नई दिल्ली: दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) अधिकारी अंकित शर्मा के अपहरण, उन्हें बंधक बनाने की नीयत और हत्या के मामले में पूर्व AAP नगर पार्षद मोहम्मद ताहिर हुसैन समेत चार अन्य लोगों को दोषी ठहराया है. सोमवार को दिए गए 320 पन्नों के विस्तृत फैसले में अदालत ने कहा कि ताहिर हुसैन सिर्फ गैरकानूनी भीड़ का हिस्सा नहीं था, बल्कि उसने भीड़ को भड़काने में अहम भूमिका निभाई. इसी भीड़ ने अंकित शर्मा पर बेरहमी से हमला किया, उनकी हत्या की और फिर शव को नाले में फेंक दिया.
फरवरी 2020 में, जब नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) 2019 के खिलाफ प्रदर्शन और प्रस्तावित नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) को लेकर उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा भड़की थी, तब 26 वर्षीय IB अधिकारी अंकित शर्मा चांद बाग पुलिया के पास लापता हो गए थे. हिंसक भीड़ उन्हें घसीटकर स्थानीय पार्षद ताहिर हुसैन के घर ले गई, जहां उन पर 51 बार चाकू से हमला किया गया और बाद में उनका शव पास के एक नाले में फेंक दिया गया.
ताहिर हुसैन के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद आम आदमी पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया था. इसके बाद मार्च 2020 में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था.
सोमवार को दोषी ठहराए जाने के बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश परवीन सिंह की अदालत 23 जुलाई से दोषियों की सजा पर सुनवाई करेगी.
दिप्रिंट की इस रिपोर्ट में उन अहम सबूतों पर नजर डालते हैं, जिनके आधार पर अदालत ने ताहिर हुसैन और अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया.
ताहिर हुसैन का घर
भौतिक और फोरेंसिक सबूतों से साबित हुआ कि ताहिर हुसैन की इमारत (E-7, खजूरी खास) दंगाइयों का मुख्य ठिकाना थी. 28 फरवरी 2020 को फोरेंसिक साइंस लैब (FSL) की टीम ने जांच के दौरान इमारत के बाहर और अंदर मलबा, पत्थर, ईंटें और टूटी हुई कांच की बोतलें बरामद कीं.
सबसे अहम बात यह रही कि इमारत की तीसरी मंजिल और छत से पेट्रोल बम, एसिड बम और गुलेल बरामद हुई. गवाहों ने बताया कि भीड़ ने इन हथियारों का इस्तेमाल दूसरे समुदाय और उनकी संपत्तियों पर हमला करने के लिए किया. इस तरह ताहिर का घर दंगाई भीड़ का रणनीतिक ठिकाना बन गया था.
अभियोजन पक्ष ने कई ऐसे “स्वाभाविक” गवाह पेश किए, जिनकी घटनास्थल के पास मौजूदगी उनके स्थानीय कारोबार या वहां रहने की वजह से साबित हुई.
इलाके में रहने वाली वकील प्रियंका गौर ने गवाही दी कि उन्होंने ताहिर हुसैन को उसके घर के पास सड़क पर देखा था. उन्होंने कहा कि ताहिर अपने हावभाव और इशारों से भीड़ को दयालपुर की तरफ बढ़ने के लिए भड़का रहा था.
पास की ‘बनी बेकर्स’ के मालिक विकल्प कोचर, जिनकी दुकान को लूटकर जला दिया गया था, ने हत्या का विस्तार से विवरण दिया. हालांकि उन्होंने दोपहर 3 बजे से 6 बजे के बीच भीड़ में ताहिर की पहचान नहीं की, लेकिन अदालत ने कहा कि उनकी गवाही से “IB वाले लड़के” की हत्या का समय और उसकी बेरहमी साबित होती है.
आकाश और भारत, जो सगे भाई हैं, चांद बाग पुलिया के पास मौजूद थे. उन्होंने गवाही दी कि ताहिर हुसैन भाषण देकर भीड़ को भड़का रहा था. वह कह रहा था कि हिंदुओं ने मुस्लिमों के घर लूटे हैं और भीड़ से कह रहा था कि “उन्हें सबक सिखाओ.” आकाश ने यह भी गवाही दी कि उसने ताहिर को हाथ में चाकू लिए हुए देखा और वह हमले में शामिल था.
भीड़ को भड़काना और सामूहिक आपराधिक जिम्मेदारी
पुलिस गवाह हेड कांस्टेबल राहुल और प्रवीण कुमार ने गवाही दी कि वहां “आक्रामक, सांप्रदायिक रूप से भड़की हुई और भारी हथियारों से लैस भीड़” मौजूद थी.
फैसले में कहा गया कि दिल्ली पुलिस के मुताबिक हेड कांस्टेबल प्रवीण और राहुल, प्रदीप वर्मा, आकाश, भारत, विकल्प कोचर और प्रियंका गौर ने “स्पष्ट रूप से गवाही दी कि उन्होंने ताहिर हुसैन को भीड़ को सक्रिय रूप से भड़काते हुए देखा. उसके उकसाने पर दंगाई भीड़ और ज्यादा हिंसक हो गई और उसने अंकित शर्मा की हत्या कर दी.” उन्होंने यह भी बताया कि ताहिर भड़काऊ भाषण दे रहा था और भीड़ को हिंदुओं और उनकी संपत्तियों पर हमला करने के लिए उकसा रहा था.
आकाश और भारत के मुताबिक, “ताहिर हुसैन भड़काऊ भाषण दे रहा था. वह कह रहा था कि हिंदुओं ने मुस्लिमों के घर और दुकानें लूटकर जला दी हैं और मुस्लिम महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की है. इसलिए ‘काफिरों’ को सबक सिखाना है. (हिंदुओं ने तुम्हारे घर लूटे… उन काफिरों को सबक सिखाना है.)”
अदालत ने माना कि पुलिस अधिकारियों के बयानों में शुरुआती पुलिस रिपोर्ट की तुलना में कुछ बदलाव थे, लेकिन ताहिर हुसैन की भीड़ में मौजूदगी और नेतृत्व करने की बात अन्य सार्वजनिक गवाहों से भी साबित होती है.
इस मामले में दोषसिद्धि का सबसे अहम आधार भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 149 रही, जो गैरकानूनी भीड़ के सदस्यों की सामूहिक आपराधिक जिम्मेदारी तय करती है.
अदालत ने कहा कि ताहिर हुसैन सैकड़ों लोगों की उस भारी हथियारों से लैस भीड़ का हिस्सा था, जिसका साझा उद्देश्य आगजनी और हिंसा करना था. इसलिए उस भीड़ द्वारा की गई हत्या के लिए भी वह कानूनी रूप से जिम्मेदार है.
फैसले में कहा गया, “कोई भी समझदार व्यक्ति, जो इस भीड़ का सदस्य होता, वह जानता कि यह गैरकानूनी भीड़ डंडों, पत्थरों, पेट्रोल बमों, तलवारों जैसे हथियारों से लैस थी और लगातार दूसरी भीड़ से भिड़ रही थी. सांप्रदायिक नफरत पर आधारित इन झड़पों में यह पूरी संभावना थी कि विरोधी समुदाय का कोई व्यक्ति मारा जा सकता है, ताकि दूसरे समुदाय के लोगों और उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का साझा उद्देश्य पूरा किया जा सके.”
इसी आधार पर ताहिर हुसैन को हत्या (धारा 302) और अपहरण (धारा 365) का दोषी ठहराया गया, भले ही उसने खुद अंतिम वार न किया हो.
अदालत ने कहा कि किसी भी आरोपी ने अभियोजन पक्ष के सबूतों के दौरान, अपने बयान में या बचाव पक्ष के सबूत पेश करते समय यह दावा नहीं किया कि वे सिर्फ वहां मौजूद निर्दोष लोग थे, या सिर्फ तमाशा देख रहे थे, या गैरकानूनी भीड़ के साझा उद्देश्य से उनका कोई लेना-देना नहीं था.
जज सिंह ने कहा, “अभियोजन पक्ष के किसी भी गवाह से इस तरह का कोई सुझाव तक नहीं दिया गया, जिससे यह लगे कि बचाव पक्ष ऐसा कोई बचाव लेना चाहता था. इसके उलट, भीड़ की प्रकृति, उसकी गतिविधियों और उस समय की स्थिति को देखते हुए यह मानना बेहद मुश्किल है कि इस भीड़ का कोई सदस्य सिर्फ तमाशा देखने आया होगा.”
धारा 144 और फोरेंसिक सबूत
दिल्ली पुलिस ने साबित किया कि घटना के समय दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 144 लागू थी.
अभियोजन पक्ष के गवाह सहायक उप-निरीक्षक नरेश पाल और कांस्टेबल पवन कुमार ने पुष्टि की कि धारा 144 लागू की गई थी और चांद बाग तथा करावल नगर इलाके में लाउडस्पीकर के जरिए इसकी घोषणा भी की गई थी.
अदालत ने माना कि ताहिर हुसैन का इतनी बड़ी हिंसक भीड़ का हिस्सा बनना इस आदेश का सीधा उल्लंघन था. इसी आधार पर उसे IPC की धारा 188 के तहत भी दोषी ठहराया गया.
आखिर में, खजूरी नाले से अंकित शर्मा का शव बरामद होने को ताहिर हुसैन की इमारत के पास हुई हिंसा से जोड़ा गया.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि अंकित शर्मा के शरीर पर धारदार और कुंद हथियारों से किए गए 51 बाहरी घाव थे. इससे साफ हुआ कि उनकी हत्या की गई थी.
ताहिर हुसैन के घर के पास नाले की दीवार से लिए गए खून के नमूनों का DNA मृतक के DNA से मेल खा गया. इससे हत्या की जगह की पुष्टि हो गई.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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