्रेस किए हुए नीले-चांदी रंग के डिजाइन वाले कॉटन शर्ट में और बालों को साफ-सुथरी पोनीटेल में बांधे हुए हरि के गंभीर व्यवहार में उस पुराने सिस्टम की झलक दिखाई देती है. हालांकि वह सत्यम के बारे में बात करने से पूरी तरह बचते हैं.

कॉलहेल्थ फिलहाल पूरे भारत में 1,600 जगहों पर सेवाएं दे रही है. इसके कर्मचारी करीब 10-12 शहरों में हैं और 2,000 डायग्नोस्टिक लैब्स के साथ इसके समझौते हैं. इन 650-680 कर्मचारियों में करीब 60 प्रतिशत की उम्र 30 साल से कम है और लगभग आधे डॉक्टर या नर्स हैं.

जब बड़ी लहर आएगी, तो वही लोग बचेंगे जो उसे अपनाएंगे और उसके अनुसार खुद को बदलेंगे.

– टी. हरि, कॉलहेल्थ CEO

इसकी सेवाओं में ऑनलाइन कंसल्टेशन, लैब टेस्ट, एक्स-रे और स्कैन, घर पर डॉक्टरों की सलाह, नर्सिंग सहायता, फिजियोथेरेपी, अटेंडेंट और हेल्थ प्लान शामिल हैं.

करीब 18 महीने पहले कंपनी ने हरि के अनुसार एक “स्मार्ट रिपोर्ट” शुरू की. इसका उद्देश्य जटिल मेडिकल रिपोर्ट को आसान भाषा में समझ आने वाली स्वास्थ्य जानकारी में बदलना था. और कॉलहेल्थ यहीं रुकने की योजना नहीं बना रही है. कंपनी ऐसे भविष्य को देख रही है जहां बीमा कंपनियां स्वस्थ लोगों के स्वास्थ्य कवरेज का खर्च उठाने के लिए आपस में प्रतिस्पर्धा करेंगी. इस लंबी छलांग में हरि AI को एक “बदलाव का महत्वपूर्ण मोड़” मानते हैं.

Media coverage of CallHealth framed at its office in Madhapur | Amrtansh Arora/ThePrint
माधापुर में CallHealth के ऑफ़िस में उसकी मीडिया कवरेज | अमृतंश अरोड़ा/दिप्रिंट

हरि ने दिप्रिंट से कहा, “जब बड़ी लहर आएगी, तो वही लोग बचेंगे जो उसे अपनाएंगे और उसके अनुसार खुद को बदलेंगे.” उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2026 कंपनी के लिए नकदी के लिहाज से सकारात्मक साल रहा है और महामारी के बाद से हर साल आय लगातार बढ़ रही है.

उन्होंने कहा, “2020 में हमने B2C से B2B2C मॉडल की ओर बदलाव किया. यह कारोबार की दिशा और फोकस में बड़ा बदलाव था. पहले निवेश B2C ऑपरेशन की ज्यादा मेहनत वाली जरूरतों को पूरा करने में किया गया था, जिसमें फील्ड कर्मचारी, फील्ड ऑफिस, उपकरण, ट्रेनिंग आदि शामिल थे. लोगों और कारोबार पर कम से कम असर डालते हुए इसे कम करने की प्रक्रिया दो साल में पूरी हुई.”

कई पूर्व सत्यम कर्मचारियों का कहना है कि हरि राजू के सबसे करीबी भरोसेमंद लोगों में से एक थे. लेकिन हरि खुद कहते हैं कि उन्होंने वर्षों से राजू से बात नहीं की है.

कॉलहेल्थ के CEO टी. हरि कभी राजू के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में से एक थे | फ़ोटो: Facebook/@Hari T

ब्रेन और सोशल टेक

यह लगभग किसी की नजर में नहीं आया. अप्रैल 2024 में हैदराबाद में हुए एक बंद कमरे वाले सम्मेलन में रामलिंगा राजू ने ब्रेन ट्रांसफॉर्मेशन पार्टनर्स समिट में समापन भाषण दिया.

उपलब्ध कुछ धुंधली तस्वीरों में राजू उस स्मार्ट और काले बालों वाले व्यक्ति से काफी अलग दिखाई देते हैं, जो कभी हैदराबाद में बिल क्लिंटन के साथ मंच साझा कर चुके थे. अब उनके बाल पूरी तरह सफेद हैं. सफेद बटन वाली शर्ट और गहरे रंग की जैकेट पहने वह किसी फिजिक्स प्रोफेसर जैसे दिखते हैं, एक हाथ उठाकर भीड़ को समझाते हुए.

उस समय मीडिया में इसकी कोई बड़ी खबर नहीं बनी. यह उपस्थिति कई महीने बाद सामने आई, जब ब्रेन में वेतन न मिलने और टैक्स नियमों के उल्लंघन की खबरें आने लगीं.

Shared office of Brane Enterprises and its CSR arm Social Tech on the third floor of a commercial building in Banjara Hills | Amrtansh Arora/ThePrint
बंजारा हिल्स में एक कमर्शियल बिल्डिंग की तीसरी मंज़िल पर ब्रेन एंटरप्राइज़ेज़ और उसकी CSR शाखा ‘सोशल टेक’ का साझा ऑफ़िस | अमृतंश अरोड़ा/दिप्रिंट

इस सम्मेलन ने ब्रेन में राजू की भूमिका को सामने रखा. उन्हें कंपनी का चीफ मेंटर बताया गया. यह उनके परिवार से जुड़ा एक कम प्रसिद्ध कारोबार है. इसका CSR विभाग सोशल टेक रिसर्च फाउंडेशन भी है, जिसने सार्वजनिक नजरों से दूर रहने की कोशिश की है.

Empty chairs at Brane-Social Tech office suggest Brane staff doesn't work out of this space anymore | Amrtansh Arora/ThePrint
ब्रैन-सोशल टेक ऑफ़िस में खाली कुर्सियां बताती हैं कि ब्रैन के कर्मचारी अब इस जगह से काम नहीं करते हैं | अमृतंश अरोड़ा/दिप्रिंट

बंजारा हिल्स के छोटे से ऑफिस में, जहां ब्रेन एंटरप्राइजेज और सोशल टेक रिसर्च फाउंडेशन दोनों काम करते हैं, वहां फ्लोर पर मौजूद लोगों की संख्या इतनी कम है कि इमारत की लिफ्ट भी उन्हें आसानी से ले जा सकती है.

एक सोशल टेक कर्मचारी ने कहा, “ब्रेन से कोई यहां नहीं बैठता.”

ब्रेन की शुरुआत 2017 में एक लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप फर्म के रूप में हुई थी. इसमें निवेशक के तौर पर रामलिंगा राजू की भतीजी और भतीजे दीप्ति बायराजू और राहुल राजू बायराजू शामिल थे. कंपनी खुद को “एक नो-कोड प्लेटफॉर्म बताती है, जो कंपनियों को सबसे कम समय, सबसे तेज तरीके और कम लागत में अपने समाधान बनाने, लागू करने और आधुनिक बनाने में मदद करता है.”

यह कम प्रसिद्ध कंपनी अप्रैल 2024 के सम्मेलन के कुछ महीनों बाद ही चर्चा में आई, जब कई मीडिया संस्थानों ने कर्मचारियों के आरोपों की खबर दी कि 17.5 करोड़ रुपये से ज्यादा का वेतन बकाया है.

राज्यसभा सांसद प्रवीण चक्रवर्ती ने लिंक्डइन पोस्ट में ब्रेन को “सत्यम के लिए प्रसिद्ध रामलिंगा राजू का AI स्टार्टअप” बताया और आरोप लगाया कि कंपनी ने बड़े कॉलेजों से 3,000 ग्रेजुएट्स को संभावित निवेशकों को प्रभावित करने के लिए नौकरी दी, लेकिन बाद में उन्हें निकाल दिया और वेतन देना बंद कर दिया.

उन्होंने कहा कि उन्होंने कर्मचारियों के लिए सार्वजनिक सुनवाई कराई और तेलंगाना के IT मंत्री डी. श्रीधर बाबू ने हस्तक्षेप करने का भरोसा दिया.

अब कंपनी के बचे हुए कर्मचारी ज्यादातर घर से काम कर रहे हैं. दो साल पहले किराए पर लिया गया बंजारा हिल्स का 2,300 वर्ग फीट का ऑफिस अब मुख्य रूप से सोशल टेक के कर्मचारियों से भरा रहता है.

राजू के बड़े बेटे तेजा से शादी करने वाली भरतनाट्यम नृत्यांगना दिव्या बायराजू CSR शाखा में 99 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती हैं. यह शाखा कहती है कि वह ब्रेन की तकनीक का इस्तेमाल “सामाजिक भलाई के लिए समाधान विकसित करने” में करती है.

हालांकि ऐसी संस्था जो “दूसरी कंपनियों की वेबसाइट के रखरखाव” में काम करने का दावा करती है, उसके पास खुद की कोई वेबसाइट नहीं है.

एक पूर्व कर्मचारी ने कहा कि CSR संस्था राजू समुदाय की भलाई के लिए काम करती है, लेकिन उसने काम की असली प्रकृति के बारे में ज्यादा जानकारी देने से इनकार कर दिया. मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने कहा कि सोशल टेक राजू के एक “खास प्रोजेक्ट” पर काम कर रही है. वह प्रोजेक्ट क्या है, इसको लेकर शहर में कई तरह की फुसफुसाहट वाली बातें हैं. लेकिन यह अब भी रहस्य के पर्दे में छिपा हुआ है.

राजू के जुबली हिल्स वाले बंगले पर वापस लौटें तो कार के हॉर्न की आवाज सुनते ही गार्ड सतर्क हो जाता है. एक सफेद SUV, जिसकी खिड़कियां ढकी हुई हैं, बंगले के अंदर से निकलती है और मेट्रो लाइन की ओर तेजी से चली जाती है. वह हैदराबाद के डूबते सूरज में गायब हो जाती है. बंगले की बाहरी दीवारों के किनारे उगे गुलाबी फूलों वाले पेड़ों से दूर.

Raju's fortress of solitude in Jubilee Hills; the house number has been blurred on account of privacy concerns | Amrtansh Arora/ThePrint
जुबली हिल्स में राजू का एकांत का किला; प्राइवेसी की वजह से घर का नंबर धुंधला कर दिया गया है | अमृतंश अरोड़ा/दिप्रिंट

इस सुरक्षित घेरे के बाहर अब सिर्फ IT निजाम की कारोबारी कहानी बची है और वह अरबों डॉलर का “टाइगर” जिसके बारे में उन्होंने 2009 के इस्तीफा पत्र में लिखा था. एक ऐसा टाइगर जिससे वह “बिना खाए जाने के डर के” उतरना नहीं जानते थे.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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