बंगाल में जहां आईएसएफ और एआईएमआईएम नाकाम रहे, असम में एआईयूडीएफ-कांग्रेस गठबंधन भाजपा को फिर सत्ता में आने से नहीं रोक पाया. केरल में आईयूएमएल के प्रदर्शन में भी कमी आई है.
संविधान की धारा 164(4) के अंतर्गत, एक अनिर्वाचित सदस्य सीएम का पद संभाल सकता है, लेकिन अपना पद बनाए रखने के लिए, छह महीने के भीतर, उसे या तो कोई उप-चुनाव जीतना होगा, या विधान परिषद में चुनकर आना होगा.
CAA के तहत पड़ोस के तीन मुस्लिम बहुल देशों के 6 अल्पसंख्यक समुदायों की नागरिकता को आसान बनाने का वादा किया गया है. यह कानून जिसका मतुआ और राजबंशी अभी इंतजार कर रहे हैं.
महा विकास अघाड़ी के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस की जीत ने यह भी साबित कर दिया कि राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा को हराने का एक तरीका क्षेत्रीय बलों और गैर-भाजपा दलों की ताकत को एकजुट करना है
तृणमूल कांग्रेस के 148 दल बदलुओं में से, जिन्हें बीजेपी से टिकट मिले थे, और जिनमें एक दर्जन से अधिक सिटिंग विधायक थे, सिर्फ छह जीत हासिल कर पाए हैं, जिससे भगवा पार्टी के भीतर भी असंतोष बढ़ गया है.
चुनाव जीतने के बाद से ही लगातार आ रही हिंसा की खबरों के बीच ममता बनर्जी ने अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील की है. राज्य में मार्च और अप्रैल में आठ चरण में मतदान हुआ था.
अभिषेक बनर्जी को इस चुनाव में, एक अहम भूमिका निभाते हुए देखा गया है. तृणमूल ने साउथ परगना में 31 में से 29 सीटें जीती हैं, जिसे अभिषेक का गढ़ माना जाता है.
अवामी लीग को अभी इस सवाल का जवाब नहीं चाहिए कि हसीना के बाद कौन होगा या यह बहस कि हसीना को बांग्लादेश लौटना चाहिए या नहीं, बल्कि ज़मीन पर नया नेतृत्व चाहिए.