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Sunday, 8 February, 2026
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ज़ोहरान ममदानी की न्यूयॉर्क जीत ने याद दिलाई गुजराती मुस्लिमों की भूली-बिसरी कहानी

मुगल दौर के बंदरगाहों से लेकर डचों से हुए समुद्री युद्धों और बॉम्बे के व्यापारी घरानों तक — गुजराती मुस्लिमों ने कभी हिंद महासागर की दुनिया को आकार दिया था, बहुत पहले, जब उनके एक वंशज ने न्यूयॉर्क जीता.

बिहार चुनाव में महिलाओं की वोटिंग अब तक की सबसे ज्यादा क्यों रही

इस विधानसभा चुनाव में बिहार में महिलाओं की भागीदारी रिकॉर्ड तोड़ रही — 71.6 फीसदी जो 1962 के बाद सबसे ज्यादा है.

अल-फलाह यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स में डर — ‘हो सकता है कोई और इसमें शामिल व्यक्ति अब भी अंदर हो’

यूनिवर्सिटी में काम करने वाले एक डॉक्टर ने कहा, ‘अभी एडमिशन का टाइम है, अगर यूनिवर्सिटी की छवि खराब हुई तो एडमिशन पर असर पड़ेगा. हम जांच एजेंसियों की मदद कर रहे हैं.’

कैसे ‘मोहब्बत की नदी’ से चिनाब बन गई बेचैन टिक-टिक करता टाइम बम

चिनाब नदी के किनारे रहने वाले 23 साल के एक युवक ने कहा, ‘अगर हम इसकी धार को यूं ही समेटते रहे, तो ये ज़रूर हमारे घरों में घुस आएगी. इसे गुस्सैल नदी कैसे कह सकते हैं, इसमें नदी की गलती तो नहीं है.’

मिशन त्रिशूल से मोहन भागवत की यात्राओं तक: बिहार में क्या खोज रहा है RSS?

मंडल की राजनीति ने पिछड़ों, दलितों और अति पिछड़ों की पहचान को राजनीतिक चेतना में बदल दिया है. ऐसे में, RSS का एकीकृत हिंदू समाज का विचार उस विविधता से टकराता है जो बिहार की राजनीति की आत्मा है.

BJP की एकरूपता वाली नीति ठीक नहीं है. लद्दाख दिखाता है कि संघवाद हमारी लोकतंत्र की असली नींव है

बीजेपी के बहुसंख्यकवादी और एकरूपता वाले एजेंडा, जैसे ‘वन नेशन, वन पीपल, वन कल्चर’, क्षेत्रीय पहचानों के लिए खतरा पैदा करते हैं.

क्या प्रशांत किशोर बिहार के केजरीवाल हैं? हां, लेकिन पूरी तरह नहीं

14 नवंबर को जो भी नतीजा आए, पीके बतौर नेता बिहार की राजनीति में अपनी जगह बना चुके हैं. वह अब चुनावी रणनीतिकार वाले पीके नहीं, एक अलग पीके हैं.

सऊदी अरब की तेल की ताकत घट रही है. इसका अमेरिका के साथ उसके रिश्तों पर क्या असर पड़ेगा?

इसमें कोई संदेह नहीं कि सऊदी अरब ने अपनी समस्याओं को खुद बढ़ाया है, जिसका कारण नेतृत्व का अहंकार और खराब सलाह है. ‘दि लाइन’ इसका स्पष्ट उदाहरण है.

बिहार की विपक्षी पार्टियां प्रवासन को गलत नजरिए से देख रहे हैं

प्रवासियों और उनके परिवारों के एक बड़े वर्ग की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में बदलाव आ रहा है. इससे उन्हें समाज में सम्मानजनक दर्जा हासिल करने में मदद मिल रही है.

चिनाब का बदलता चेहरा— मोहब्बत की नदी कैसे ‘टाइम बम’ में तब्दील हो गई

चिनाब नदी के किनारे रहने वाली 23 साल की युवती ने कहा, “अगर हम इसका तल लगातार छोटा करते रहेंगे, तो यह जरूर हमारे घरों में घुसेगी. इसे गुस्साई नदी कैसे कह सकते हैं, गलती नदी की नहीं है.”

मत-विमत

‘हाल मुकाम’ में बेदखली: इंडिया आर्ट फेयर में मलबे से निकली लाल ईंटें और उनसे बनी एक बेचैन दुनिया

इंडिया आर्ट फेयर में सबसे ज़्यादा चर्चा में रहने वाला आर्टवर्क किसी परिभाषा में नहीं बंधता—गिरजेश कुमार सिंह मलबे से निकाली गई ईंटों से लोगों और उनके बैग की मूर्तियां बनाते हैं. इस प्रदर्शनी का नाम 'हाल मुकाम' है.

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‘डिजिटल अरेस्ट’ मामले में दो लोग गिरफ्तार, 100 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी का खुलासा : पुलिस

नयी दिल्ली, आठ फरवरी (भाषा) दिल्ली पुलिस ने कम से कम 190 साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों और 100 करोड़ रुपये से अधिक से जुड़े...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.