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Wednesday, 14 January, 2026
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RSS और योगी आदित्यनाथ के बीच तालमेल बेहतर हो रहा है, लेकिन CM को अभी कई काम पूरे करने हैं

योगी आदित्यनाथ को सिर्फ विपक्ष से ही मुकाबला नहीं है. बीजेपी के अंदर भी उनके विरोधी कम ताकतवर नहीं हैं.

एक दरगाह और बहिष्कार—महाराष्ट्र के अहिल्यनगर का गांव कैसे बन गया सांप्रदायिक तनाव का केंद्र

गूहा में मुस्लिमों का आरोप है कि उन्हें 'सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार' का सामना करना पड़ रहा है, जबकि हिंदू इन दावों से इनकार करते हैं. इस सांप्रदायिक विवाद का प्रभाव पड़ोसी गांवों और तहसीलों में भी दिखाई देने लगा है.

क्या दिल्ली यूनिवर्सिटी का क्रेज खत्म हो गया है? खाली सीटें, अनफ़िट फैकल्टी और भारी सिलेबस

दिल्ली यूनिवर्सिटी की हैरान करने वाली गिरावट भारत के पब्लिक यूनिवर्सिटी सिस्टम के लिए सबसे बड़े झटकों में से एक है. और फिर भी, कोई भी इसे बचाने की जल्दी में नहीं दिखता.

वॉशिंगटन शूटर की कहानी अमेरिकी बर्बरता की है, ‘थर्ड वर्ल्ड’ की पिछड़ेपन की नहीं

CIA-प्रशिक्षित ज़ीरो यूनिट का हिस्सा रहे रहमानुल्लाह लाकनवाल को 2021 में काबुल गिरने से पहले अमेरिका ले जाया गया था, लेकिन लंबा सफर भी उसके दिमाग से खून के धब्बे नहीं मिटा सका.

मिलिट्री कोचिंग सेंटर अब हैं नया UPSC, छोटे शहर ‘सर्वोच्च बलिदान’ की तैयारी में जुटे

भारत के ‘आर्मी ड्रीम’ ने मेरठ, सीकर और रोहतक जैसे टियर-2 और टियर-3 शहरों में एक नया संगठित मिलिट्री कोचिंग सेक्टर खड़ा कर दिया है. यहां डिफेंस लाइफस्टाइल, ‘ऑफिसर जैसी खूबियां’ और एनडीए, सीडीएस, एएफसीएटी में सिलेक्शन का वादा किया जाता है.

जर्मन बेकरी से मुंबई ट्रेन ब्लास्ट तक: कोर्ट की सुनवाई धीमी, आतंकी ट्रायल आज भी पन्नों में फंसे

1996 लाजपत नगर ब्लास्ट से लेकर 2011 दिल्ली हाई कोर्ट ब्लास्ट तक, कई आतंकी मामले अदालतों की लंबी और उलझी प्रक्रिया में अटके पड़े हैं.

भारत की नाकामी के लिए मैकाले को दोष देना उस आलसी राजनीति का हिस्सा है, जो 1947 के बाद से चल रही है

मैकाले का इरादा भारतीय नेताओं और बुद्धिजीवियों द्वारा फैलाए गए इरादे से काफी अलग था, जो अपने ही सांप्रदायिक दिमाग वाले कमरों में रहना पसंद करते है.

एक थप्पड़, एक रेडिट पोस्ट और पीलिया का डर—VIT भोपाल में हिंसा की रात से पहले क्या कुछ हुआ

यह हिंसा, जिसकी अब राज्य सरकार जांच कर रही है, उस यूनिवर्सिटी के लिए मुश्किल सवाल खड़े करती है जो नेशनल लेवल पर अपनी पहचान का दावा करती है, फिर भी अपने कैंपस को गड़बड़ी में जाने से रोकने में नाकाम रही.

सावरकर से भी पहले बंकिम चंद्र को ‘पहला हिंदू राष्ट्रवादी’ क्यों माना जाता है?

हंटर के कॉलोनियल इतिहास से लेकर मुस्लिम शासकों को हटाने वाले तपस्वी योद्धाओं तक, बंकिम के *आनंदमठ* ने हिंदू राष्ट्र की नींव रखी, बहुत पहले, जब उसके राजनीतिक समर्थक भी नहीं उभरे थे.

धर्मेंद्र के समय लोग काम से पहचाने जाते थे, अब मीट पुलिस रणबीर कपूर की डाइट से फैसला करती है

जब रणबीर कपूर को रामायण में कास्ट किया गया, तो PR टीम ने कहा कि वह शूटिंग के दौरान मीट खाना छोड़ देंगे - यह एक बेवकूफी वाली बात थी क्योंकि इससे मीट पुलिस हाई अलर्ट पर आ गई.

मत-विमत

जेन-Z आंदोलन के बाद फिर पुरानी राजनीति, नेपाल की पार्टियां ‘स्टार्टिंग पॉइंट’ पर लौटीं

एक स्थिर नेपाल के लिए आगे का रास्ता लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने, समावेशी संवाद के जरिए राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करने और कानून के शासन को बनाए रखने में है.

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राज ठाकरे के अदाणी पर हमला किए जाने से भाजपा को क्यों ठेस पहुंची: मनसे

मुंबई, 13 जनवरी (भाषा) महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने मंगलवार को सवाल उठाया कि नगर निकाय चुनावों के प्रचार के दौरान पार्टी अध्यक्ष राज...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.