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Wednesday, 15 July, 2026
होमदेशअंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर की दलील 'FIR में देरी' पर टिकी, कोर्ट ने सबूतों को दी अहमियत

अंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर की दलील ‘FIR में देरी’ पर टिकी, कोर्ट ने सबूतों को दी अहमियत

कोर्ट ने कहा कि हुसैन के बचाव पक्ष ने जांच में कमियों की ओर इशारा तो किया, लेकिन यह साबित नहीं कर पाए कि इन कमियों से उन्हें कोई नुकसान हुआ या अभियोजन पक्ष के सबूत अविश्वसनीय हो गए.

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नई दिल्ली: इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के छह साल से ज्यादा समय बाद, दिल्ली की एक अदालत ने पूर्व AAP पार्षद ताहिर हुसैन और चार अन्य लोगों को दोषी ठहराया. अदालत ने कहा कि जांच में कमियां और FIR को लेकर सवाल होने के बावजूद, अभियोजन पक्ष ने ताहिर हुसैन के दोष को स्वतंत्र और भरोसेमंद सबूतों के आधार पर संदेह से परे साबित कर दिया.

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने सोमवार को अपने 320 पन्नों के आदेश में एक अहम सिद्धांत पर जोर दिया, जो आपराधिक मुकदमों में लागू होता है: प्रक्रियात्मक खामियां, चाहे कितनी भी गंभीर हों, अपने आप विश्वसनीय सबूतों को खत्म नहीं कर सकतीं.

अदालत ने कहा कि ताहिर हुसैन की तरफ से जांच में कई विरोधाभासों और कमियों की ओर इशारा किया गया. लेकिन बचाव पक्ष यह नहीं दिखा सका कि इन कमियों से उन्हें कोई वास्तविक नुकसान हुआ या अभियोजन पक्ष के सबूत अविश्वसनीय हो गए.

ताहिर की तरफ से अभियोजन के खिलाफ मुख्य दलीलों में से एक यह थी कि FIR बाद में दर्ज की गई थी और संभवतः उसे गढ़ा गया था या जानबूझकर देर से दर्ज किया गया था.

इसे खारिज करते हुए अदालत ने कहा, “अगर कोई FIR गढ़ी हुई, पहले की तारीख में दर्ज दिखाई गई, या जानबूझकर देर से दर्ज की गई पाई जाती है, तो ऐसी स्थिति केवल अदालत पर यह अतिरिक्त जिम्मेदारी डालती है कि वह सबूतों की और अधिक सावधानी और सतर्कता से जांच करे.”

अदालत ने कहा कि FIR से अलग, अगर अभियोजन पक्ष भरोसेमंद सबूतों के आधार पर अपना मामला संदेह से परे साबित कर देता है, तो ऐसी खामियों को अभियोजन के लिए घातक नहीं माना जा सकता.

अदालत ने ताहिर हुसैन को हत्या, दंगा, घातक हथियारों के साथ दंगा, वैमनस्य फैलाने, हमला और आपराधिक बल प्रयोग से संबंधित धाराओं में दोषी ठहराया.

दोषी ठहराए गए अन्य सह-आरोपियों में हसीन उर्फ मुल्लाजी उर्फ सलमान, कासिम, समीर खान और शोएब आलम उर्फ बॉबी शामिल हैं. अदालत ने छह अन्य आरोपियों को बरी कर दिया.

मामले की शुरुआत

यह मामला दयालपुर पुलिस स्टेशन में अंकित शर्मा के पिता रविंदर कुमार की शिकायत पर दर्ज FIR से शुरू हुआ.

शिकायत के अनुसार, इंटेलिजेंस ब्यूरो अधिकारी अंकित शर्मा 25 फरवरी 2020 को काम से घर लौटे थे. इसके बाद वे फिर बाहर गए, जब नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के समर्थन और विरोध में चल रहे प्रदर्शन और जवाबी प्रदर्शन के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा फैल गई थी.

जब वे वापस नहीं लौटे, तो परिवार ने उनकी तलाश शुरू की. अगले दिन स्थानीय लोगों ने बताया कि उनका शव चांद बाग पुलिया के पास खजूरी खास नाले में देखा गया है. बाद में शव को नाले से बरामद किया गया.

मृतक के पिता ने आरोप लगाया कि अंकित की हत्या ताहिर हुसैन और अन्य लोगों ने की, जो उस समय AAP पार्षद के कार्यालय में इकट्ठा हुए थे. इसके बाद शव को ठिकाने लगाया गया. ताहिर हुसैन को बाद में AAP ने निलंबित कर दिया था. मार्च 2023 में उनके और 10 अन्य लोगों के खिलाफ आरोप तय किए गए.

ताहिर हुसैन ने दलील दी थी कि जांच एजेंसियां 6 मार्च 2020 तक जानबूझकर निष्क्रिय रहीं, ताकि वे झूठे सबूत तैयार कर सकें, गवाहों को सिखा सकें और एक गलत अभियोजन कहानी बना सकें.

ताहिर की मुख्य दलीलों में से एक यह थी कि FIR अभियोजन पक्ष के दावे से काफी बाद में दर्ज की गई थी और उसे जानबूझकर 26 फरवरी 2020 को दर्ज दिखाया गया.

ताहिर के अनुसार, यदि पोस्टमार्टम के समय FIR पहले ही दर्ज हो चुकी होती, तो संबंधित दस्तावेजों पर केवल दैनिक डायरी (DD) एंट्री नंबर के बजाय FIR नंबर भी होता. उन्होंने यह भी कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 157, जिसमें संज्ञेय अपराधों की तुरंत रिपोर्टिंग और जांच की आवश्यकता होती है, का पालन नहीं किया गया.

अदालत ने कहा कि FIR का जल्दी दर्ज होना झूठे मामलों या अभियोजन की कहानी में बाद में बदलाव की संभावना को कम करने के लिए महत्वपूर्ण है. लेकिन कानून यह भी साफ कहता है कि देरी या अनियमितता से अपने आप जांच अमान्य नहीं हो जाती.

अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि FIR बाद में भी दर्ज हुई हो, तब भी आरोपी को इसका लाभ तभी मिल सकता है जब यह साबित हो कि उस अनियमितता से उसे गंभीर नुकसान हुआ या न्याय में चूक हुई.

अदालत ने कहा कि इस मामले में आरोपी ऐसा कोई नुकसान साबित करने में विफल रहा.

‘हिंदुओं के खिलाफ दुर्भावना’

अदालत ने ताहिर हुसैन को तीन मुख्य आधारों पर दोषी ठहराया: प्रत्यक्षदर्शी और परिस्थितिजन्य सबूत लगातार यह दिखाते हैं कि हिंसा के दौरान चांद बाग पुलिया पर मौजूद गैरकानूनी भीड़ का हिस्सा ताहिर हुसैन थे. ताहिर द्वारा उठाए गए किसी भी मुद्दे से मुकदमे में पेश किए गए सबूत गलत साबित नहीं हुए. और बचाव पक्ष की कई थ्योरी किसी सबूत से समर्थित नहीं थीं.

हालांकि अभियोजन पक्ष का एक अहम गवाह मुकदमे के दौरान अपने बयान को कमजोर करने की कोशिश करता दिखा, लेकिन न्यायाधीश ने माना कि उस गवाह को “प्रभावित कर लिया गया था”. इसलिए अदालत ने मजिस्ट्रेट के सामने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत दर्ज उसके पहले के बयान पर भरोसा किया.

सबूतों और गवाहों की जांच के बाद अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने “सभी उचित संदेह से परे सफलतापूर्वक साबित कर दिया” कि घटना के समय, 25 फरवरी 2020 को शाम लगभग 5 बजे, ताहिर एक बड़ी भीड़ और गैरकानूनी सभा का सदस्य था. यह भीड़ “हिंदुओं के खिलाफ दुर्भावना के साथ चांद बाग पुलिया पर एकत्र हुई थी, जिसका सामान्य उद्देश्य दंगा करना, लूटपाट, आगजनी और हिंदू समुदाय के लोगों की संपत्ति और व्यक्तियों को नुकसान पहुंचाना था.”

अदालत ने आगे कहा कि इस गैरकानूनी सभा के सदस्यों को यह जानकारी थी कि इस सभा के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के दौरान मृत्यु हो सकती है और “किसी की हत्या हो सकती है.”

ताहिर ने यह भी दलील दी थी कि मामले में कई प्रक्रियात्मक खामियां थीं, जैसे कि पीछे की तारीख में दर्ज FIR, पिता की मूल शिकायत में बदलाव, जांच में देरी, और शव की बरामदगी में विरोधाभास. लेकिन अदालत ने कहा कि इनमें से कोई भी बात अपने आप मुकदमे में पेश किए गए सबूतों को गलत साबित नहीं करती.

पिता की मूल शिकायत बदले जाने की दलील एक पहले की दैनिक डायरी एंट्री से जुड़ी थी, जिसमें कथित तौर पर रविंदर कुमार ने कहा था कि उन्हें किसी पर शक नहीं है. लेकिन FIR का आधार बनी शिकायत में स्पष्ट रूप से आरोप लगाया गया था कि ताहिर हुसैन और उनके कार्यालय में मौजूद लोगों ने अंकित शर्मा की हत्या की.

हालांकि अदालत ने कहा कि मृतक के पिता ने गवाही दी थी कि उनके बेटे का शव मिलने से एक रात पहले, वे पुलिस अधिकारियों के साथ अंकित शर्मा की तलाश में ताहिर हुसैन के घर गए थे. लेकिन वहां न तो अंकित मिले और न ही उनका शव.

अदालत के अनुसार, इससे स्पष्ट रूप से यह स्थापित होता है कि शव मिलने से पहले ही आरोपी ताहिर हुसैन की संलिप्तता को लेकर संदेह पैदा हो गया था. यही कारण था कि अंकित शर्मा के लापता होने वाले दिन ही उनके परिसर की तलाशी ली गई.

अदालत ने यह भी कहा कि जिस जांच अधिकारी पर शिकायत में हेरफेर करने का आरोप लगाया गया था, उसने मामला क्राइम ब्रांच को सौंपे जाने से पहले लगभग कोई जांच नहीं की थी. वहीं नए जांच अधिकारी ने केवल FIR में नाम होने के आधार पर ताहिर को तुरंत गिरफ्तार नहीं किया.

अदालत ने कहा कि ये परिस्थितियां इस सुझाव को कमजोर करती हैं कि FIR केवल ताहिर हुसैन को फंसाने के लिए गढ़ी गई थी.

अंत में अदालत ने पाया कि बचाव पक्ष की कई थ्योरी, जिनमें यह दावा भी शामिल था कि नाले से बरामद शव अंकित शर्मा का नहीं था, किसी सबूत से समर्थित नहीं थीं. अदालत ने कहा कि ये दलीलें संदेह पैदा करने की कोशिश थीं, न कि उसे साबित करने की.

अदालत ने ताहिर की जांच में देरी वाली दलील को भी खारिज कर दिया. अदालत ने कहा कि केवल निष्क्रियता के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि जांचकर्ताओं ने सबूत गढ़ने के लिए जानबूझकर जांच में देरी की.

अदालत ने कहा, “ऐसा निष्कर्ष केवल निष्क्रियता के आधार पर नहीं निकाला जा सकता, जब तक रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री से यह आगे साबित न हो कि बीच का समय वास्तव में झूठे सबूत तैयार करने, गवाहों को सिखाने, या पहले से तय अभियोजन कहानी के अनुसार बयान दर्ज करने में इस्तेमाल किया गया था.”

ताहिर के वकीलों ने यह भी दावा किया कि नाले से बरामद शव अंकित शर्मा का नहीं था. इसके समर्थन में उन्होंने कहा कि शवगृह (मॉर्चरी) टिकट मौजूद नहीं था, शव के अस्पताल पहुंचने के समय कोई पारिवारिक सदस्य मौजूद नहीं था, और फोरेंसिक रिपोर्ट में घटनास्थल से बरामद प्लास्टिक शीट पर मिले खून में एक अन्य अज्ञात व्यक्ति का DNA भी पाया गया.

इस दलील को भी खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि अंकित शर्मा के शव की पहचान उनके पिता ने की थी. मेडिकल और फोरेंसिक सबूतों ने नाले से लेकर GTB अस्पताल तक शव की कस्टडी की पूरी श्रृंखला को लगातार स्थापित किया.

DNA रिपोर्ट के बारे में अदालत ने कहा कि वह केवल यह स्थापित करती है कि घटनास्थल पर दो व्यक्तियों का खून मौजूद था.

अदालत ने टिप्पणी की, “यह कैसे इस निष्कर्ष तक पहुंचाता है कि वहां से दूसरा शव भी बरामद हुआ था, यह मेरी समझ से परे है.” अदालत ने इस दलील को अदालत को भ्रमित करने का प्रयास बताया.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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