अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा के प्रमुख देवेंद्र बूड़िया और संरक्षक कुलदीप बिश्नोई ने एक्स पर साझा किए गए अलग-अलग पत्रों के माध्यम से एक-दूसरे को अपने-अपने पदों से हटा दिया है.
दिप्रिंट से बातचीत के दौरान पांच बार विधायक रह चुके नवाब मलिक ने अजित पवार की अगुवाई वाली एनसीपी में शामिल होने के अपने फैसले और महायुति सहयोगी भाजपा के नेताओं की सांप्रदायिक टिप्पणियों के बारे में भी बात की.
महाराष्ट्र, झारखंड, बिहार, कर्नाटक, मेघालय, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में उपचुनाव होने जा रहे हैं. कई सीटों पर मुकाबला बहुध्रुवीय है.
लोकसभा चुनाव में महायुति सहयोगियों और उद्धव सेना से बेहतर स्ट्राइक रेट के साथ, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, जो अब राज्य चुनावों में अपनी सबसे बड़ी परीक्षा का सामना करने वाले हैं, ने कहा कि उनकी सरकार ‘24/7’ काम करती है.
भाजपा के सहयोगी दल — शिंदे सेना और अजित पवार की एनसीपी — का कहना है कि राज्य में इस तरह की टिप्पणियों का स्वागत नहीं किया जाता, लेकिन भाजपा को लगता है कि ‘वोट जिहाद’ ने लोकसभा चुनावों में उन्हें नुकसान पहुंचाया है, लेकिन इससे उन्हें राज्य चुनावों में फायदा हो सकता है.
दो संयुक्त आयुक्तों, दो उप नगर आयुक्तों और एक कार्यकारी अधिकारी को वेतन कटौती का सामना करना पड़ रहा है, जबकि पराली जलाने की घटनाओं को रोकने में विफल रहने के कारण 24 को निलंबित कर दिया गया है — और यह सब 20 दिनों के भीतर हुआ है.
जेपी नड्डा ने 2 महीने में तीन बार बिहार का दौरा किया है. दोनों पक्षों के पार्टी नेताओं का कहना है कि उच्च दांव को देखते हुए, जेडी(यू) से निपटने में भाजपा की रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव आया है.
पार्टी ने पहले विधानसभा सत्र में बिना किसी सीएलपी नेता के प्रवेश किया और अब, जबकि शीतकालीन सत्र 13 नवंबर से शुरू होने वाला है, इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि यह प्रतिष्ठित पद किसे मिलेगा.
भाजपा ने झारखंड में अपने प्रमुख नेताओं मोदी और शाह को उतार दिया है, जबकि कांग्रेस की शुरुआत धीमी है, जिससे जेएमएम के हेमंत और कल्पना सोरेन को अपने कंधों पर चुनाव प्रचार का जिम्मा उठाना पड़ा है.