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Wednesday, 15 July, 2026
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2026 को बताया गया सबसे ताकतवर एल नीनो, जानिए भारत पर क्या है इसका असर

2026 से पहले किसी भी एल नीनो वाले साल में साल की शुरुआत में इतनी ज्यादा गर्मी नहीं देखी गई थी. जुलाई के पहले 13 दिनों में ही औसत तापमान सामान्य से 2 डिग्री सेल्सियस ज्यादा दर्ज किया गया है.

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नई दिल्ली: मौसम का अनुमान लगाने वाले मॉडल और क्लाइमेट साइंटिस्ट ने चेतावनी दी है कि 2026 में आने वाला एल नीनो, कम से कम पिछले 150 सालों में अब तक का सबसे ताकतवर एल नीनो साबित हो रहा है. इससे आने वाले महीनों में बहुत ज़्यादा गर्मी, क्लाइमेट से जुड़ी मौतों में बढ़ोतरी और खाने की गंभीर कमी की संभावना बहुत ज़्यादा बढ़ गई है.

1877 से डेटा का एनालिसिस करते हुए, फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी कंपनी स्ट्राइप में लीड क्लाइमेट साइंटिस्ट और बर्कले अर्थ में रिसर्च साइंटिस्ट, क्लाइमेटोलॉजिस्ट ज़ेके हॉसफादर ने कहा कि 2026 का एल नीनो अब तक का सबसे ताकतवर ऐसा इवेंट बनने की राह पर है, कम से कम जब से भरोसेमंद रिकॉर्ड-कीपिंग शुरू हुई है.

उन्होंने कहा कि मौजूदा जलवायु मॉडल बताते हैं कि यह एल नीनो पुराने सभी रिकॉर्ड को काफी बड़े अंतर से पीछे छोड़ सकता है. दुनिया के कई मौसम मॉडल दिखाते हैं कि 2026 से पहले किसी भी एल नीनो वाले साल में साल की शुरुआत में इतनी ज्यादा गर्मी नहीं देखी गई. जुलाई के सिर्फ पहले 13 दिनों में ही औसत तापमान सामान्य से 2 डिग्री सेल्सियस ज्यादा दर्ज किया जा चुका है.

हॉसफादर ने अपने एनालिसिस में कहा, “औसत अनुमान अब 3.6°C है, जो पिछले रिकॉर्ड (2.75°C) से लगभग 0.8°C ज़्यादा गर्म है.”

एल नीनो, जिसे एल नीनो सदर्न ऑसिलेशन (ENSO) भी कहा जाता है, एक ऐसी जलवायु प्रक्रिया है जिसमें प्रशांत महासागर के ऊपर चलने वाली हवाओं और समुद्र की सतह के तापमान में बदलाव होता है. इसका असर दुनिया भर के मौसम पर पड़ता है.

भारत, इंडोनेशिया, श्रीलंका और यहां तक ​​कि ऑस्ट्रेलिया सहित एशिया में, एल नीनो की स्थिति आमतौर पर कमजोर मानसून और कभी-कभी सूखे से भी जुड़ी होती है.

पुराने रिकॉर्ड क्या बताते हैं?

आंकड़ों के मुताबिक, 1877 के बाद दो बड़े एल नीनो सबसे ज्यादा चर्चा में रहे हैं—2015-16 और 1877-78. इसके अलावा 1982-83 और 1997-98 को भी ‘सुपर एल नीनो’ माना गया था.

फिलहाल 2026 के लिए नीनो 3.4 क्षेत्र (प्रशांत महासागर का मध्य भूमध्यरेखीय हिस्सा) में औसत तापमान सामान्य से 3.6°C ज्यादा रहने का अनुमान है. यह 2015-16 के करीब 2.75°C के पिछले रिकॉर्ड से लगभग 0.8°C ज्यादा है.

मौसम मॉडल बता रहे हैं कि 2026 के एल नीनो के अनुमान पहले के सभी रिकॉर्ड से ऊपर हैं. इसका मतलब है कि आने वाले 12 से 18 महीने इतिहास के किसी भी साल से ज्यादा गर्म हो सकते हैं.

पुणे स्थित भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के जलवायु वैज्ञानिक रॉक्सी कोल ने कहा, “अब तक का सबसे ताकतवर एल नीनो बन रहा है. इसका मतलब है कि 2027 भी रिकॉर्ड के सबसे गर्म सालों में से एक हो सकता है. अगर हमें आने वाले महीनों के लिए तैयार रहना है, तो अभी से बचाव और तैयारी के उपायों को गंभीरता से लागू करना होगा.”

भारत पर क्या असर होगा?

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के वैज्ञानिकों का कहना है कि इस एल नीनो का सबसे बड़ा असर भारतीय मानसून पर पड़ेगा. सामान्य से कम बारिश होने से देश के ज्यादातर हिस्सों में गर्मी और बढ़ेगी और खाद्य संकट का खतरा भी बढ़ सकता है.

आईएमडी के महानिदेशक एम. मोहापात्रा ने कहा, “ज्यादातर एल नीनो वाले सालों में भारत में सामान्य से कम बारिश होती है. इस साल भी ऐसा होने की संभावना है. भारत खेती के लिए काफी हद तक बारिश पर निर्भर है, इसलिए इसका असर कई क्षेत्रों पर एक साथ पड़ता है.”

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि सरकार रिकॉर्ड तोड़ एल नीनो के असर को कम करने की तैयारी कर रही है. मंत्रालय ने अलग-अलग विभागों के अधिकारियों की एक टीम बनाई है, जो लगातार मौसम के अनुमान पर नजर रख रही है और राज्यों को सबसे ज्यादा प्रभावित लोगों की मदद के लिए सलाह दे रही है.

समिति से जुड़े मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, “कई स्तरों पर तैयारी की जा रही है. सबसे ज्यादा असर खेती पर पड़ने की संभावना है. हम यह देख रहे हैं कि इस दौरान किसानों को बेहतर आर्थिक मदद और ज़रूरी सुविधाएं कैसे दी जाएं. साथ ही राज्यों की स्वास्थ्य सेवाओं के साथ भी तालमेल किया जा रहा है, ताकि भीषण गर्मी से होने वाली मौतों को कम किया जा सके.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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