कर्नाटक की पीरियड लीव पॉलिसी तारीफ के काबिल है, लेकिन यही देश है जहां किसी भी वक्त मासिक धर्म वाली महिलाओं को बेइज़्ज़त और अपमानित किया जा सकता है — बिना किसी झिझक के.
पाकिस्तान अफगानों की उग्र स्वतंत्र मानसिकता और पख्तून राष्ट्रवाद की दृढ़ता को समझने में नाकाम रहा. यह राष्ट्रवाद 1747 में अफगानिस्तान की स्थापना के साथ ही उसकी सियासत पर हावी रहा है.
छात्रों को यह मामला एक वीडियो क्लिप से पता चला जिसमें कार्यकर्ता और सफाईकर्मी असिस्टेंट रजिस्ट्रार से सवाल कर रहे थे, लेकिन यह संदेश किसी बातचीत की वजह नहीं बना.
इंदिरा गांधी की लोकप्रियता की वजह यह है कि वह एक ऐसी विभाजनकारी शख्सियत थीं जिनके प्रति लोगों की भावनाएं बहुत गहरी थीं — चाहे प्यार हो या नफरत. यहां तक कि जो लोग उन्हें पसंद नहीं करते, वे भी उनके जीवन से जुड़ी कहानियां बड़े उत्साह से सुनाते हैं.
सरदार पटेल स्टेडियम का नाम 2021 में नरेंद्र मोदी स्टेडियम रखे जाने पर भी यही झलक दिखी—जब अपने छवि निर्माण के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने सरदार के नाम को भी पीछे छोड़ दिया.
बिहार में चुनावी माहौल है और हर बड़ा दल खुद को कर्पूरी ठाकुर की विरासत का असली वारिस बता रहा है. दिप्रिंट आपको बता रहा है कि आखिर क्या कर्पूरी ठाकुर की राजनीतिक विरासत.
वाराणसी के सामाजिक कार्यकर्ता रजनी कांत, 2030 तक 10,000 जीआई टैग हासिल करने के मोदी सरकार के मिशन में एक अग्रणी प्रकाश स्तंभ हैं. यह भारत को फिर से 'सोने की चिड़िया' बनाने का उनका तरीका है.
कार्यकारी याचिकाएं क्या हैं, उन्हें मिनी सिविल सूट क्यों कहा जाता है और सुप्रीम कोर्ट की 6 महीने की समय सीमा के बावजूद भारत की जिला अदालतों में दशकों से 8 लाख से अधिक याचिकाएं क्यों लंबित हैं.
इंडिया आर्ट फेयर में सबसे ज़्यादा चर्चा में रहने वाला आर्टवर्क किसी परिभाषा में नहीं बंधता—गिरजेश कुमार सिंह मलबे से निकाली गई ईंटों से लोगों और उनके बैग की मूर्तियां बनाते हैं. इस प्रदर्शनी का नाम 'हाल मुकाम' है.