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Thursday, 2 July, 2026
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ASI 2024 में आए असिस्टेंट आर्कियोलॉजिस्ट के 50 पदों को भरने में क्यों कर रहा है देरी?

जो काम शुरू में एक तेज़ भर्ती प्रक्रिया के तौर पर शुरू हुआ था, वह अब एएसआई की सबसे लंबी चलने वाली चयन प्रक्रियाओं में से एक बन गया है. असिस्टेंट आर्कियोलॉजिस्ट के मंज़ूर किए गए 150 पदों में से 79 पद खाली हैं.

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नई दिल्ली: जब इस साल अप्रैल में 200 से ज़्यादा युवा उम्मीदवार डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए दिल्ली में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) के हेडक्वार्टर पहुंचे, तो कई लोगों को लगा कि मंज़िल अब बस पास ही है.

वे पहले ही सबसे मुश्किल पड़ावों में से एक पार कर चुके थे. स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (एसएससी) ने जून 2024 में असिस्टेंट आर्कियोलॉजिस्ट के 50 पदों के लिए परीक्षा आयोजित की थी और दो महीने बाद नतीजे घोषित किए गए थे. लगभग दो साल के इंतज़ार, अपनी योग्यताओं की बार-बार जांच और कई दौर के वेरिफिकेशन के बाद, ऐसा लग रहा था कि अपॉइंटमेंट लेटर मिलने में बस कुछ ही दिन बचे हैं.

लेकिन उम्मीदवारों को एक ईमेल के ज़रिए एक और निराशा हाथ लगी.

24 जून को, 67 उम्मीदवारों को एएसआई से एक नया मैसेज मिला जिसमें उनसे एक बार फिर यह साबित करने को कहा गया कि वे इस पद के लिए ज़रूरी एजुकेशनल क्वालिफिकेशन (EQ) को पूरा करें. उन्हें अतिरिक्त सबूत जमा करने के लिए सिर्फ एक हफ्ते का समय दिया गया. हिस्ट्री ग्रेजुएट्स के लिए, अब ज़रूरत को सिर्फ प्राचीन और मध्यकालीन भारतीय इतिहास तक सीमित कर दिया गया है, जिसमें यह भी साफ तौर पर बताया गया है कि मध्यकालीन इतिहास किस सदी से शुरू होता है. जब पद के लिए विज्ञापन निकाला गया और परीक्षाएं हुईं, तो एएसआई ने ऐसी कोई जानकारी नहीं दी थी.

एएसआई के एक ईमेल में लिखा था, “यह देखा गया है कि आपके द्वारा बताई गई एजुकेशनल क्वालिफिकेशन, असिस्टेंट आर्कियोलॉजिस्ट के पद के लिए रिक्रूटमेंट नियमों के तहत तय की गई ज़रूरी एजुकेशनल क्वालिफिकेशन से मेल नहीं खाती है.” दिप्रिंट ने यह ईमेल देखा है.

एएसआई द्वारा एक उम्मीदवार को भेजे गए पत्र का स्क्रीनशॉट | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट
एएसआई द्वारा एक उम्मीदवार को भेजे गए पत्र का स्क्रीनशॉट | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट

कई लोगों के लिए, भर्ती प्रक्रिया खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है. इस देरी से लगभग 250 उम्मीदवारों में निराशा बढ़ रही है, जिन्हें बार-बार जांच और अपनी योग्यता साबित करने की नई-नई मांगों का सामना करना पड़ा है. उम्मीदवार एएसआई पर आरोप लगा रहे हैं कि वह बार-बार नियम बदल रहा है और योग्यता नियमों की बहुत ज़्यादा तकनीकी व्याख्या कर रहा है. दूसरी ओर, संगठन का कहना है कि लंबी वेरिफिकेशन प्रक्रिया का मकसद भर्ती के उन पुराने नियमों को ठीक करना है जिनकी वजह से बिना आर्कियोलॉजी बैकग्राउंड वाले उम्मीदवार भी विभाग में आ जाते थे—भले ही विभाग को देश भर में हज़ारों खाली पदों को भरने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा हो.

भर्ती प्रक्रिया जून 2024 में आयोजित की गई थी और नतीजे दो महीने के भीतर जारी कर दिए गए थे. तब से, एएसआई ने एसएससी के ज़रिए रिजेक्ट और चुने गए उम्मीदवारों की ज़रूरी क्वालिफिकेशन की अस्थायी और अंतिम लिस्ट जारी की है, लेकिन उसने अभी तक ज़रूरी 50 उम्मीदवारों को फाइनल नहीं किया है.

एसएससी की सबसे तेज़ भर्ती प्रक्रियाओं में से एक के तौर पर शुरू हुई यह प्रक्रिया, जिसमें विज्ञापन से लेकर नतीजे तक का समय पहले एक साल से ज़्यादा लगता था, अब घटकर 6 महीने हो गया था—बाद में इसकी सबसे लंबी चयन प्रक्रियाओं में से एक बन गई. पूरे देश में असिस्टेंट आर्कियोलॉजिस्ट (सहायक पुरातत्वविद्) के मंज़ूर पदों की संख्या 150 है, जिनमें से 79 पद खाली हैं. एएसआई कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रहा है. एएसआई के 38 सर्किलों में मंज़ूर 7,585 पदों में से 2,646 पद खाली हैं.

इन 50 पदों में से 22 पद अनारक्षित श्रेणी के लिए, 13 ओबीसी के लिए, सात एससी के लिए, पांच ईडब्ल्यूएस के लिए और तीन एसटी के लिए हैं. उम्मीदवारों के लिए, हर नई लिस्ट उम्मीद लेकर आई, जिसके बाद नई ज़रूरतें और मांगें सामने आईं, और फिर एक और झटका लगा.

एक उम्मीदवार, जिसे योग्यता की शर्तें पूरी न करने के आधार पर रिजेक्ट कर दिया गया था, ने कहा, “एसएससी द्वारा नतीजे घोषित किए जाने के बाद भी एएसआई भर्ती प्रक्रिया में लगातार देरी कर रहा है. इससे उन छात्रों में चिंता और दबाव पैदा होता है जिन्होंने परीक्षा पास करने के लिए कड़ी मेहनत की थी.”

इसी तरह सैकड़ों उम्मीदवारों को रिजेक्ट किया गया है.

भर्ती के नियमों के तहत पहले उम्मीदवारों के पास आर्कियोलॉजी (पुरातत्व), भारतीय इतिहास (प्राचीन या मध्यकालीन), एंथ्रोपोलॉजी (जिसमें स्टोन एज आर्कियोलॉजी एक पेपर हो), या जियोलॉजी (जिसमें प्लीस्टोसीन जियोलॉजी एक पेपर हो) में मास्टर डिग्री होना ज़रूरी था.

लिखित परीक्षा के बाद एसएससी द्वारा शॉर्टलिस्ट किए गए 987 उम्मीदवारों में से, एएसआई ने आखिरकार 733 उम्मीदवारों को इस आधार पर रिजेक्ट कर दिया कि वे ज़रूरी योग्यता की शर्तें पूरी नहीं करते थे.

एएसआई अधिकारियों का कहना है कि संगठन को नुकसान हुआ है क्योंकि उसने पहले ऐसे उम्मीदवारों को भर्ती किया था जिनका बैकग्राउंड आर्कियोलॉजी का नहीं था. अब वह इस समस्या को ठीक करने की कोशिश कर रहा है. लेकिन उम्मीदवारों के लिए, यह उठा-पटक समय और भावनाओं की भारी बर्बादी है.

एएसआई के डायरेक्टर जनरल यदुबीर सिंह रावत ने दिप्रिंट को बताया, “उम्मीदवारों की जांच-पड़ताल में समय लगता है. हम भर्ती में कोई गलती नहीं करना चाहते. हमें कई उम्मीदवारों की ज़रूरत नहीं है क्योंकि उनका आर्कियोलॉजी बैकग्राउंड नहीं है. लेकिन पहले, भर्ती के नियम लचीले थे और उनमें गैर-आर्कियोलॉजी बैकग्राउंड वाले लोगों के आने की गुंजाइश थी. अब, हम इस पैटर्न को बदल रहे हैं और भविष्य की भर्तियों के लिए इस साल भर्ती के नए नियम लेकर आए हैं.

ग्राफिक: श्रुति नैथानी/दिप्रिंट
ग्राफिक: श्रुति नैथानी/दिप्रिंट

‘लगातार डर के साये में जीना’

जांच की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी हुई. अगस्त 2025 में, परीक्षा के नतीजे आने के लगभग एक साल बाद, एसएससी ने 246 उम्मीदवारों की योग्यता को स्वीकार करते हुए एक अस्थायी सूची जारी की.

एसएससी (उत्तरी क्षेत्र) की अधिसूचना में कहा गया, “सूची में नाम शामिल होने का मतलब यह नहीं है कि उनकी उम्मीदवारी पक्की हो गई है. संबंधित विभाग द्वारा तय समय पर उम्मीदवारों को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए बुलाया जाएगा और सत्यापन के दौरान सभी मूल दस्तावेज़ों की बारीकी से जांच की जाएगी.”

सूची जारी होने के सात महीने बाद, एसएससी ने अंतिम ईक्यू (आवश्यक योग्यता) सूची जारी की. इस बार 254 उम्मीदवारों को योग्य घोषित किया गया.

बाकी बचे 733 उम्मीदवारों में से 296 को इसलिए खारिज कर दिया गया क्योंकि उन्होंने तय तारीख या उससे पहले दस्तावेज़ अपलोड नहीं किए थे. 437 अन्य उम्मीदवारों को इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि कुछ के पास साइंस की डिग्री थी, जबकि दूसरों के पास 2019 के भर्ती नियमों के तहत ज़रूरी डिग्री नहीं थी.

फिर भी, अंतिम सूची से नौकरी पक्की होने की गारंटी नहीं मिली.

एएसआई ने 20-24 अप्रैल के बीच अपने मुख्यालय, धरोहर भवन में दस्तावेज़ सत्यापन के लिए 254 योग्य उम्मीदवारों को बुलाया.

दिप्रिंट से बात करने वाले कई उम्मीदवारों ने आरोप लगाया कि दस्तावेज़ सत्यापन के दौरान उन्हें बताया गया कि उनकी पोस्ट-ग्रेजुएट डिग्री भर्ती नियमों के बारे में एएसआई की व्याख्या के अनुरूप नहीं हैं.

यहां तक कि इतिहास विषय में भी, अब खास दौर में विशेषज्ञता की एक नई और सीमित मांग की जा रही है.

एसटी श्रेणी से आने वाले मंगुलुन हाओकिप भी उन उम्मीदवारों में से एक थे जिन्हें इसी वजह से खारिज कर दिया गया.

अंतिम ईक्यू अस्वीकृत सूची में टिप्पणी लिखी थी, “भर्ती नियमों (आरआर) के अनुसार ज़रूरी योग्यता पूरी नहीं हुई. उम्मीदवार के पास एमए (इतिहास) की डिग्री है, लेकिन उनके पास प्राचीन भारतीय इतिहास या मध्यकालीन भारतीय इतिहास विषय या पेपर के तौर पर नहीं है.”

छात्रों का आरोप है कि एएसआई अधिकारियों के लिए मध्यकालीन इतिहास सातवीं सदी से शुरू होता है, लेकिन उन्होंने अपनी यूनिवर्सिटी में इसे 12वीं सदी से पढ़ा था. उनकी डिग्री में इस अंतर का कोई ज़िक्र नहीं है.

एक आवेदक ने कहा, “इन तकनीकी बारीकियों के आधार पर उम्मीदवारों को खारिज किया जा रहा है. एएसआई इस मामले में बहुत ज़्यादा तकनीकी हो रहा है और उम्मीदवारों को खारिज कर रहा है.”

भर्ती के विज्ञापन में मध्यकालीन भारतीय इतिहास को परिभाषित करने वाली किसी खास समय-सीमा या अवधि का ज़िक्र नहीं था.

उम्मीदवार अब अपने आवेदन की स्थिति जानने के लिए अक्सर एएसआई मुख्यालय जा रहे हैं.

एक उम्मीदवार ने कहा, “मैं दो साल से नौकरी का इंतज़ार कर रहा था, लेकिन अब मुझे हर समय इस बात का डर सताता रहता है कि कहीं रिजेक्शन मेरी ज़िंदगी बर्बाद न कर दे.”

एक तीसरे उम्मीदवार ने कहा कि यह मौका उसके लिए सिर्फ एक नौकरी नहीं है.

उसने कहा, “यह मेरे और मेरे परिवार की बरसों की कड़ी मेहनत, लगन और अनगिनत त्याग का नतीजा है.” उसने आगे कहा कि ज़रूरी योग्यताएं पूरी करने के बावजूद ‘प्रोविज़नल स्टेटस’ में रखे जाने की वजह से उसे बहुत ज़्यादा मानसिक परेशानी, बेचैनी और भविष्य को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है.

‘एक पुरानी समस्या को ठीक करना’

रावत के लिए पुरातत्व एक खास विषय है और विभाग को ऐसे लोगों की ज़रूरत है जिन्हें इस विषय की खास जानकारी हो.

रावत ने कहा, “दुर्भाग्य से, पहले के कुछ भर्ती नियमों की वजह से, पुरातत्व से अलग क्षेत्रों के लोग एसएससी परीक्षा पास करके एएसआई में आ गए. इससे संस्थान को बहुत नुकसान होता है.” उन्होंने आगे कहा कि अगर पुराने नियमों के आधार पर लोगों को नौकरी दी जाती रही, तो एएसआई का भविष्य अच्छा नहीं होगा.

रावत अब इन नियमों को बदलने के मिशन पर हैं. अप्रैल 2026 में, एएसआई ने असिस्टेंट आर्कियोलॉजिस्ट के पद के लिए भर्ती नियमों में बदलाव का ड्राफ्ट पेश किया.

2019 के नियमों के उलट, प्रस्तावित बदलावों के तहत एंथ्रोपोलॉजी (मानव विज्ञान) और जियोलॉजी (भू-विज्ञान) के ग्रेजुएट परीक्षा में शामिल नहीं हो पाएंगे. इसके बजाय, भविष्य के आवेदकों के पास प्राचीन या मध्यकालीन भारतीय इतिहास में मास्टर डिग्री होनी चाहिए, साथ ही कम से कम दो खास विषय होने चाहिए, जैसे कि फील्ड आर्कियोलॉजी, कला और वास्तुकला, एपिग्राफी (अभिलेख शास्त्र), या न्यूमिज़मैटिक्स (मुद्राशास्त्र).

अलग-अलग सर्किलों में तैनात एएसआई अधिकारी भर्ती के नए नियमों का स्वागत करते हैं.

उत्तर भारत में तैनात एक सुपरिटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट (एसए) ने कहा, “पिछले दशक में, एसएसी के ज़रिए भर्ती किए गए लोगों में पुरातत्व की जानकारी की कमी रही है, जिससे हमारे रोज़मर्रा के काम पर असर पड़ता है. हमें विषय के जानकारों की ज़रूरत है और हमें उम्मीद है कि नए नियमों से हालात बेहतर होंगे.”

रावत के मुताबिक, नए नियमों से यह पक्का होगा कि सिर्फ खास जानकारी रखने वाले लोग ही एएसआई में आएं.

रावत ने कहा, “अभी एएसआई पूरी तरह से ट्रेंड सीनियर लोगों पर निर्भर है. हमें ट्रेंड युवा वर्कफोर्स तैयार करनी है. इसके लिए हमने नियम बदले हैं. इन गड़बड़ियों को ठीक करने की ज़िम्मेदारी मेरी है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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